इसका आशय राजनीतिक हलकों में यह निकाला जा रहा है कि संसाधनों का प्रबंध कर भीड़ तो जैसे-तैसे सम्मान बचाने लायक बुला ली गई, लेकिन बसपा के मूल मतदाता का अखिलेश यादव से जुड़ना अभी संभव नहीं दिख रहा है। दरअसल दशकों से बसपा की राजनीति करते आ रहे रामअचल राजभर व लालजी वर्मा से जुड़े ज्यादातर कार्यकर्ता बसपा के ही हैं। वे सब ही इस रैली में पहुंचे थे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दशकों से यह सब कार्यकर्ता अखिलेश व सपा के विरोध में बोलते आए हैं। अब संसाधनों का इंतजाम होने से रैली में तो पहुंच गए, लेकिन सपा से उनका कनेक्ट हो पाना अभी सहज नहीं है। हालांकि रामअचल व लालजी के अनुसार रैली अभूतपूर्व रही है।