27 साल पुराने बलवा, तोड़फोड़ करने के मामले में अभियोजन द्वारा पुलिस के गवाहों को पेश न करने पर एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने कड़ा रुख अपनाते हुए अभियोजन के साक्ष्य रखने का अवसर समाप्त कर दिया।
कोर्ट ने सपा सरकार में राज्य मंत्री रहे अरविंद कुमार गोप सहित 12 आरोपियों का बयान दर्ज करने के लिए तलब करते हुए मामले में सुनवाई के लिए 21 अक्तूबर की तारीख तय की है।
पत्रावली के अनुसार, 21 फरवरी 1994 को मामले की रिपोर्ट थाना हसनगंज में वरिष्ठ उपनिरीक्षक ने दर्ज कराकर 16 लोगों को आरोपी बनाया था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट के कई बार आदेश के बाद भी पुलिसकर्मी गवाह कोर्ट में गवाही के लिए हाजिर नहीं हो रहे थे।
इस पर कोर्ट ने गत 9 सितंबर को जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर, पुलिस महानिदेशक एवं गृह सचिव को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया था कि गवाह पुलिसकर्मी हैं फिर भी उन्हें पेश नहीं किया जा रहा है।
मामला काफी पुराना है और उच्चतम न्यायालय के निर्देश है कि मामले का शीघ्र निस्तारण किया जाए।
अदालत के समक्ष बृहस्पतिवार को आरोपी मेराज अहमद, मनोज सिंह, प्रदुमन वर्मा, विवेकानंद, शैलेंद्र सिंह, विश्वकांत पांडे, मुकेश शुक्ला एवं जितेंद्र मिश्रा उपस्थित थे।
जबकि अरविंद कुमार गोप, धीरेंद्र सिंह, रमेश प्रताप सिंह एवं राजीव कुमार सिंह की ओर से हाजिरी माफी प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है।