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विश्व रंग साहित्य-संस्कृति का मेला: आज फिल्में पिट रही हैं, लेकिन रील्स चल रही हैं- अशनीर ग्रोवर

काव्य डेस्क

Halchal
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                            हर कोई विश्व रंग को साहित्य-संस्कृति का मेला ही कह रहा था, मिल लिए तो मिल लिए, नहीं मिल पाए तो दूर से राम-राम। एक-दूसरे से टकराते लोग, किसी तीसरे-चौथे के बारे में बताते कि अरे उससे मिले या नहीं, अरे फलाँ को देखा या नहीं, अरे अलाँ तुम्हें याद कर रहा था। लोग फ़ोन और सोशल मीडिया से पूछते कि तुम कहाँ हो, हम यहाँ हैं लेकिन तब भी सबसे मुलाक़ात हो पाना संभव नहीं था क्योंकि साहित्य की गंगा का प्रवाह इतना तेज़ था कि बहने वाले बड़े आनंद से उसमें गोते लगाए बहते चले जा रहे थे। निमंत्रण पत्रिका में कई दिग्गजों की शिरकत दिख रही थी और उससे भी कई बड़े, जाने-पहचाने चेहरे वहाँ आए थे। कुछ ग्लैमरस लिए थे, कुछ चिंतन और कुछ मनन...
        
                                                    
                            

रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा वैश्विक स्तर पर आयोजित किए जा रहे टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्वरंग 2022 के अंतिम दिन को यादगार बनाने की कोई कसर आयोजकों ने नहीं छोड़ी और आयोजन में शामिल लोगों ने भी उसके हर पल को यादगार बना लिया। 

समापन दिवस का शुभारंभ अंबरीश कालेले के मोहन वीणा पर मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद ‘व्यापार के बदलते रूप और मातृ भाषा का प्रभाव’ पर अशनीर ग्रोवर से सिद्धार्थ चतुर्वेदी की गहन चर्चा हुई। भारत पे के फ़ाउंडर और शार्क टैंक इंडिया के सेलिब्रिटी “शार्क” अशनीर ग्रोवर का कहना था जो बात 20 मिनट अंग्रेजी बोलकर समझाते हैं उसे हिंदी में 2 मिनट में समझाया जा सकता है। मुझे लगता है टाइम खराब मत करो। आज इंडिया का टाइम आया है। आज जितनी अपॉर्च्युनिटी हैं स्टार्टअप की, वो 20 साल बाद देश के विकसित होने के बाद उतनी नहीं रहेंगी। इसलिए मैंने हिंदी को ही लाइफ में अडॉप्ट कर लिया। मैंने एमएनसी में भी जॉब की है, इसलिए अंग्रेजी में बातें ड्रामा ज्यादा लगती हैं।  “शार्क टैंक इंडिया” शो कितना स्क्रिप्टेड होता है, इस सवाल के जवाब में अशनीर कहते हैं कि सीज़न 1 तो स्क्रिप्टेड नहीं था। मैंने इसमें बिल्कुल असली पैसों से स्टार्टअप में इंवेस्ट किया है। और वैसा भी जहाँ पैसा रियल होता है, वहाँ सब रियल होता है। जहाँ पैसा झूठा होता है वहाँ सब झूठा होता है। हाँ यह ज़रूर लगता है कि शो में शायद मसाला लाने के लिए कुछ ड्रामा पिच वाले स्टार्टअप को भी रखा गया था जैसे गोल नाभी, सिप लाइन। 

इसके अलावा उन्होंने मीम कंटेंट पर बात करते हुए कहा कि यह अच्छा कल्चर है। आज फिल्में पिट रही हैं, लेकिन रील्स चल रही हैं। लोगों के पास देड़ मिनट से ज्यादा टाइम नहीं है। मुझे भी समझ आ गया कि कंटेंट चेंज हो गया है – मैसेज भेजना है तो रील्स बनाओ। 

~स्वरांगी साने
3 वर्ष पहले
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