दुनिया कोरोना से जूझ रही है। वहीं दूसरी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। लैंसेट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में बीते 30 वर्षों में हाईपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) के युवा मरीजों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है।
इंपीरियल कॉलेज लंदन के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों की टीम ने ये दावा दुनिया के 184 देशों के दस करोड़ लोगों का ब्लड प्रेशर मापने के बाद किया है। शोध के अनुसार वैज्ञानिकों ने इस क्रम में 30 से 79 वर्ष के लोगों के बीपी का आकलन किया है।
कम आय वाले देशों में हालात अधिका खराब
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वर्ष 1990 में हाईपरटेंशन से ग्रसित महिलाओं की संख्या 33.1 करोड़ थी जबकि पुरूषों की संख्या 33.7 करोड़ थी। अनुमान है कि ये संख्या वर्ष 2019 में बढ़कर 62.6 और 65.2 करोड़ हो गई होगी। बता दें कि दुनिया में हर साल कई लाख लोग इस बीमारी के चलते मारे जाते हैं।
वैज्ञानिकों का दावा है कि हाईपरटेंशन का इलाज सस्ती दवाओं से संभव है। हैरानी रही कि वर्ष 2019 में दुनियाभर में हाईपरटेंशन से ग्रसित आधे लोगों को अपनी बीमारी के बारे में पता ही नहीं था। इस कारण उनका इलाज ही नहीं हो पाया।
प्रगति के साथ रोग का प्रबंधन धीमा
शोधकर्ता प्रो. माजिद इजाती ने कहा, दुनिया में प्रगति के साथ उच्च रक्तचाप की तकलीफ का प्रबंधन धीमा हो रहा है।
हाई बीपी 85 लाख मौतों का कारक
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि उच्च रक्तचाप का सीधा संबंध दुनियाभर में हर साल होने वाली 85 लाख मौतों से है। इस रोग के कारण स्ट्रोक, हृदय संबंधी तकलीफ और किडनी का फेल होते हैं। लोग इस रोग की गंभीरता को नहीं समझते हैं। इसी कारण अचानक मौत के मामले सामने आते हैं।
महिलाओं में ऐसी तकलीफ कम
वैज्ञानिकों के अनुसार संपन्न देशों में उच्च रक्तचाप के मरीजों की संख्या घट रही है। कनाडा और पूरे में वर्ष 2019 में सिर्फ 4 में से एक शख्स में यह परेशानी रही। ताइवान, जापान, स्पेन व ब्रिटेन में भी तकलीफ घटी है।