इस मुस्लिम नेता को अपनी पार्टी में लाकर सपा एक तीर से दो निशाने साधेगी। दरअसल सपा के एक पूर्व मंत्री और इनकी पुरानी सियासी अदावत रही है। इनके आने से सपा पूर्व मंत्री पर भी दबाव बना सकती है क्योंकि जिस तरह से जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में आपसी फूट सामने आई थी और सभी पक्षों की सपा मुखिया के सामने पेशी हुई, उसने यह साबित कर दिया था कि सपा थिंक टैंक भी विकल्पों पर विचार कर रहा है।
दो सीटों पर दावे के बाद अब उत्साह नहीं
बसपा के यह दिग्गज पश्चिमी यूपी की किठौर व गढ़ सीट पर अपना दावा कर रहे थे। उन्होंने इस क्षेत्र में टिकट चयनकर्ताओं को भी इशारा किया था कि इन सीटों पर किसी का नाम फाइनल मत करना। वहां उनके उम्मीदवार रहेंगे। चयनकर्ताओं ने भी उनका सम्मान रखा लेकिन अब इन दोनों ही सीटों पर वह कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। माना जा रहा है कि सपा मुखिया से मुलाकात के बाद ही उनका रवैया एकदम बदल सा गया है।