प्रेम क्या है? यह संघर्ष भी है और हमारी ताकत भी। एक व्यक्ति इसके लिए संघर्ष करता है, तो दूसरा इसे ताकत के रूप में लेकर आगे बढ़ता है। कवि भी इसी प्रकार आगे बढ़े हैं। इन कविताओं के माध्यम से वह सीधा पाठकों से जुड़ते हंै। इन कविताओं में सत्ता का डर भी है और उसके प्रति आवाज उठाने की हिम्मत भी। ये एक ठंडी पुरवाई जैसी हैं, जो मन को आनंदित करती हैं। कवि इन कविताओं के माध्यम से आमजन के सवाल समय-पटल पर रखने का साहस करते हैं और सफल भी होते हैं।
किताब- तुम्हारा कवि
कवि- नित्यानंद गायेन
प्रकाशक- बोधि प्रकाशन
जयपुर
मूल्य- 120 रुपये