विज्ञापन

देख लेंगे यार - दोस्ती की कहानी और विराम

दीपाली अग्रवाल

Book Review
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

राजस्थान के युवा लेखक दीपक कुमार का ‘देख लेंगे यार’ नामक उपन्यास रितेश और अभिनव की दोस्ती के सफर की कहानी है। उदयपुर की पृष्ठभूमि में लिखा गया यह उपन्यास दो दोस्तों की पढ़ाई के दौरान दूसरे शहर में एक साथ रहने, मौजमस्ती करने पर आधारित है। उपन्यास का अंत एक हादसे में रितेश की मौत पर होता है। लेकिन क्या मौत के बाद जिंदगी सचमुच ठहर जाती है? सवाल दार्शनिक-सा है, लेकिन यह कहानी जब ठहरती है तो मन इसका जवाब ढूंढता है।




किताब- देख लेंगे यार
लेखक - दीपक कुमार
प्रकाशक- हिंदी युग्म और ऐका, नई दिल्ली
मूल्य- 175 रुपये
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12689 कविताएं

View Profile