विज्ञापन

नहीं रहे बांग्ला साहित्य के सबसे लोकप्रिय लेखकों में एक मणिशंकर मुखोपाध्याय

काव्य डेस्क

Halchal
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            बांग्ला साहित्य के सबसे लोकप्रिय लेखकों में एक मणिशंकर मुखोपाध्याय उर्फ शंकर नहीं रहे। वे 93 वर्ष के थे। उनके परिजनों ने बताया कि शंकर मुखोपाध्याय उर्फ शंकर कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनके परिवार में 2 बेटियां हैं। 
        
                                                    
                            

शंकर मुखोपाध्याय के ‘चौरंगी’ जैसे उपन्यासों ने शहरी जीवन और समाज की जटिलताओं को बखूबी उजागर किया। वह बांग्ला साहित्य के सबसे लोकप्रिय लेखकों में से एक माने जाते थे। 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शंकर मुखोपाध्याय के निधन पर शोक व्यक्त किया है।  ममता बनर्जी ने अपने शोक संदेश में उन्हें एक ऐसी महान साहित्यिक हस्ती बताया, जिनकी रचनाएं पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। 

ममता बनर्जी लिखती हैं कि ‘चौरंगी’ से लेकर ‘काट अख्यानारे, ‘सीमाबाद’ से ‘जनारण्य’ तक, उनकी कालजयी रचनाओं ने बांग्ला पाठकों की पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया है।  उनकी रचनाओं में आम आदमी के जीवन संघर्ष की कहानियां सामने आयीं। विशेषकर स्वामी विवेकानंद पर उनका गहन शोध और पुस्तकें हमारे लिए अमूल्य संसाधन हैं। 
7 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

444 कविताएं

View Profile