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आज का विचार: शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

काव्य डेस्क

Aaj Ka Vichar
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                            प्रथा जब एक बार धर्म का रूप धारण करके खड़ी हो जाती है, फिर कोई भी निष्ठुरता असाध्य नहीं रह जाती, बल्कि कार्य जितना भी अधिक निष्ठुर होता है और जितना ही अधिक बीभत्स होता है, पुण्य का वज़न भी उतना ही बढ़ जाता है।
        
                                                    
                            

~ शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

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