बैक पेन हो या टांग का दर्द, न तो चीरा लगाने की जरूरत पड़ेगी और न ही फीजियोथैरेपिस्ट के पास जाने की । बस, एक इंजेक्शन से ही डिस्क का दर्द दूर हो जाएगा। आपका यह छोटा सा ऑपरेशन लोकल एनेस्थीसिया देने से हो जाएगा। यह तकनीक पीजीआई की डिपार्टमेंट ऑफ एनेस्थीसिया की पेन क्लीनिक कंसल्टेंट डॉ. बबिता घई ने विकसित की है।
डॉ. बबीता घई ने बताया कि आजकल डिस्क पेन की समस्या आम हो गई है। डिस्क के अपने स्थान से हटने या बाहर निकलने में नस दबने के कारण ऐसा होता है। आमतौर पर इस मामले में फीजियोथैरेपी की जाती है। इसमें स्टेरॉयड का इंजेक्शन और दवा दी जाती थी। लेकिन मरीजों को इस इलाज से पूरा आराम नहीं मिल पाता था।
इंजेक्शन से होगा इलाज
परक्यूटीनियस हाईड्रो डिस्कटेक्टमी नाम के इस नए प्रोसीजर में एक इंजेक्शन के जरिए इलाज होता है। नई सूई के जरिए डिस्क तक पहुंचने के बाद इसमें हाइड्रो डिस्टेक्टमी इंस्ट्रूमेंट डाला जाता है, जिसके माध्यम से डिस्क को बाहर निकालते हैं।
इस ऑपरेशन में उपयोग की जाने वाली सुई का ब्यास आधा सेंटीमीटर होता है। जैसे ही डिस्क बाहर निकलती है, नसों पर पड़ने वाला दबाव खत्म हो जाता है। डिस्क के बाहर निकलने वाले भाग को सक कर लिया जाता है। इसे सक करने के लिए एक मशीन के जरिए हाई स्पीड से सेलाइन डालते हैं जो एक तेज धार ब्लेड का काम करता है। यह सेलाइन अंदर वैक्यूम बनाता है और सकिंग कर देता है।
इसमें पेशेंट को एडमिट होने की जरूरत नहीं होती। इस ऑपरेशन में 20 से 30 मिनट लगते हैं और तीन घंटे बाद मरीज को छुट्टी दे दी जाती है और कोई चीरा या टांके नहीं लगाए जाते। एक बैंडेज मरीज के उस भाग में लगाया जाता है जहां से सुई को प्रवेश करवाया जाता है।
लंदन में सीखा यह उपचार
डॉ. बबीता घई ने कहा कि वह पिछले वर्ष लंदन में कॉमनवेल्थ फैलोशिप करने के लिए गईं थीं। वहीं ऑपरेशन का यह तरीका सीखा। इस इक्युपमेंट की कीमत 50 हजार रुपए है।
डॉ. घई ने बताया कि उनके पास नौ महीने पहले एक मरीज आया था। वह बैक पेन के कारण लंबी छुट्टी पर चल रहा था। उसे इसी तकनीक से ठीक किया गया और अब वह नियमित रूप से नौकरी कर रहा है। इसी तरह एक सप्ताह पहले एक युवती का ऑपरेशन किया गया।