कन्नड़ साहित्यकार आशा रघु (46) शनिवार को यहाँ मल्लेश्वरम स्थित अपने आवास पर मृत पाई गईं, पुलिस ने बताया। पुलिस ने कहा कि अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जाँच जारी है।
पुलिस के अनुसार, जब वह काफी समय तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थीं, तो परिवार के सदस्यों ने दिन में पहले उनके कमरे का दरवाज़ा तोड़ा। उपन्यासकार रहीं आशा रघु ने कन्नड़ टेलीविजन धारावाहिकों के लिए संवाद भी लिखे थे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने दो साल पहले अपने पति को खो दिया था। रघु अपने पीछे अपनी बेटी को छोड़ गई हैं। कन्नड़ लेखक और प्रकाशक संघ ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
18 जून 1979 को केशवा अयंगर और सुलोचना के घर जन्मी आशा रघु ने बेंगलुरु विश्वविद्यालय से कन्नड़ में स्नातकोत्तर किया था। शुरुआत में वे प्रवक्ता के रूप कार्य करते हुए टेलीविजन, रंगमंच और सिनेमा से जुड़ी रहीं, जहाँ उन्होंने संवाद लेखन भी किया और सहायक निर्देशन भी। बाद उन्होंने खुद को साहित्य के लिए समर्पित कर दिया और वर्षों तक लिखती रहीं। उन्होंने कई प्रशंसित उपन्यास लिखे जिनमें अवर्ता, गाता और माये शामिल हैं। लघु कहानियां भी लिखीं।
उनके लघु कहानी संग्रहों में 'आराने बेरालू', 'बोगासेयल्ली काथेगलु' और 'अपरूपा पुराण काथेगलु' शामिल हैं। उन्होंने 'चूड़ामणि', 'क्षमादान', 'बंगारदा पंजारा' और 'पूतानी और अन्य नाटक' जैसे नाटक भी लिखे। उनके उपन्यास 'आवर्त' पर आधारित 'आवर्त-मंथना' नामक एक आलोचनात्मक कृति भी प्रकाशित हुई है। उनको कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार, सूर्यनारायण चाडगा पुरस्कार, कन्नड़ साहित्य परिषद से पलाकला सीतारमभट्ट पुरस्कार, रायचूर कन्नड़ साहित्य परिषद से राजलक्ष्मी बारगुरु रामचंद्रप्पा पुरस्कार, अम्मा पुरस्कार, कर्नाटक लेखाकियारा संघ से त्रिवेणी बंदोबस्ती पुरस्कार और मांड्या जिला कन्नड़ साहित्य से 'साहित्यमृत सरस्वती' जैसे सम्मान से भी नवाजा गया।
7 महीने पहले