फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahashivratri 2025: देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व

Wed, 26 Feb 2025 02:33 PM IST
मेघा कुमारी पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य

सार

‘शिव की महान रात्रि’, महाशिवरात्रि का त्यौहार भारत के आध्यात्मिक उत्सवों की सूची में सबसे महत्वपूर्ण है। सत्य ही शिव हैं और शिव ही सुंदर है। तभी तो भगवान आशुतोष को सत्यम शिवम सुंदरम कहा जाता है।
विज्ञापन
1 of 9
महाशिवरात्रि का पावन पर्व 26 फरवरी 2025 बुधवार के दिन मनाया जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह पर्व हर साल फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। - फोटो : अमर उजाला
‘शिव की महान रात्रि’, महाशिवरात्रि का त्यौहार भारत के आध्यात्मिक उत्सवों की सूची में सबसे महत्वपूर्ण है। सत्य ही शिव हैं और शिव ही सुंदर है। तभी तो भगवान आशुतोष को सत्यम शिवम सुंदरम कहा जाता है। भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने का ही महापर्व है...महाशिवरात्रि... कानपुर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी बता रहे हैं कि यह रात इतनी महत्वपूर्ण क्यों है और हम इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं।............

महाशिवरात्रि का पावन पर्व 26 फरवरी 2025 बुधवार के दिन मनाया जा रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह पर्व हर साल फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पावन पर्व भगवान शिवजी को समर्पित है। इस दिन भगवान शिव के भक्त उनकी कृपा पाने के लिए उनकी विधि-विधान के साथ पूजा आराधना करते हैं। इस दिन रात्रि पूजन भी किया जाता है, लेकिन इससे महत्वपूर्ण चार पहर की पूजा होती है। मान्यता है कि चार पहर की पूजा करने से व्यक्ति जीवन के पापों से मुक्त हो जाता है। तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की पूजा संध्या काल से शुरू होकर अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त तक की जाती है। सामान्य गृहस्थ को महाशिवरात्रि के दिन शुभ और मनोकामना पूर्ति के लिए सुबह और संध्या काल में शिव की आराधना करनी चाहिए।
विज्ञापन

2 of 9
महाशिवरात्रि का महापर्व स्वयं परमात्मा के सृष्टि पर अवतरित होने की याद दिलाता है। इस व्रत के विधान में सवेरे स्नानादि से निवृत्त होकर उपवास रखा जाता है। - फोटो : freepik
महाशिवरात्रि का महत्व
महाशिवरात्रि का महापर्व स्वयं परमात्मा के सृष्टि पर अवतरित होने की याद दिलाता है। इस व्रत के विधान में सवेरे स्नानादि से निवृत्त होकर उपवास रखा जाता है। महाशिवरात्रि के उपवास के भी कुछ नियम हैं। कुछ श्रद्धालु निर्जला उपवास रखते हैं, तो कुछ फलाहार करते हैं। वैसे उपवास में फल और जल का मिश्रण होना चाहिए, यानी यदि आपको प्यास लग रही है तो आपको जल का सेवन करना चाहिए और यदि आपको भूख है तो आपको फल का सेवन करना चाहिए। महाशिवरात्रि पर ध्यान और उपवास एक साथ करने से हमारी इच्छाएं फलित होने लगती हैं।

ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति महाशिवरात्रि व्रत का पालन पूरी निष्ठा से करता है, भगवान शिव की कृपा उस पर बरसती है और उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। शिवरात्रि पर सच्चा उपवास यही है कि हम परमात्मा शिव से बुद्धि योग लगाकर उनके समीप रहे। उपवास का अर्थ ही है समीप रहना। जागरण का सच्चा अर्थ भी काम, क्रोध आदि पांच विकारों के वशीभूत होकर अज्ञान रूपी कुंभकरण की निद्रा में सो जाने से स्वयं को सदा बचाए रखना है।
 
विज्ञापन

3 of 9
भगवान शिव का व्यक्तित्व एवं स्वरूप समग्रता का प्रतीक है यह उनके जीवन का वह दर्शन प्रदान करता है, जो मनुष्य को उसके व्यक्तित्व के उच्चतम शिखर तक ले जाता है - फोटो : freepik
भगवान शिव का व्यक्तित्व एवं स्वरूप समग्रता का प्रतीक है यह उनके जीवन का वह दर्शन प्रदान करता है, जो मनुष्य को उसके व्यक्तित्व के उच्चतम शिखर तक ले जाता है | भगवान शिव का यह चरित्र मानवीय जीवन के उच्चतम आदर्शों की पराकाष्ठा है। महादेव गृहस्थ भी हैं और वीतरागी आदियोगी भी, उनका यह गुण संदेश देता है कि योग के मार्ग पर चलने के लिए ,ईश्वर की भक्ति के लिए संसार त्याग आवश्यक नहीं है। त्याग तो स्वयं की दुष्प्रवृत्तियों का, आसत्ति व अहंकार का करना चाहिए, ताकि अंतःकरण को योग के अनुकूल बनाया जा सके ।

कैलाशवासी भगवान शिव एक ओर तो परम पवित्र हिमालय में तपस्या में लीन रहते हैं तो दूसरी ओर भूतगणों के साथ श्मशान में निवास करते भी माने जाते हैं। इसका व्यावहारिक आशय यह है कि पवित्र और श्रेष्ठ के संपर्क में रहना श्रेयकर है, किंतु घृणित और पापी किसी को नहीं समझा जाना चाहिए। सब परमात्मा की ही संतान हैं एवं वे स्वयं सबको बराबर स्नेह करते हैं। शिव यहां सम्यक दृष्टि व मैत्री की शिक्षा देते हैं। इनके अतिरिक्त अनेकानेक विरोधाभासों का अति सुंदर समन्वय भगवान शिव के जीवन में देखने को मिलता है एक ओर वे परम कल्याणकारी, भोले, भंडारी हैं तो दूसरी ओर तांडव करने वाले महारुद्र भी, उन्हीं की भांति मनुष्य को भी श्रेष्ठ का संरक्षक व अनिति का संहारक होना चाहिए । 

शुभ व सत्य के प्रति संवेदनशील व अशुभ के प्रति कठोर होना चाहिए पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिवजी पहली बार प्रकट हुए थे। शिव का प्राकट्य ज्योतिर्लिंग यानी अग्नि के शिवलिंग के रूप में था। ऐसा शिवलिंग जिसका ना तो आदि था और न अंत। बताया जाता है कि शिवलिंग का पता लगाने के लिए ब्रह्माजी हंस के रूप में शिवलिंग के सबसे ऊपरी भाग को देखने की कोशिश कर रहे थे लेकिन वह सफल नहीं हो पाए। वह शिवलिंग के सबसे ऊपरी भाग तक पहुंच ही नहीं पाए। दूसरी ओर भगवान विष्णु भी वराह का रूप लेकर शिवलिंग के आधार ढूंढ रहे थे लेकिन उन्हें भी आधार नहीं मिला।

4 of 9
महाशिवरात्रि को पूरी रात शिवभक्त अपने आराध्य जागरण करते हैं। शिवभक्त इस दिन शिवजी की शादी का उत्सव मनाते हैं। - फोटो : freepik
शिव और शक्ति का हुआ था मिलन
महाशिवरात्रि को पूरी रात शिवभक्त अपने आराध्य जागरण करते हैं। शिवभक्त इस दिन शिवजी की शादी का उत्सव मनाते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि को शिवजी के साथ शक्ति की शादी हुई थी। इसी दिन शिवजी ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। शिव जो वैरागी थी, वह गृहस्थ बन गए। माना जाता है कि शिवरात्रि के 15 दिन पश्चात होली का त्योहार मनाने के पीछे एक कारण यह भी है। इसलिए महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों एवं भगवान शिव के उपासकों का एक मुख्य त्योहार है।

ऐसा भी माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने, व्रत रखने और रात्रि जागरण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं एवं उपासक के हृदय को पवित्र करते हैं। मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान शिव की सेवा में दान-पुण्य करने व शिव उपासना से उपासक को मोक्ष मिलता है। 
विज्ञापन

5 of 9
भगवान शिव को कई नामों से पुकारा और पूजा जाता है। भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है। भोलेनाथ यानी जल्दी प्रसन्न होने वाले देव। - फोटो : freepik
महाशिवरात्रि व्रत का क्या है महत्व ?
शिवरात्रि के पर्व पर जागरण का विशेष महत्व है। पौराणिक कथा है कि एक बार पार्वती जी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, 'ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं?'  उत्तर में शिवजी ने पार्वती को 'महाशिवरात्रि' के व्रत का उपाय बताया |चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं।

अत: ज्योतिष शास्त्रों में इसे परम शुभ फलदायी कहा गया है। वैसे तो शिवरात्रि हर महीने में आती है। परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य देव भी इस समय तक उत्तरायण में आ चुके होते हैं तथा ऋतु परिवर्तन का यह समय अत्यंत शुभ कहा गया है।
 
भगवान शिव को कई नामों से पुकारा और पूजा जाता है। भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है। भोलेनाथ यानी जल्दी प्रसन्न होने वाले देव। भगवान शंकर की आराधना और उनको प्रसन्न करने के लिए विशेष सामग्री की जरूरत नहीं होती है। भगवान शिव जल, पत्तियां और तरह -तरह के कंद मूल को अर्पित करने से ही जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। शिव का अर्थ है कल्याण शिव सबका कल्याण करने वाले हैं। अत: महाशिवरात्रि पर सरल उपाय करने से ही इच्छित सुख की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि के महापर्व पर भगवान शिव की उपासना करने से समस्त कामनाओं की पूर्ति होती है।

भगवान शिव स्वरूप से विषम जैसे आभासित होने पर भी परम शांत, एक रूप और कृपा सागर कहलाए। अनिष्टकारक दुर्योगों में शिव की सहस्त्रनामावली, रूद्वाष्टाध्यायी, दारिद्रयदहन स्त्रोत का पाठ, महामृत्युंजय मंत्र, षडाक्षर एवं पंचाक्षर का श्रद्वा व विश्वास के साथ पाठ करने  से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। गृह जन्य की बाधा दूर हो जाती है और सभी दिव्य सुख मिलते हैं। सौभाग्य प्रदान करने वाले शिव काल के भी काल हैं और महाकाल नियन्ता है भगवान शिव परम कल्याणकारी हैं और श्रद्धा भाव से जो भी उनके दरबार में आया उसको अपना लेते हैं।

भगवान शिव को जल की धारा के साथ ही मन की धारा भी अर्पित करने से समस्त कामनाओं की पूर्ति होती है। शिव की पूजा में सबसे श्रेष्ठ पार्थिव पूजा है इस पूजा से रोग, शोक, पाप और दुखों का नाश होता है। श्रद्धा और समर्पण भाव से शिव की उपासना करने से शिवत्व तो जागृत होता ही है शिव तत्व की प्राप्ति भी होती है 
विज्ञापन

6 of 9
देवों के देव महादेव की महिमा अपरंपार है। वे प्रकृति प्रेमी हैं, यह उनके रूप, जीवन और रहन-सहन से भी स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर मनोकामना पूर्ति के लिए ऐसे करें भगवान शिव का पूजन
देवों के देव महादेव की महिमा अपरंपार है। वे प्रकृति प्रेमी हैं, यह उनके रूप, जीवन और रहन-सहन से भी स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। उन्होंने आदिशक्ति का वरण किया है। वे अर्द्धनारीश्वर हैं। अर्थात उनमें प्रकृति और पुरुष दोनों का रूप सम्मिलित है। वे आम लोगों के ईश्वर हैं। वे सहज और सरल है। अत: उनकी पूजा तथा प्रसन्नता के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं है। इसलिए उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि महाशिवरात्रि के दिन मनुष्य को अपनी मनोकामना के अनुसार शिव की पूजा करनी चाहिए। अपनी पूजा से शिव को यह बताएं कि आप शिव से क्या चाहते हैं।
 
  • जो व्यक्ति काफी समय से वाहन खरीदने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही है। तो महाशिवरात्रि के दिन दही से भगवान शिव का अभिषेक करें। 
  • आर्थिक समस्याओं के कारण जो लोग परेशान और चिंतित रहते हैं उनके लिए महाशिवरात्रि पर शिव जी की पूजा का खास विधान है। ऐसे लोगों को शहद और घी से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। प्रसाद के तौर पर भोलेनाथ को गन्ना अर्पित करें।
विज्ञापन

7 of 9
जो व्यक्ति अक्सर बीमार रहते हैं या जिनके स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहता है उन्हे महाशिवरात्रि के मौके का लाभ उठाना चाहिए। - फोटो : adobe stock
  • जो व्यक्ति अक्सर बीमार रहते हैं या जिनके स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहता है उन्हे महाशिवरात्रि के मौके का लाभ उठाना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि भोलेनाथ कालों के भी काल हैं जिनके सामने यम भी हाथ जोड़े खड़े रहते हैं। इसलिए महाशिवरात्रि के दिन बेहतर स्वास्थ्य की इच्छा रखने वालों को जल में दूर्वा मिलाकर शिवजी को अर्पित करना चाहिए। जितना अधिक संभव हो महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
  • विवाह के लिए सर्वोत्तम मंत्र है " ॐ पार्वतीपतये नमः"। इस मंत्र के जाप से भगवान भोलेनाथ के साथ ही माता पार्वती का आर्शिवाद भी मिलता है और विवाह में आ रही समस्याएं दूर हो जाती हैं।
  • जो दंपत्ति योग्य संतान की अभिलाषा रखते हैं उन्हें महाशिवरात्रि के दिन दूध से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। शिव के साथ ही मां पार्वती और गणेश एवं कार्तिक की पूजा भी संतान सुख के योग मजबूत बनाता है।
     

8 of 9
महाशिवरात्रि में शिवलिंग की पूजा करने से जन्म कुंडली के नवग्रह दोष तो शांत होते हैं - फोटो : adobe stock
  • महाशिवरात्रि में शिवलिंग की पूजा करने से जन्म कुंडली के नवग्रह दोष तो शांत होते हैं विशेष करके चंद्र जनित दोष जैसे मानसिक अशान्ति, मां के सुख और स्वास्थ्य में कमी, मित्रों से संबंध, मकान-वाहन के सुख में विलम्ब, हृदय रोग, नेत्र विकार, चर्म-कुष्ट रोग, नजला-जुकाम, स्वांस रोग, कफ-निमोनिया संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है और समाज में मान प्रतिष्ठा बढ़ती है। सुहागिन महिलाओं को इस दिन माँ पार्वती को श्रृंगार हेतु मेहंदी चढानी चाहिए और पुरुषों को पंचामृत, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराकर बेलपत्र पर अष्टगंध, कुमकुम, अथवा चन्दन से राम-राम लिखकर ॐ नमःशिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवाय' कहते हुए शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए साथ ही भांग, धतूर और मंदार पुष्प तथा गंगाजल भी अर्पित हुए काल हरो हर, कष्ट हरो हर, दुःख हरो,दारिद्र्य हरो, नमामि शंकर भजामि शंकर शंकर शंभो तव शरणं। मंत्र से प्रार्थना करनी चाहिए।
     
विज्ञापन

9 of 9
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से व्यापार में उन्नति और सामाजिक प्रतिष्ठा बढती है। - फोटो : adobe stock
  • शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से व्यापार में उन्नति और सामाजिक प्रतिष्ठा बढती है। 
  • भांग अर्पण से घर की अशांति, प्रेत बाधा तथा चिंता दूर होती है। 
  • मंदार पुष्प से नेत्र और ह्रदय विकार दूर रहते हैं। शिवलिंग पर धतूर के पुष्प-फल चढ़ाने से दवाओं के रिएक्शन तथा विषैले जीवों से खतरा समाप्त हो जाता है। 
  • शमीपत्र चढ़ाने से शनि की शाढ़ेसाती, मारकेश तथा अशुभ ग्रह-गोचर से हानि नहीं होती। इसलिए श्रीमहाशिवरात्रि के एक-एक क्षण का सदुपयोग करें और शिवकृपा प्रसाद से त्रिबिध तापों से मुक्ति पायें।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें