एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम की बढ़ रही है समस्या
- फोटो : Pixabay
डिप्रेशन से सुसाइडल टेंडेंसी तक
भारत में पिछले कुछ सालों में अपने शहर से दूसरे शहरों या विदेशों की ओर पलायन कर रहे युवाओं की संख्या में तेजी आई है। इसके चलते बुजुर्गों में एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम के केस भी बढ़े हैं। जिसके कारण उनमें डिप्रेशन, आइडेंटिटी क्राइसिस, अल्कोहलिज्म और एंग्जायटी जैसी समस्याओं का प्रतिशत बढ़ जाता है और यदि समय पर इसका इलाज न हो पाए तो यह गंभीर शारीरिक-मानसिक समस्या बन सकती है। इतना ही नहीं बुजुर्ग सेल्फ हार्म या सुसाइडल टेंडेंसी भी डेवलप कर सकते हैं। उन्हें अपना जीवन निरर्थक लगने लगता है। विशेषज्ञ इसके लिए सही प्रबंधन और काउंसिलिंग की सलाह देते हैं। इससे स्थिति को संभाला जा सकता है।
शरीर पर भी पड़ता है असर
इस स्थिति से केवल मन और दिमाग ही नहीं शरीर भी तकलीफ में आ सकता है। बच्चों का घर से जाना पैरेंट्स के लिए डिप्रेशन जैसी स्थिति ला देता है। खाली घर में व्यक्ति खुद को उपेक्षित महसूस करने लगता है। धीरे-धीरे मानसिक अकेलेपन की यह स्थिति साइकोसोमैटिक समस्याओं के रूप में भी सामने आने लगती है। साइकोसोमैटिक इन समस्याओं में घबराहट, कमजोरी, बैचेनी, सीने में दर्द, हाथ पैरों में दर्द, पेट की तकलीफें, अनिद्रा या अकेले में रोना आदि शामिल है। इन समस्याओं के लिए फिजिशियन के साथ साथ मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग की भी जरूरत होती है।
बुजुर्गों के सेहत का रखें ख्याल
- फोटो : Pixabay
इन बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक
बुजुर्गों में अकेलेपन की समस्या मौजूदा समय में काफी बढ़ गई है। इस तरह की परेशानियों से बचे रहने के लिए इन बातों को जरूर ध्यान में रखें।
- खाली दिमाग शैतान का घर। इसलिए खुद को किसी भी क्रिएटिव एक्टिविटी से जोड़ें। परिचितों, मित्रों, रिश्तेदारों और पास-पड़ोस के लोगों से घुलें- मिलें। यह याद रखें कि अब तक का आपका जीवन भी नौकरी या व्यवसाय में बीता है। अब आपके पास खुद की खुशी से बिताने के लिए समय है। इसका सदुपयोग करें।
- अपने मन में एक बात को स्पष्ट रखें। बच्चे अपनी प्रगति के लिए आगे बढ़े हैं। उनका करियर भी मायने रखता है, इसलिए उन्हें जानें दें लेकिन उनसे हमेशा की शिकायत न पालें। अपने अनुभव और ज्ञान को लोगों से बांटने की कोशिश करें। आजकल ऐसे कई ग्रुप चलन में हैं जिनसे जुड़कर आप अपनी सामर्थ्य के हिसाब से जरूरतमंदों की मदद कर सकते हैं। ऐसे किसी ग्रुप से जुड़ें।
- अपनी सभी दवाइयां समय पर लें। यदि आप काउंसिलिंग करवा रहे हैं तो सेशंस बीच में न छोड़ें। आप स्वस्थ रहेंगे तो आपके बच्चे भी निश्चिन्त होकर तरक्की कर पाएंगे और अपना परिवार सम्भाल पाएंगे। इसलिए अपनी फिटनेस पर भी ध्यान दें ताकि समय-समय पर आप अपने बच्चों से मिलने और घूमने-फिरने भी आसानी से जा सकें।
- अपने मन की बात बच्चों से शेयर जरूर करें। उन्हें यह बताएं कि आप उन्हें कितना मिस कर रहे हैं। यह उन्हें आपके साथ अधिक समय बिताने को प्रेरित करेगा। भले ही वे ऑनलाइन आकर आपसे बात कर पाएं, लेकिन करेंगे। व्हाट्सएप, मेल, आदि के जरिये सम्पर्क में बने रहें।
---------------------------
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।