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हिंदी कविता के विलक्षण हस्ताक्षर राम निवास जाजू की काव्य यात्रा का पड़ाव-अंतरिक्ष

काव्य डेस्क

Book Review
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                                                  सहज और संवेदनशील अनुभूतियां और स्मृतियां जब शब्दों के लिहाफ़ ओढ़कर स्वरों और धुनों के रास्ते लोगों तक पहुंचती हैं और उसकी व्यापक जनस्वीकारोक्ति होती चली चाती है तो समझिये- कविता अपना काम कर रही है। 

हिंदी कविता के विलक्षण कलमकार रामनिवास जाजु ऐसे कवि हैं जो अपने वैज्ञानिक और तकनीकी एहसासों को लफ़्जी जामा पहनाकर कविता के रूप में हिंदी समाज को परोसते हैं। औद्योगिक प्रबंधन और साहित्य सृजन, दो अलग विधाएं हैं, रामनिवास जाजू असाधारण इन्हीं अर्थों में हैं कि उन्होंने इन दो परस्पर विरोधी प्रवृत्तियों को कविता में बड़ी बारीकी से साधा है। 

'राजपाल एण्ड संस' प्रकाशन से प्रकाशित किताब- अंतरिक्ष, रामनिवास जाजू का कविता समग्र, उनकी समग्र काव्य यात्रा से पाठकों का परिचय करवाती हैं। किताब में जाजु जी  के 5 काव्य संकलन ( 'भावों की भीख', 'प्यास बढ़ती गई',' घटनाओं के मध्य में', 'चट्टान के फूल', और 'फूलों का हो रहा हवन' ) में छपी कविताओं का एक जगह संकलन है।

जाजू जी की काव्य यात्रा लगभग सात दशक पहले शुरू हुई, तब वे पिलानी में पढ़ रहे थे। तब से अब तक उनकी कविताओं के पांच संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। 
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उच्च सामाजिक मूल्यों से भरे हुए

कविता संग्रह  'भावों की भीख' में एक कवि के रूप में जाजू जी देश-प्रेम और उच्च सामाजिक मूल्यों के पक्ष में बड़ी मजबूती से खड़े नज़र आते हैं।  उनका दूसरा कविता संग्रह है- 'प्यास बढ़ती गई'। इस संग्रह में 1951 से 1967 तक की रचनाएं संकलित हैं। राजस्थान की धरती के 'बरसते सावन' से लेकर 'सुहागरात' तक के गीतों की यात्रा में कवि का मन एक रूमानी द्रष्टा का मन नजर आता है। 

मुझको अपने जीवन के हर पल, हर क्षण से प्यार है
इसलिए मेरे गीतों में मस्ती की मौज बहार है
संघर्षों का रथ जो मेरे आगे पीछे चलता है 
सौ-सौ बार पटक कर मुझको मेरा साहस छलता है

आस्था और प्रतिबद्धता के स्वर से मुखरित

जाजू जी के तीसरे कविता संग्रह का शीर्षक है 'घटनाओं के मध्य में' जिसकी कविताएं आस्था और प्रतिबद्धता के स्वर से मुखरित हैं। जीवन संघर्षों और विसंगतियों के बीच झूलता हुआ आगे बढ़ता है और कवि जाजू इन विसंगतियों और अपने युगबोध को कविताओं में बड़ी ख़ूबसूरती से समेटते हैं- 

आप कहें यह रात अंधेरी 
मुझको लगता लेकिन भोर 
दृष्टि आपकी है तारों पर 
मेरी है पृथ्वी की ओर 


कविता संग्रह 'चट्टान के फूल' में आजादी के मोहभंग की वे स्थितियां साफ झलकती हैं जिसमें अभाव और अव्यवस्था का तनाव दिखता है। पांचवे और अंतिम कविता संग्रह-'फूलों का हो रहा हवन' में कवि के संघर्षों की झलकियां हैं। इस संकलन की कविताएं तत्कालीन औद्योगिक- आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निशाना साधती हैं।  
7 वर्ष पहले
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