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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि का महापर्व आज, जानें चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त

Wed, 26 Feb 2025 06:42 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mahashivratri Wishes, Puja Shubh Muhurat in Hindi: आज फाल्गुन मास  के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज देश भर में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि के साथ ही आज महाकुंभ का समापन होगा। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि पूजन, जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, आरती, चालीसा, मंत्र समेत सम्पूर्ण जानकारी। 
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महाशिवरात्रि 2025 - फोटो : amar ujala
MahaShivratri 2025 Shubh Muhurat and Jalabhishek Time: आज देश भर में महाशिवरात्रि मनाई जा रही है। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्रि का अत्यधिक महत्व है। पुराणों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। इसे शिव-पार्वती के मिलन का दिन भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शंकर जी और देवी पार्वती की पूजा करने से वे प्रसन्न होते हैं और सभी दुखों का निवारण करते हैं। इस अवसर पर महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए निर्जला उपवास रखती हैं।  इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। इस दिन जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। माना जाता है कि इस दिन शिव की कृपा से व्यक्ति के सभी दुखों का अंत होता है और उसे सुख-समृद्धि का वास होता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी क्रम में आइये जानते हैं शिवरात्रि की तिथि, पूजा विधि और मुहूर्त से लेकर सम्पूर्ण जानकारी। 
 
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महाशिवरात्रि तिथि: Mahashivratri 2025 Date 
महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरूआत कल यानी 26 फरवरी को प्रातः  11:08 मिनट से होगी और इसका समापन 27 फरवरी को प्रातः 08:54 पर होगा। 

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महाशिवरात्रि 2025 पूजा का शुभ मुहूर्त: Mahashivratri Puja Shubh Muhrat 

महाशिवरात्रि पर निशिता काल में पूजा का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष निशिता पूजा का शुभ समय देर रात 12:09 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। यह समय तंत्र, मंत्र और सिद्धि के दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ माना जाता है।

महाशिवरात्रि पर चार प्रहर पूजा मुहूर्त: 
प्रथम प्रहर पूजा समय -  26 फरवरी को शाम 06 बजकर 19 मिनट से रात 09 बजकर 26 मिनट तक
द्वितीय प्रहर पूजा समय - 26 फरवरी को रात 09 बजकर 26 मिनट से रात 12 बजकर 34 मिनट तक
तृतीय प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी की रात 12 बजकर 34 मिनट से सुबह 03 बजकर 41 मिनट तक
चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को सुबह 03 बजकर 41 मिनट से सुबह 06 बजकर 44 मिनट तक
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महाशिवरात्रि पर शुभ योग : Shubh Yog On Mahashivrastri 2025 
इस बार महाशिवरात्रि पर बुधादित्य योग, मालव्य राजयोग व त्रिग्रही योग बन रहे हैं। धन के दाता शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे। इन सुयोगों में शिवार्चन से भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होंगे।
 
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महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व:  Importance of MahaShivratri Puja  

महाशिवरात्रि के दिन उपवास रखकर भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा का विधान है। शिवपुराण के अनुसार, शिवजी के निराकार स्वरूप का प्रतीक 'लिंग' इस पावन तिथि की महानिशा में प्रकट हुआ था और इसे सबसे पहले ब्रह्मा और विष्णु ने पूजा। महाशिवरात्रि मानवता के लिए शिवजी की कृपा प्राप्त करने का एक पवित्र अवसर है। इस दिन जो व्यक्ति भगवान भोलेनाथ की उपासना करता है, वह अत्यंत भाग्यशाली होता है। शिवलिंग का पूजन और अभिषेक करने से सभी देवी-देवताओं के अभिषेक का फल तुरंत प्राप्त होता है।
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महाशिवरात्रि पर बन रहे हैं 2 राजयोग : Rajyog on Mahashivratri 

इस साल महाशिवरात्रि के दिन शश और मालव्य राजयोग बनेगा।इसमें शश राजयोग का निर्माण न्याय व दंड के देवता शनि देव तो दैत्यों के गुरू शुक्र ग्रह मालव्य राजयोग बनाएंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्तमान में धन, वैभव, ऐश्वर्य के दाता शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में विराजमान है, जिससे मालव्य राजयोग का निर्माण हुआ है।वही शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान है, जिससे शश राजयोग बना है। 

शश राजयोग को पंचमहापुरुष योगों में से एक माना जाता है। जब शनि लग्न भाव से या चंद्र भाव से केंद्र भाव पर हो यानि शनि देव यदि किसी कुंडली में लग्न अथाव चंद्रमा से 1, 4, 7 या 10वें स्थान में तुला, मकर या कुंभ राशि में विराजमान हो तो ऐसी कुंडली में शश योग का निर्माण होता है। इस राजयोग से धन और शौहरत में वृद्धि होती है।व्यक्ति राजाओं जैसी जिंदगी जीता है।

मालव्य राजयोग शुक्र से संबंधित है, जिस भी जातक की कुंडली में शुक्र लग्न से अथवा चन्द्रमा से केन्द्र के घरों में स्थित है अर्थात शुक्र यदि कुंडली में लग्न अथवा चन्द्रमा से 1, 4, 7 अथवा 10वें घर में वृष, तुला अथवा मीन राशि में स्थित है तो कुंडली में मालव्य राजयोग बनता है। अगर शुक्र ग्रह पर सूर्य या गुरु की दृष्टि पड़ रही है तो इस राजयोग का फल व्यक्ति को कम प्रदान होगा। क्योंकि सूर्य और गुरु का शुक्र के साथ शत्रुता का भाव है।

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महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर क्या अर्पित करें:
  • दूध: दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है जिसे शिवलिंग पर अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है।
  • दही: दही शुक्र का प्रतीक हैं इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन में समृद्धि आती है।
  • शहद: शहद को सूर्यदेव का प्रतीक माना जाता है और इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से तेज और यश की प्राप्ति होती है।  
  • घी: घी को अग्नि का प्रतीक माना जाता है जिसे शिवलिंग पर अर्पित करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।  
  • गंगाजल: गंगाजल को मोक्ष का प्रतीक माना जाता है और भगवान शिव का इससे जलाभिषेक करने से सभी पाप नष्ट होते हैं।   
  • बेल पत्र: बेल पत्र भगवान शिव का प्रिय माना जाता है और इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।  
  • धतूरा: धतूरा भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है और इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से शत्रुओं का नाश होता है।  
  • फूल: फूल प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है और इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।  
  • चावल: चावल अन्न का प्रतीक माना जाता है और इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।  

भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र कैसे अर्पित करें 
  • भगवान शिव की पूजा के लिए शिवलिंग पर फल, फूल, बेलपत्र आदि अर्पित करते हैं। बेलपत्र का पूजा में विशेष धार्मिक महत्व है। इसलिए, बेलपत्र अर्पित करते समय सही विधि का पालन करना आवश्यक है, अन्यथा पूजा अधूरी मानी जा सकती है। बेलपत्र चढ़ाने की सही विधि के बारे में जानते हैं।
  • बेलपत्र को अच्छे से धो लें। फिर, चंदन या केसर में गंगाजल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें और पत्तियों पर ॐ लिखें।
  • जब आप बेल पत्र भगवान शिव को अर्पित करें, तो ध्यान रखें कि उसका चिकना हिस्सा नीचे की ओर हो। 
  • इसके बाद "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। 
  • आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं:  "त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्।"

बेल पत्र कैसा होना चाहिए?
बेल पत्र हमेशा तीन पत्तों वाला होना चाहिए। तीन से कम पत्तों वाला बेल पत्र पूजा में नहीं उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा, बेल पत्र का डंठल पहले से तोड़ लेना चाहिए, क्योंकि जितना छोटा डंठल होगा, उतना ही शुभ माना जाता है। बेल पत्र को हमेशा विषम संख्या में अर्पित करें, जैसे 3, 7, 11, या 21। शिवलिंग पर कभी भी गंदे, दाग-धब्बेदार या कटी-फटी बेल पत्र न चढ़ाएं। ऐसा करने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं। 

महाशिवरात्रि पूजन सामग्री : Mahashivratri Pujan Samagri:
धूप, दीप, अक्षत, सफेद, घी, बेल, भांग, बेर, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, गंगा जल, कपूर, मलयागिरी, चंदन, पंच मिष्ठान, शिव व मां पार्वती के श्रृंगार की सामग्री,पंच मेवा, शक्कर, शहद, आम्र मंजरी, जौ की बालियां, वस्त्राभूषण, चंदन, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, दही, फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, तुलसी दल, मौली जनेऊ, पंच रस, इत्र, गंध रोली, कुश ,आसन आदि।

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और घी चढ़ाने से क्या होता है लाभ

महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा का महत्व

शिवलिंग भगवान शिव का दिव्य और चेतनात्मक रूप है, जिसे ब्रह्मांड की सृष्टि, पालन और संहार की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग की पूजा से सभी पापों का नाश होता है, जीवन में शांति और समृद्धि का आगमन होता है, और भक्तों को भौतिक एवं आध्यात्मिक सुखों की प्राप्ति होती है। शिवलिंग का पूजन और अभिषेक करने से सभी देवी-देवताओं के अभिषेक और पूजा का फल तुरंत प्राप्त होता है।

शिवलिंग पूजन के लाभ
  • पाप से मुक्ति- शिवलिंग पर जल और पंचामृत चढ़ाने से व्यक्ति के पूर्वजन्म और वर्तमान जन्म के पाप समाप्त हो जाते हैं।
  • अखंड सुख और समृद्धि - शिवलिंग की पूजा से घर में सुख, शांति और धन की वृद्धि होती है।
  • संतान सुख - पार्थिव शिवलिंग की पूजा संतान प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
  • रोग और कष्टों से मुक्ति - विशेष रूप से शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाने से गंभीर बीमारियों और कष्टों से छुटकारा मिलता है।
  • शत्रु बाधा से मुक्ति - शिवलिंग की पूजा करने से शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
  • वैवाहिक सुख - विवाह में बाधा या दांपत्य जीवन में समस्याओं के समाधान के लिए शिवलिंग पर केसर और दूध अर्पित करने से मधुरता आती है।
  • मोक्ष प्राप्ति - शिवरात्रि पर रात्रि जागरण करके शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त हो सकता है।

आखिर क्यों चढ़ाया जाता है महादेव को बेलपत्र और जल ?

महाशिवरात्रि की पूजा में भोलेनाथ को बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान कालकूट नामक विष उत्पन्न हुआ था, जिससे सभी देवता और जीव-जंतु परेशान हो गए थे। इस संकट से निपटने के लिए देवताओं और असुरों ने महाकाल की आराधना की और उनसे सुरक्षा की प्रार्थना की। मान्यता है कि उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान शिव ने उस विष को अपनी हथेली पर धारण किया और उसे अपने कंठ में रोक लिया ताकि सृष्टि की रक्षा हो सके।

विष के प्रभाव से महादेव का मस्तिष्क गर्म हो गया। इस स्थिति को शांत करने के लिए सभी ने उन पर जल छिड़कना शुरू कर दिया। इसके साथ ही, ठंडक प्रदान करने के लिए उन्हें बेलपत्र भी अर्पित किया गया। तभी से भोलेनाथ को जल और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा स्थापित हुई। कहा जाता है कि यदि सच्चे मन और प्रेम से महाकाल को बेलपत्र और जल अर्पित किया जाए, तो जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है।

महाशिवरात्रि पर करें ये उपाय
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर जल में दूध, मिश्री और काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। 
  • महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर जरूरतमंद व्यक्ति को अनाज और धन का दान करना चाहिए। इससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
  • महाशिवरात्रि पर विधि-विधान से शिव जी की पूजा करें और सच्चे मन से उपवास भी रखें। इसके बाद आप पूजा के समय जल में शहद मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। मान्यता है कि इससे नौकरी, करियर और व्यापार में आ रही बाधाएं समाप्त होने लगती हैं।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ को भांग, धूतरा और आक का पुष्प अर्पित किया जाए तो वह प्रसन्न होते हैं। यही नहीं इससे शीघ्र विवाह के योग भी बनते हैं।
  • ज्योतिषियों के अनुसार शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर केसर मिला हुआ दूध चढ़ाएं। ऐसा करने पर विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। इस दौरान भगवान शिव को पीले रंग का फूल भी अर्पित करें। इससे वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

Maha Kumbh Aakhri Snan: महाशिवरात्रि पर महाकुंभ का आखिरी स्नान, इस विधि से पाएं भगवान शिव का आशीर्वाद

कल महाशिवरात्रि पर अंतिम स्नान के स्नान साथ होगा महाकुम्भ का समापन 
महाकुंभ का पवित्र पर्व 13 जनवरी से प्रारंभ हुआ था, जिसका समापन 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर आखिरी स्नान के साथ होगा। महाकुंभ के अंतिम दिन महाशिवरात्रि के अवसर पर त्रिवेणी संगम या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह स्नान मोक्षदायी होता है और व्यक्ति के पापों का नाश कर पुण्य प्रदान करता है। इस दिन की स्नान विधि इस प्रकार है- 
  • स्नान करने से पहले गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का स्मरण करें। जल अर्पण करते हुए संकल्प लें कि यह स्नान आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जा रहा है।
  • स्नान के दौरान "ॐ नमः शिवाय" और "हर हर गंगे" मंत्र का जाप करें और तीन या सात बार डुबकी लगाएं। सूर्य को जल अर्पित करते हुए "ॐ घृणिः सूर्याय नमः" मंत्र बोलें।
  • स्नान के पश्चात जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान करें। शिवलिंग पर जल, दूध, बिल्वपत्र और धतूरा चढ़ाएं।
  • साथ ही आप रुद्राभिषेक कर सकते हैं या "महामृत्युंजय मंत्र" का जाप करें।

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महाशिवरात्रि पूजन मंत्र: Mahashivratri pujan Mantra
  • ॐ ऊर्ध्व भू फट् । ॐ नमः शिवाय । ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय ।
  • ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा ।
  • ॐ इं क्षं मं औं अं । ॐ प्रौं ह्रीं ठः ।
  • ॐ नमो नीलकण्ठाय । ॐ पार्वतीपतये नमः । ॐ पशुपतये नम:।

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महाशिवरात्रि के दिन विशेष फल कैसे प्राप्त करें?

महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर विशेष रूप से दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करने से व्यक्ति को मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। इस दिन चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है।
  • पहला प्रहर- स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्ति के लिए।
  • दूसरा प्रहर- धन और समृद्धि के लिए।
  • तीसरा प्रहर- मनोकामना पूर्ति और संतान सुख के लिए।
  • चौथा प्रहर- मोक्ष और शिव कृपा प्राप्त करने के लिए।

महाशिवरात्रि पर ज़रूर करें शिव चालीसा का पाठ 
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥


जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाए। मुण्डमाल तन छार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघंबर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥

कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥दोहा॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण

 

महाशिवरात्रि के अवसर पर करें पावन तस्वीरों में भोले भंडारी के दर्शन।

Mahashivratri Calendar 2025: 'शिव ही सत्य...शिव ही शक्ति, तस्वीरों में करें भोले भंडारी के दर्श

महाशिवरात्रि पर ज़रूर करें शिवाष्टकम का पाठ 
Shivashtakam: जय शिवशंकर, जय गंगाधर.. 

जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करुणाकर करतार हरे,
जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशी सुख-सार हरे,
जय शशि-शेखर, जय डमरू-धर, जय जय प्रेमागार हरे,
जय त्रिपुरारी, जय मदहारी, अमित अनन्त अपार हरे,
निर्गुण जय जय सगुण अनामय, निराकार, साकार हरे ,
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ १ ॥
जय रामेश्वर, जय नागेश्वर, वैद्यनाथ, केदार हरे,
मल्लिकार्जुन, सोमनाथ जय, महाकाल ओंकार हरे,
त्रयम्बकेश्वर, जय घुश्मेस्वर, भीमेश्वर, जगतार हरे,
काशीपति, श्री विश्वनाथ जय, मंगलमय अघ-हार हरे,
नीलकण्ठ जय, भूतनाथ, मृत्युंजय, अविकार हरे,
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ २ ॥

जय महेश, जय जय भवेश, जय आदिदेव महादेव विभो,
किस मुख से हे गुणातीत प्रभु, तव महिमा अपार वर्णन हो,
जय भवकारक, तारक, हारक, पातक-दारक, शिव शम्भो,
दीन दुःखहर, सर्व सुखाकर, प्रेम सुधाकर शिव शम्भो,
पार लगा दो भवसागर से, बनकर करुणाधार हरे,
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ३ ॥

जय मनभावन, जय अतिपावन, शोक-नशावन शिव शम्भो,
सहज वचन हर, जलज-नयन-वर, धवल-वरन-तन शिव शम्भो,
विपद विदारन, अधम उबारन, सत्य सनातन, शिव शम्भो,
सहज वचन हर, जलज-नयन-वर, धवल-वरन-तन शिव शम्भो,
मदन-कदन-कर पाप हरन हर-चरन मनन धन शिव शम्भो,
विवसन, विश्वरूप प्रलयंकर, जग के मूलाधार हरे,
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ४ ॥

भोलानाथ कृपालु दयामय, औघड़दानी शिव योगी,
निमित्र मात्र में देते हैं, नवनिधि मनमानी शिव योगी,
सरल ह्रदय अतिकरुणा सागर, अकथ कहानी शिव योगी,
भक्तों पर सर्वस्व लुटा कर बने मसानी शिव योगी,
स्वयं अकिंचन, जनमन रंजन, पर शिव परम उदार हरे,
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ५॥

आशुतोष इस मोहमयी निद्रा से मुझे जगा देना,
विषय-वेदना से विषयों को माया-धीश छुड़ा देना,
रूप-सुधा की एक बूँद से जीवन मुक्त बना देना,
दिव्य-ज्ञान-भण्डार-युगल-चरणों में लगन लगा देना,
एक बार इस मन मन्दिर में कीजे पद संचार हरे,
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ६ ॥

दानी हो, दो भिक्षा में अपनी अनपायनि भक्ति प्रभो,
शक्तिमान हो, दो तुम अपने चरणों में अनुरक्ति प्रभो,
पूर्ण ब्रह्म हो, दो तुम अपने रूप का सच्चा ज्ञान प्रभो,
स्वामी हो, निज सेवक की सुन लेना करुण पुकार हरे,
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ७ ॥

तुम बिन, व्याकुल हूँ प्राणेश्वर आ जाओ भगवंत हरे,
चरण-शरण की बांह गहो, हे उमा-रमण प्रियकंत हरे,
विरह व्यथित हूँ, दीन दुःखी हूँ, दीन दयालु अनन्त हरे,
आओ तुम मेरे हो जाओ, आ जाओ श्रीमन्त हरे,
मेरी इस दयनीय दशा पर, कुछ तो करो विचार हरे,
पार्वती पति, हर हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे ॥ ८ ॥

भगवान शिव को सामग्री चढ़ाते हुए मंत्र

रुद्राभिषेक मंत्र से भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग पर दुग्ध, घी, शुद्ध जल, गंगाजल, शक्कर, गन्ने का रस, बूरा, पंचामृत, शहद, आदि अर्पित करते हुए इन मंत्रों का जाप करें। 

रुद्रा: पञ्चविधाः प्रोक्ता देशिकैरुत्तरोतरं | सांगस्तवाद्यो रूपकाख्य: सशीर्षो
रूद्र उच्च्यते|| एकादशगुणैस्तद्वद् रुद्रौ संज्ञो द्वितीयकः । एकदशभिरेता
भिस्तृतीयो लघु रुद्रकः।।

महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त
  • ब्रह्म मुहूर्त- 26 फरवरी को प्रात: काल में 05:17 से लेकर 06:05 मिनट तक
  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:29 से रात 09 बजकर 34 मिनट तक
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - रात 09:34 से 27 फरवरी सुबह 12 बजकर 39 मिनट तक
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को रात 12:39 से सुबह 03 बजकर 45 मिनट तक
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को सुबह 03:45 से 06 बजकर 50 मिनट तक

शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र

मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।

महाशिवरात्रि व्रत के नियम
  • इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • यदि निर्जला व्रत न कर रहे हों तो फलाहार करें। प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज करें।
  • इस दिन नियमित शिव मंत्रों का जाप करें। "ॐ नमः शिवाय" और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ होता है।
  • इस दिन सदाचार का पालन करना चाहिए। क्रोध, अहंकार, निंदा आदि से दूर रहें। संयमित व्यवहार रखें और मन को शांत रखें।
  • इसके अलावा पूरी रात शिव भक्ति में लीन रहें और भजन-कीर्तन करें। चार प्रहर में शिवलिंग का पूजन करें।

महाशिवरात्रि की पूजा विधि
  • शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल अर्पित करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत, भस्म और सफेद फूल चढ़ाएं। साथ ही धूप-दीप जलाकर शिव की आरती करें और भजन गाएं।
  • इस दौरान आप शिवपुराण और रुद्राष्टक का पाठ भी कर सकते हैं। 

आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा  है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरूआत आज 26 फरवरी को प्रातः  11:08 मिनट से होगी और इसका समापन 27 फरवरी को प्रातः 08:54 पर होगा। 

महाशिवरात्रि व्रत का महत्व (Mahashivratri 2025 Vrat Significance)
महाशिवरात्रि का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन महादेव की पूजा के साथ व्रत का पालन करता है, उसे जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, जो अविवाहित कन्याएं शिवरात्रि का व्रत और पूजन करती हैं, उन्हें शीघ्र विवाह के अवसर प्राप्त होते हैं और मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि पर पुण्यकाल: Punya Kaal on Mahashivratri 

महाशिवरात्रि पर इस बार 21. 46 घंटे का पुण्यकाल बन रहा है। इस महायोग में संगम में श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगाएंगे। मकर राशि पर चंद्रमा के गोचर करने के साथ ही परिघ योग में संगम में डुबकी से आखिरी स्नान पर्व का पुण्य अर्जित करेंगे।

महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त: Mahashivratri 2025 Shubh Muhurat
महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत 05:09 बजे होगी। ब्रह्म मुहूर्त का समापन 5: 59 बजे हो जाएगा।
गोधूलि मुहूर्त शाम 6:16 बजे शुरु होगा। यह मुहूर्त शाम 6: 42 बजे तक रहेगा। 
इसके बाद निशीथ काल मुहूर्त रात 12:09 बजे से 12: 59 बजे तक रहेगा। 
महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में महाकुंभ का अंतिम स्नान शुरू होगा। ब्रह्म मुहूर्त में संगम में स्नान करना विशेष फलदायी होता है।

महाशिवरात्रि पर शुभ योग : Shubh Yog On Mahashivratri 

इस बार महाशिवरात्रि पर बुधादित्य योग, मालव्य राजयोग व त्रिग्रही योग बन रहे हैं। धन के दाता शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे। इन सुयोगों में भगवान भोलेनाथ की आराधना से भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होंगे। इसके अलावा महाशिवरात्रि के दिन  धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ योग,शकुनी करण और मकर राशि पर चंद्रमा की उपस्थिति रहेगी। इस दिन आराधना से शिव जी की कृपा प्राप्त होती है।
 

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Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर पूजा मुहूर्त: Mahashivratri Pujan Muhurat Of Char Prahar 
  • प्रथम प्रहर पूजा समय -  26 फरवरी को शाम 06 बजकर 29 मिनट से रात 09 बजकर 34 मिनट तक
  • द्वितीय प्रहर पूजा समय - 26 फरवरी को रात 09 बजकर 34 मिनट से 27 फरवरी, रात 12 बजकर 39 मिनट तक
  • तृतीय प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी की रात 12 बजकर 39 मिनट से सुबह 03 बजकर 45 मिनट तक
  • चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को सुबह 03 बजकर 45  मिनट से सुबह 06 बजकर 50 मिनट तक

 मध्य प्रदेश: महाशिवरात्रि के अवसर पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आरती की जा रही है
 

दिल्ली: महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्तों ने महिपालपुर के शिव मूर्ति मंदिर में किया अभिषेक
 

देवघर, झारखंड: महा शिवरात्रि के अवसर पर श्री बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं
 

वाराणसी: महाशिवरात्रि के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती की गई।
 

अयोध्या, उत्तर प्रदेश: महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं ने सूर्य नदी के तट पर पूजा-अर्चना की और पवित्र दीप जलाए
 

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Mahashivratri 2025 Wishes - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अपने प्रियजनों को दें शुभकामनाएं 

अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चाण्डाल का
काल भी उसका क्या बिगाड़े
जो भक्त हो महाकाल का।
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

Mahashivratri 2025: अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चाण्डाल का... इन संदेशों से दें सभी शिव भक्तों को शुभकामनाएं
 

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महाशिवरात्रि 2025 की शुभकामनाएं - फोटो : Amar ujala
ॐ में ही आस्था, ॐ में ही विश्वास
ॐ में ही शक्ति, ॐ में ही सारा संसार
ॐ से ही होती हैं अच्छे दिन की शुरुआत
जय शिव शंकर!
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं


महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व आपके लिए मंगलमय हो!
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं


अद्भुत भोले तेरी माया
अमरनाथ में डेरा जमाया
नीलकंठ में तेरा साया
तू ही मेरे दिल में समाया
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं


काल भी तुम और महाकाल भी तुम
लोक भी तुम और त्रिलोक भी तुम
शिव भी तुम और सत्य भी तुम।
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

मुंबई: महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री बाबुलनाथ मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की
 

मध्य प्रदेश: नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, "महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर महाकाल के दर्शन पाकर मैं सौभाग्यशाली हूं... यहां की व्यवस्था बहुत अच्छी है... हम प्रार्थना करते हैं कि हमें राष्ट्र की और भी बेहतर सेवा करने की शक्ति मिले..."
 

उत्तर प्रदेश: प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ2025 के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मेला आज, 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन संपन्न होगा।
 

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mahashivratri 2025 - फोटो : adobe stock
तीन पत्तियों वाले बेलपत्र का महत्व: Kya hai Belpatra Ka Mahatv

त्रिमूर्ति का प्रतीक: हिंदू धर्म में त्रिमूर्ति, अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु और महेश का सर्वोच्च स्थान है। बेलपत्र की तीन पत्तियां इन तीनों देवताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। मान्यता है कि बेलपत्र अर्पित करने से इन देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
तीन गुणों का प्रतीक: बेलपत्र की तीन पत्तियां सृष्टि के तीन गुणों—सत्व, रज और तम का प्रतीक मानी जाती हैं। ये गुण सभी जीवों में विद्यमान होते हैं।
शिव के त्रिनेत्र का प्रतीक: तीन पत्तियां भगवान शिव के त्रिनेत्र (तीन आंखें) का भी प्रतीक मानी जाती हैं।
शिव के त्रिशूल और त्रिपुंड: तीन पत्तियों वाला बेलपत्र पूर्णता का प्रतीक है, और इसकी तुलना शिव जी के त्रिशूल और त्रिपुंड से भी की जाती है।

दिल्ली: महाशिवरात्रि पर चांदनी चौक के गौरी शंकर मंदिर में भक्तों ने पूजा-अर्चना की
 

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी को शुभकामनाएं दीं। 
 

महाशिवरात्रि पर ज़रूर करें इस पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ 

 महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार शिवलिंग पर अर्पित करें ये चीज़ें : Offer these things on Shivling According to Zodiac Sign 
  • मेष राशि के जातकों को महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। 
  • वृषभ राशि के लोगों को शिवलिंग पर दूध मिश्रित जल चढ़ाना चाहिए और भगवान शिव को सफेद फूल अर्पित करने चाहिए। इससे महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 
  • मिथुन राशि के जातकों को शिवलिंग पर दूर्वा अर्पित करनी चाहिए, जिससे संतान से जुड़ी समस्याएं समाप्त होने लगती हैं। 
  • कर्क राशि के लोग महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर दूध और शहद से अभिषेक करें और महादेव को फूलों की माला अर्पित करें। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान हो सकता है। 
  • सिंह राशि के जातकों को महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर आंकड़े के फूल अर्पित करने चाहिए। मान्यता है कि इससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और साधक के सभी दुखों का समाधान होता है। 
  • कन्या राशि के लोग शिवलिंग पर दूर्वा चढ़ाएं, इससे लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना बनती है।
  • तुला राशि के जातकों को शिवलिंग पर चंदन, फूल, शक्कर और चावल अर्पित करना चाहिए, जो बहुत ही शुभ माना जाता है। 
  • वृश्चिक राशि के लोगों को शिवलिंग पर लाल चंदन और कनेर के फूल अर्पित करने की सलाह दी जाती है। इससे करियर में इच्छित परिणाम प्राप्त करने में मदद मिलती है। 
  • धनु राशि के जातकों को महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर 21 बेलपत्र अर्पित करने चाहिए। ऐसा करने से सभी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।
  • मकर राशि के जातक शिवलिंग पर सरसों या तिल का तेल चढ़ाएं। इसके साथ ही शमी के फूल भी अर्पित करें। इससे आपके जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होगा। 
  • कुंभ राशि के लोग महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर नीलकमल के फूल चढ़ाएं। ऐसा करने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 
  • मीन राशि के जातक महादेव को बेसन के लड्डू अर्पित करें। इससे आपके वैवाहिक जीवन में मिठास बनी रहती है।

महाराष्ट्र: महाशिवरात्रि 2025 के पावन अवसर पर भक्तों ने नासिक में गोदावरी नदी में पवित्र डुबकी लगाई
 

आज महाशिवरात्रि पर अंतिम स्नान के स्नान साथ होगा महाकुम्भ का समापन 

आज  26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर आखिरी स्नान के साथ होगा। महाकुंभ के अंतिम दिन महाशिवरात्रि के अवसर पर त्रिवेणी संगम या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह स्नान मोक्षदायी होता है और व्यक्ति के पापों का नाश कर पुण्य प्रदान करता है। इस दिन की स्नान विधि इस प्रकार है- 
  • स्नान करने से पहले गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का स्मरण करें। जल अर्पण करते हुए संकल्प लें कि यह स्नान आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जा रहा है।
  • स्नान के दौरान "ॐ नमः शिवाय" और "हर हर गंगे" मंत्र का जाप करें और तीन या सात बार डुबकी लगाएं। सूर्य को जल अर्पित करते हुए "ॐ घृणिः सूर्याय नमः" मंत्र बोलें।
  • स्नान के पश्चात जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान करें। शिवलिंग पर जल, दूध, बिल्वपत्र और धतूरा चढ़ाएं।
  • साथ ही आप रुद्राभिषेक कर सकते हैं या "महामृत्युंजय मंत्र" का जाप करें।

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महाशिवरात्रि 2025 जलाभिषेक - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक करने का शुभ मुहूर्त : Maha Shivratri 2025 Jalabhishek Shubh Muhurat 
महाशिवरात्रि के अवसर पर महादेव का जलाभिषेक अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का समय प्रातः 09:17 बजे से शुरू होगा, क्योंकि इससे पहले त्रयोदशी तिथि है। इसलिए, आप आज सुबह 09:17 बजे से लेकर पूरे दिन भगवान शिव को जलाभिषेक कर सकते हैं।
 

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए चढ़ाएं ये चीजें: Offer These Things to Please Lord Shiva
  • भस्म- इस दिन शिवलिंग पर भस्म अर्पित करें। भगवान शिव स्वयं भस्मधारी हैं, इसलिए भस्म चढ़ाने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन में धन, संपत्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • धतूरा- भगवान शिव को धतूरा बहुत प्रिय है। इस महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को धतूरा अर्पित करना न भूलें। इससे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • बेर- महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव को बेर का फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार के सदस्य बीमारियों से दूर रहते हैं।
  • बेलपत्र- महाशिवरात्रि के अवसर पर 11, 21 या 101 बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित करें। पहले सभी बेलपत्रों पर "ऊँ नम: शिवाय" लिखना न भूलें। ऐसा माना जाता है कि इस प्रक्रिया से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और आपकी सभी इच्छाएं पूरी करते हैं।

महाशिवरात्रि पर पढ़ें भोलेनाथ की ये आरती : Shiv Aarti
 

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महाशिवरात्रि पूजन विधि - फोटो : amar ujala
महाशिवरात्रि पूजा विधि : MahaShivratri Puja Vidhi
  • महाशिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और व्रत-संकल्प लें।
  • इसके बाद घर के मंदिर में विधि विधान शिव-पार्वती की पूजा करें।
  • शिव जी के मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • इसके बाद मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, चंदन इत्यादि चीजें चढ़ाएं।
  • इस दिन रात्रि की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
  • इसलिए रात में पूजा करने से पहले फिर से स्नान करें।
  • इसके बाद आप अपनी सुविधानुसार रात्रि के किसी भी प्रहर में या फिर चारों प्रहर में शिव जी की पूजा करें।
  • इस दौरान भोलेनाथ को दही, घी, दूध, शक्कर, शहद इत्यादि चीजों से स्नान कराएं। आप चाहें तो गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं।
  • पूजा के समय शिवरात्रि की व्रत कथा भी जरूर सुनें।
  • इसके अलावा शिव जी के मंत्रों और चालीसा का पाठ भी जरूर करें।
  • फिर परिवार सहित शिव भगवान की आरती करें।
  • भोग लगाएं और अपने व्रत का पारण करें।

क्यों की जाती है महादेव के शिवलिंग रूप की पूजा? 

वेदों के अनुसार, भगवान शिव ही एकमात्र देवता हैं जिनकी पूजा लिंग के रूप में की जाती है। उन्हें समस्त ब्रह्मांड का मूल कारण माना जाता है, इसलिए उनकी लिंग रूप में पूजा की जाती है। भगवान शिव को आदि और अंत का देवता कहा गया है। उनका न कोई रूप है और न कोई आकार; वे निराकार हैं। लिंग को भगवान शिव का निराकार रूप माना जाता है, जबकि उनका साकार रूप शंकर है। शिवलिंग को निराकार ब्रह्म का प्रतीक माना जाता है। वायु पुराण के अनुसार, प्रलय के समय हर महायुग के बाद समस्त संसार इसी शिवलिंग में समाहित हो जाता है, और फिर इसी शिवलिंग से सृष्टि का आरंभ होता है। वेदों में 'लिंग' शब्द सूक्ष्म शरीर के लिए प्रयोग किया गया है, जो 17 तत्वों से मिलकर बना होता है।

महाशिवरात्रि पर करें भगवान भोलेनाथ के प्रभावशाली मंत्रों का जाप: Mantra Jaap On Mahashivratri 

महाशिवरात्रि पर किस रंग के कपड़े पहनें: What Color To Wear On Mahashivratri

महाशिवरात्रि के विशेष अवसर पर हरे रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, आप लाल, पीला, गुलाबी, नारंगी और सफेद रंग के कपड़े भी पहन सकते हैं, क्योंकि ये सभी रंग भगवान शिव को प्रिय हैं। इस पावन दिन पर पारंपरिक परिधान पहनना उचित है। महिलाएं कुर्ती, सूट या साड़ी पहन सकती हैं, जबकि पुरुषों को कुर्ता-धोती आदि पहनकर मंदिर जाना चाहिए।

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Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर ज़रूर करें शिव रुद्राष्टकम पाठ
शिव रुद्राष्टकम पाठ
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्

निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोहम्

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ।
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्

कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी

न यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो

उत्तर प्रदेश: प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मेला आज, 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन संपन्न होगा।
 

उत्तराखंड: हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर पूजा-अर्चना करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
 

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महाशिवरात्रि पर भद्रा का समय - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर भद्रा का समय: Bhadra On Mahashivratri 
ज्योतिष गणना के अनुसार 26 फरवरी को प्रातः 11 बजकर 08 मिनट से रात्रि 10 बजकर 5 मिनट तक भद्रा का साया बना रहेगा। लेकिन महादेव कालों के काल महाकाल हैं, इसलिए भद्रा का उनकी उपासना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे में महाशिवरात्रि पर पूरे दिन भोलेनाथ की पूजा की जा सकती है। 

संतान प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि पर करें ये 3 उपाय

जो दम्पति संतान प्राप्ति में कठिनाई का सामना कर रहे हैं, उन्हें महाशिवरात्रि के दिन सच्चे मन से तीन प्रहर तक भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करनी चाहिए। इस दौरान शिवलिंग पर ताजे बांस की पत्तियाँ चढ़ाएं और संतान प्राप्ति की कामना को बार-बार व्यक्त करें। इस उपाय से आपको जल्द ही खुशखबरी मिल सकती है।

संतान प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर दूध, मिश्री और घी मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। पूरे दिन सच्चे मन से व्रत रखें और शाम को अपने हाथों से खीर बनाएं। चार प्रहर की पूजा के बाद शिव जी को खीर का भोग अर्पित करें और फिर उसी खीर से अपना व्रत खोलें। इस उपाय को करने से आपको शीघ्र शुभ समाचार मिल सकता है।

यदि किसी कारणवश आपको संतान नहीं हो रही है, तो महाशिवरात्रि के दिन सच्चे मन से व्रत रखें। भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करें और उन्हें वस्त्र, श्रृंगार का सामान, बेलपत्र, मिठाई, फल, फूल, गेहूं और धतूरा अर्पित करें। साथ ही शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें। इन अर्पणों से देवी-देवता आपसे प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामना को पूरा कर सकते हैं।

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शिवलिंग पर जलाभिषेक मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला
शिवलिंग पर जलाभिषेक मुहूर्त : Jalabhishek Muhurat on Shivlinga 
मध्यान्ह मुहूर्त सुबह 11 बजकर 06 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 बजे तक रहेगा। फिर संध्याकालीन मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 25 बजे से शाम 6 बजकर 08 बजे रहेगा। इसके साथ ही आखिरी जलाभिषेक का मुहूर्त यानी रात्रिकालीन मुहूर्त 8 बजकर 54 मिनट पर शुरू होकर रात 12 बजकर 01 बजे तक रहेगा।
 

महाशिवरात्रि पूजन सामग्री : Mahashivratri Pujan Samagri
महाशिवरात्रि की पूजा के लिए जरूरी साम्रगी पहले से एकत्रित कर लेनी चाहिए। जोकि इस प्रकार है- धूप, दीप, अक्षत, सफेद, घी, बेल, भांग, बेर, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, गंगा जल, कपूर, मलयागिरी, चंदन, पंच मिष्ठान, शिव व मां पार्वती के श्रृंगार की सामग्री,पंच मेवा, शक्कर, शहद, आम्र मंजरी, जौ की बालियां, वस्त्राभूषण, चंदन, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, दही, फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, तुलसी दल, मौली जनेऊ, पंच रस, इत्र, गंध रोली,

महाशिवरात्रि व्रत का महत्व :Maha Shivratri 2025 Vrat Significance
महाशिवरात्रि का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन महादेव की पूजा के साथ व्रत का पालन करता है, उसे जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, जो अविवाहित कन्याएं शिवरात्रि का व्रत और पूजन करती हैं, उन्हें शीघ्र विवाह के अवसर प्राप्त होते हैं और मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि पूजन से चन्द्र दोष से मिलती है मुक्ति 
महाशिवरात्रि के दिन चंद्रमा अपनी सबसे कमजोर अवस्था में होता है, इसलिए भगवान शिव ने उसे अपने सिर पर धारण किया। मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति भगवान शिव की पूजा करता है, उसकी कुंडली से चंद्र दोष समाप्त होता है और उसे मानसिक शांति मिलती है। इसके अतिरिक्त, यह भी माना जाता है कि इस दिन व्रत करने और भगवान शिव की उपासना करने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति करता है।

महाशिवरात्रि पर जरूर करें शिव तांडव स्तोत्र पाठ




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रुद्राभिषेक विधि - फोटो : amar ujala
महाशिवरात्रि पर इस विधि से करें रुद्राभिषेक
  • सबसे पहले घर के पूजा स्थान में एक स्वच्छ थाली में शिवलिंग स्थापित करें।
  • शिवलिंग के दाहिनी ओर घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • पुष्प, अगरबत्ती, घी, दही, शहद, ताजा दूध, पंचामृत, गुलाब जल, मिठाई, गंगाजल, कपूर, सुपारी, बेल पत्र, लौंग, इलायची ,सभी सामग्रियों को एक थाली में सजा लें।
  • ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करते हुए बेल पत्र चढ़ाएं।
  • दीपक और पुष्प अर्पित करें।
  • पहले शिवलिंग पर पंचामृत अर्पित करें।
  • इसके बाद चंदन, ताजे जल, फूल और कच्चा दूध चढ़ाएं।
  • अंत में गंगाजल या स्वच्छ जल से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग को हल्के हाथों से साफ करें।
  • शिवलिंग पर वस्त्र और जनेऊ अर्पित करें।
  • चंदन और भस्म का तिलक करें।
  • बेल पत्र, दूर्वा और पुष्प अर्पित करें।
  • "ॐ नमः शिवाय" के साथ-साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

महाशिवरात्रि व्रत में क्या खा सकते हैं?
जो भक्त फलाहार व्रत रखते हैं, वे निम्नलिखित चीजों का सेवन कर सकते हैं:
  • सिंघाड़े के आटे का हलवा
  • कुट्टू के आटे से बनी कचौड़ी या पूरी
  • सिंघाड़े के आटे की पकौड़ी
  • आलू दम (सेंधा नमक के साथ बना हुआ)
  • कुट्टू के चावल की खीर
  • फल एवं सूखे मेवे
  • मिठाई (बिना अनाज वाली जैसे मखाने की खीर, नारियल बर्फी आदि)
  • दूध एवं दूध से बने पदार्थ
  • ठंडाई (बादाम, सौंफ, गुलाब, काली मिर्च आदि मिश्रित पेय)

महाशिवरात्रि पर इन चीजों से करें परहेज
महाशिवरात्रि व्रत के दौरान और इस पवित्र दिन पर निम्नलिखित चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए-
मांसाहार और मदिरा – इस दिन किसी भी प्रकार के मांस, मछली या शराब का सेवन करना पूर्णतः निषिद्ध है।
तामसिक भोजन – प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये मानसिक एवं आध्यात्मिक शुद्धता में बाधा डालते हैं।
अन्न और अनाज – व्रत रखने वाले भक्तों को गेहूं, चावल और अन्य अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए।
विलासितापूर्ण आचरण – व्रतधारियों को संयमित रहना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

  • शास्त्रों में कहा गया है कि शिवलिंग पर चढ़ा जल दिव्य ऊर्जा से भरपूर होता है। जिन भवनों में वास्तुदोष हो वहां सुख-शांति के लिए शिवलिंग पर अभिषेक करने के उपरान्त जलहरी के जल को घर लाकर उससे 'ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवाय ' ये मंत्र जपते हुए पूरे भवन में छिड़काव करना चाहिए। ऐसा करने से वहां उपस्थित सभी नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं एवं घर का वातावरण शुद्ध एवं सकारात्मक बनता है, जिससे गृहस्थ जीवन में शांति बनी रहती है।
  • शिवलिंग पर चढ़ा जल लक्ष्मी प्राप्ति का साधन बन सकता है। मान्यता के अनुसार, यदि इस जल को नियमित रूप से घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थान और तिजोरी के पास छिड़का जाए, तो घर में धन की वृद्धि होती है और दरिद्रता समाप्त होती है। भगवान शिव की कृपा से गृहस्थ जीवन में स्थायित्व और आर्थिक उन्नति प्राप्त होती है।

महाशिवरात्रि के मौके पर पावन तस्वीरों में करें भोले भंडारी के दर्शन।

 



ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति और धार्मिक मान्यता
शिव पुराण के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। इस विवाद को समाप्त करने के लिए भगवान शिव ने एक अनंत प्रकाश स्तंभ (ज्योति) का रूप धारण किया। उन्होंने दोनों से कहा कि जो इस स्तंभ का अंत खोज लेगा, वही सबसे श्रेष्ठ माना जाएगा। भगवान विष्णु वराह (सूअर) का रूप धारण कर नीचे की ओर गए, जबकि ब्रह्मा जी हंस रूप धारण कर ऊपर की ओर उड़ चले। विष्णु जी ने हार मान ली, लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ कह दिया कि उन्होंने ज्योति का अंत देख लिया। इस झूठ से भगवान शिव क्रोधित हुए और ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि उनकी पूजा कभी नहीं होगी। वहीं, भगवान विष्णु की सच्चाई और विनम्रता से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनकी पूजा सदा की जाएगी। यही ज्योतिर्लिंग भगवान शिव का अनंत, असीम और अनश्वर स्वरूप है, जो ब्रह्मांड की अखंड शक्ति और आध्यात्मिक सत्य को दर्शाता है।ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और शिव कृपा प्राप्त होती है।

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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है। इसे "शिव का अनादि धाम" कहा जाता है और यह गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित है। यह मंदिर भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और इतिहास का अद्भुत संगम है।

क्या है महत्व
सोमनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। यह मंदिर शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव (चंद्रमा) को अपने ससुर दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की घोर तपस्या करनी पड़ी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उन्हें श्राप से मुक्त कर दिया और यहां "सोमनाथ" के रूप में स्वयं प्रकट हुए।

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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भारत के द्वितीय ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है और इसे "दक्षिण का कैलाश" भी कहा जाता है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है और भगवान शिव तथा देवी पार्वती का दिव्य निवास माना जाता है।

 मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का महत्व
यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां भगवान शिव (मल्लिकार्जुन) और माता पार्वती (भ्रमराम्बा) दोनों की पूजा होती है। यह शक्ति पीठ भी है, जिससे इसकी आध्यात्मिक शक्ति और बढ़ जाती है।पौराणिक कथा के अनुसार, जब कार्तिकेय और गणेश में विवाह को लेकर विवाद हुआ, तो भगवान शिव और माता पार्वती कार्तिकेय को मनाने के लिए श्रीशैलम पर्वत आए। इसी कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।

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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। यह मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है और कालों के काल (महाकाल) भगवान शिव को समर्पित है।

 महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयं प्रकट (स्वयंभू) ज्योतिर्लिंग है, जिसका उल्लेख कई ग्रंथों, विशेष रूप से शिवपुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। भगवान शिव यहां महाकाल (समय और मृत्यु के स्वामी) के रूप में पूजे जाते हैं, जो भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं और मोक्ष प्रदान करते हैं। महाकालेश्वर दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से विशिष्ट बनाता है। कहा जाता है कि इसका दर्शन मात्र से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : अमर उजाला
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच में स्थित ओंकार पर्वत पर स्थित है, जो "ॐ" के आकार में बना है और इसी कारण इसे "ओंकारेश्वर" कहा जाता है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच बने प्राकृतिक ॐ (ओंकार) आकार के द्वीप पर स्थित है, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से विशिष्ट बनाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि जो भी भक्त यहां श्रद्धा से पूजा करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि नर्मदा नदी शिवजी की पुत्री के रूप में पूजी जाती है और भगवान शिव इस स्थान पर हमेशा वास करते हैं।

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केदारनाथ धाम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है।केदारनाथ मंदिर हिमालय की गोद में मंदाकिनी नदी के किनारे बसा हुआ है और यह भगवान शिव के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व
मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की खोज की। शिवजी पांडवों से बचने के लिए केदारनाथ में एक बैल के रूप में छिप गए लेकिन जब भीम ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, तो उनका शरीर पांच भागों में विभाजित हो गया। केदारनाथ में भगवान शिव का पृष्ठभाग (पीठ) प्रकट हुआ, जबकि अन्य भाग तुंगनाथ (हाथ), रुद्रनाथ (मुख), मध्यमहेश्वर (नाभि), कल्पेश्वर (जटा) में स्थापित हुए। ये पांच मंदिर मिलकर "पंच केदार" कहलाते हैं।

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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित है। यह मंदिर सह्याद्री पर्वत श्रृंखला के घने जंगलों में स्थित है और भीमा नदी का उद्गम स्थल भी यही माना जाता है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है और इसे देखने के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग राक्षस भीम के अंत से जुड़ा हुआ है। राक्षस भीम भगवान शिव का परम भक्त था, लेकिन उसने देवताओं और ऋषियों को कष्ट पहुंचाना शुरू कर दिया। जब उसका आतंक बढ़ गया, तो भगवान शिव ने स्वयं प्रकट होकर उसका वध किया और उसके अनुरोध पर यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए। तभी से इस स्थान को भीमाशंकर कहा जाता है।

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काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग - फोटो : अमर उजाला
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे भगवान शिव के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। यह उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) शहर में स्थित है, जिसे मोक्ष की नगरी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहां शिव स्वयं निवास करते हैं और जो कोई भी यहां दर्शन करता है, उसे मोक्ष प्राप्त होता है।

 काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वाराणसी भगवान शिव की प्रिय नगरी है और वे स्वयं यहां वास करते हैं। कहा जाता है कि जब पूरी सृष्टि का अंत हो जाएगा, तब भी काशी का अस्तित्व बना रहेगा। मान्यता है कि काशी में मृत्यु को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को भगवान शिव स्वयं तारक मंत्र देकर मोक्ष प्रदान करते हैं।यही कारण है कि लाखों श्रद्धालु यहां अंतिम समय में आकर रहना चाहते हैं।

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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक - फोटो : Instagram
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है। यह मंदिर पवित्र गोदावरी नदी के उद्गम स्थल के पास स्थित है और इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है।

 त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में तीन मुख हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) का प्रतीक माने जाते हैं। यह ज्योतिर्लिंग एक गहरी गुफा में स्थित है और एक चांदी के मुकुट से ढका हुआ रहता है। यह मंदिर गोदावरी नदी के उद्गम स्थल कुशावर्त तीर्थ के पास स्थित है, जिसे दक्षिण गंगा कहा जाता है। मान्यता है कि इस नदी में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

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बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग, जिसे वैद्यनाथ धाम या देवघर भी कहा जाता है, भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह झारखंड के देवघर जिले में स्थित है और इसे मोक्ष प्राप्ति का द्वार माना जाता है। इस मंदिर का उल्लेख कई पुराणों में मिलता है और इसकी महिमा भक्तों के लिए अपार है।

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, लंका के राजा रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की और अपना सिर अर्पित किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें ज्योतिर्लिंग दिया और कहा कि इसे जहां रखेंगे, वहीं यह स्थापित हो जाएगा। रावण इसे लेकर लंका जा रहा था, लेकिन एक चाल के तहत इसे देवघर में रख दिया गया और यह यहीं स्थापित हो गया। मान्यता है कि बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन और जलाभिषेक करने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे रक्षक एवं संकटमोचन शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। यह गुजरात के द्वारका से 15 किमी दूर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है कि यह पूरी तरह स्वयंभू (स्वतः प्रकट) माना जाता है और इसकी पूजा करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के भय और रोगों से मुक्ति मिलती है।

 नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
कहा जाता है कि राक्षस दरुक ने अपनी शक्ति से एक नगरी बनाई और वहां लोगों को कैद कर रखा था। उन कैदियों में एक परम शिव भक्त सुहस्त नामक व्यक्ति भी था, जिसने अपनी श्रद्धा से भगवान शिव को प्रसन्न किया। शिवजी प्रकट होकर राक्षस दरुक का अंत किया और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना की।यह भय, जादू-टोने और सर्प दोष से मुक्ति देने वाला ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

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रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित है। इसे "दक्षिण का काशी" भी कहा जाता है। यह ज्योतिर्लिंग हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है क्योंकि यह भगवान राम से जुड़ा हुआ है।

 रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का महत्व
रामायण के अनुसार, जब भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ लंका जाने से पहले समुद्र किनारे पहुंचे, तो उन्होंने भगवान शिव की पूजा करने के लिए यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना की। उन्होंने हनुमान जी को कैलाश पर्वत से शिवलिंग लाने भेजा, लेकिन देरी के कारण माता सीता ने रेत से शिवलिंग बना दिया। इस शिवलिंग को "रामनाथस्वामी" कहा जाता है और यह रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजनीय है।

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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग - फोटो : instagram
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे श्रद्धा, भक्ति और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है, जो ऐतिहासिक एलोरा गुफाओं के पास है। यह 12वां और अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है और यहां दर्शन करने से सभी पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
इस ज्योतिर्लिंग का नाम घृष्णा नाम की एक भक्त महिला के नाम पर पड़ा। घृष्णा ने अपनी भक्ति से शिवजी को प्रसन्न किया और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने स्वयं यहां ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर भक्तों को आशीर्वाद देने का वचन दिया। यह स्थान सच्चे प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

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Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
शिव पूजा का निशिता मुहूर्त
  • शिव पूजा का निशिता काल मुहूर्त: 26 फरवरी 2025, मध्यरात्रि 12:09 बजे से 12:59 बजे तक 
  •  निशिता काल पूजा की कुल अवधि:  कुल 50 मिनट 

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Mahashivratri 2025 - फोटो : अमर उजाला
चार प्रहर की पूजा का समय
  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:29 से रात 09 बजकर 34 मिनट तक
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - रात 09:34 से 27 फरवरी सुबह 12 बजकर 39 मिनट तक
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को रात 12:39 से सुबह 03 बजकर 45 मिनट तक
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को सुबह 03:45 से 06 बजकर 50 मिनट तक

चार प्रहर की पूजा में मंत्र जाप 
  • प्रथम प्रहर का मंत्र- 'ह्रीं ईशानाय नमः'
  • दूसरे प्रहर मंत्र- 'ह्रीं अघोराय नम:'
  • तीसरे प्रहर मंत्र- 'ह्रीं वामदेवाय नमः'
  • चौथे प्रहर मंत्र- 'ह्रीं सद्योजाताय नमः

महाशिवरात्रि व्रत पारण समय
ज्योतिषियों की मानें तो महाशिवरात्रि पर व्रत पारण का समय 27 फरवरी को प्रातः 06 बजकर 48 मिनट से 08:54 मिनट तक है।

महाशिवरात्रि पर ग्रहों का दुर्लभ संयोग
26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के दिन काफी दुर्लभ योग बन रहा है। बता दें इस दिन शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे, जिससे मालव्य राजयोग बनेगा। वहीं मीन राशि में शुक्र की राहु के साथ भी युति हो रही है। इतना ही नहीं कुंभ राशि में सूर्य-शनि की भी युति होगी। ऐसा माना जा रहा है कि कुंभ राशि में बुध भी विराजमान है, जिससे तीनों ग्रहों की युति से त्रिग्रही योग के साथ-साथ सूर्य-बुध से बुधादित्य योग भी बनेगा।
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महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
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