प्रकृति ने पृथ्वी पर दसियों लाख किस्म के जीव-जंतु रचे, बहुतों के बारे में तो हम जानते भी नहीं हैं, लेकिन मानवीय गतिविधियों ने इन्हें भीषण नुकसान पहुंचाया है। इसकी वजह से ये न केवल लुप्त हो रही हैं, बल्कि लुप्त होने की रफ्तार भी तेजी से बढ़ी है। विश्व वन्यजीव संगठन के अनुसार, अगर मान लें कि पृथ्वी पर 10 करोड़ प्रकार के जीव जंतु हैं और हर वर्ष 0.01 प्रतिशत लुप्त हो रहे हैं, तब भी हम हर साल 1 हजार जीवों को हमेशा के लिए खो बैठते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हर वर्ष हम 200 से दो हजार जीव-जंतुओं का अस्तित्व पृथ्वी से मिटाते जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि पृथ्वी से पहले भी बड़ी संख्या में जीव खत्म नहीं हुए। अब तक पांच दफा पृथ्वी से जीवन खत्म हुआ है, विशेष परिस्थितियों में 60 से 90 प्रतिशत तक जीवन खत्म हुआ है, लेकिन वह प्राकृतिक वजहों से था।