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काव्य कैफ़े : देशप्रेम से ओत-प्रोत रहा संपूर्ण स्वदेशी थीम पर आधारित काव्यात्मक कार्यक्रम

काव्य डेस्क

Halchal
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भारत के वो रखवाले थे, वो सत्य-अहिंसा वाले थे


गोरों को मार भगाया था, स्वदेशी को अपनाया था
भारत मां का ध्वज लेकर हर कोने में लहराया था
ऐसे गांधी को है प्रणाम...

बनारस के सूरज मणि ने यह कविता पढ़ी तो हर किसी का मन महात्मा गांधी यानी बापू के प्रति श्रद्धाभाव से भर गया। दरअसल, यह मौका था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 152वीं जयंती का, जिस पर उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड और अमर उजाला ने काव्य कैफे का आयोजन किया। इसकी थीम संपूर्ण स्वदेशी अभियान के तहत रखी गई और कार्यक्रम का सीधा प्रसारण अमर उजाला काव्य के फेसबुक पेज व यूट्यब चैनल पर हुआ। इस कार्यक्रम में छह कवियों ने हिस्सा लिया और काव्यात्मक गोष्ठी को राष्ट्रभक्ति व वीर रस से ओत-प्रोत कर दिया।

कार्यकम में शामिल थे

ज्ञानप्रकाश आकुल
लखीमपुर खीरी के ज्ञानप्रकाश आकुल मंच के बड़े कवियों में से एक हैं। गीत, नवगीत, छंद के साथ-साथ छंदमुक्त कविताओं में भी सिद्धस्थ हैं। उन्होंने देशभक्ति से ओत-प्रोत कविताएं पढ़ीं साथ ही सुनाया कि

जितना नाम कमाया उससे कहीं अधिक बदनाम हो गए
चौराहों पर बिकते सपने हर नुक्कड़ पर सजती मंडी
जब करीब से देखा पाया हर विज्ञापन है पाखंडी
जितने रंग-बिरंगे धोके उतने उनके नाम हो गए
 
ताले आ पहुंचे ज़ुबान तक आंखों में दरिया उफनाया
स्वतंत्रता की परिभाषा को सबने क्लोरोफॉर्म सुंघाया
आजादी की परिधि न समझे हर दिन और गुलाम हो गए
 
सारे कपड़ों से महंगी है कितनी भी सस्ती हो खादी
एक ओर गांधी हैं दूजी ओर खड़े हैं गांधीवादी
 
प्रवीण कुमार पांडेय 'प्रज्ञार्थू'
प्रवीण संगीत में प्रभाकर हैं। छंद, मुक्तक और राष्ट्रवादी चेतनाओं से भरी कविताएं लिखते हैं। वह तरन्नुम में कविता प्रस्तुत करते हैं। देश के बड़े काव्य-मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। कार्यक्रम में उन्होंने अपनी कविता के जरिये भारत का भ्रमण करवाया। गांधी जी के लिए पढ़ी उनकी कविता के अंश हैं

मन को बनाना है शुद्ध शुचि बुद्ध जैसा
त्याग, तप इन्द्रियों का निग्रह भी चाहिए
सगुण उपासक उपासना भी करें तो फिर
उनकी उपासना को विग्रह भी चाहिए
शेखर, सुभाष की जवानी जो जरूरी है तो
लाल, बाल, पाल का प्रतिग्रह भी चाहिए
चाहते हो भारत रहे अजेय भारत की
हिंसा पर गांधी का अतिग्रह भी चाहिए

सूरज मणि
बनारस के सूरज अनेक चैनलों व मंचों पर काव्य-पाठ कर चुके हैं। राष्ट्रपिता को समर्पित करते हुए उन्होंने अपने पाठ का आरंभ किया।

भारत के वो रखवाले थे
वो सत्य, अहिंसा वाले थे
गोरों को मार भगाया था
स्वदेशी को अपनाया था
भारत मां का ध्वज लेकर के हर कोने में लहराया था
ऐसे गांधी को है प्रणाम

अंग्रेजों की जड़ें हिलाकर तुमने उन्हें झुकाया है
भारत मां को उनके चंगुल से आजाद कराया है
आओ हम सब शीश झुकाएं उस भारत के बापू को
सत्य, अहिंसा वाला हमको जिसने पाठ पढ़ाया है

राधाकांत पांडेय
राधाकांत रीवा के रहने वाले हैं। ओज के लोकप्रिय कवि हैं जो कई कवि सम्मेलनों में शिरकत कर चुके हैं। मंच पर लगातार सक्रिय रहते हैं। उन्होंने महात्मा व स्वदेशी पर अपनी पंक्तियां पढ़ीं कि  

 मुख-मंडल की तेज सूर्य की तरुणाई जैसा था  
जिनका होना हर अभाव की भरपाई जैसा था
सौम्य, सादगी, राष्ट्रभक्ति, जनसेवा और समर्पण
दोनों का चरित्र भारत की परछाई जैसा था  

प्रेम, भाईचारे से बुराईयां मिटेंगी और  
बेहिसाब खुशी छोटी-छोटी मिल जाएंगी
साथ मिल के चले तो उलझनें मिटें तमाम  
पल में सफलता की चोटी मिल जाएगी
आप भी स्वदेशी वाला भाव अपनाइए तो  
संस्कार की झलक मोटी मिल जाएगी  
खुद की जरूरतें भी पूरी होंगी साथ-साथ  
जाने कितने घरों को रोटी मिल जाएगी

साक्षी तिवारी
युवा कवयित्री साक्षी को बचपन से ही कविताएं लिखने का शौक था। वह कई बड़े मंचों पर काव्य-पाठ कर चुकी हैं। अपने परिचय की काव्यात्मक प्रस्तुति के बाद उन्होंने स्वदेशी के पक्ष में अपनी कविताएं पढ़ीं।  

आगे बढ़ने के लिए काम करना परंतु  
एक काम सबसे विशेष नहीं भूलना  
तीन रंगों वाला ये तिरंगा रहे शीश पर  
भारती का प्यारा परिवेश नहीं भूलना  
जननी व जन्मभूमि स्वर्ग से महान है
इसलिए हमको स्वदेश नहीं भूलना   

पूरा कार्यक्रम देखने के लिए क्लिक करें


 
4 वर्ष पहले
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