झारखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री जोबा मांझी ने शनिवार को केंद्र से राज्य में कुपोषण के खिलाफ अपनी लड़ाई को मजबूत करने के लिए लंबित धनराशि जारी करने और अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को मंजूरी देने का अनुरोध किया अनुरोध किया है।
मांझी यहां महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आकांक्षी जिलों की जोनल मीटिंग को संबोधित कर रही थीं।
कार्यक्रम में इन लोगों ने लिया भाग
कार्यक्रम में झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों के अलावा केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मुंजपारा महेंद्रभाई ने भी भाग लिया।
झारखंड में चालीस फीसदी बच्चे कुपोषित
मांझी ने कहा कि झारखंड में करीब चालीस फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार इसके खिलाफ लड़ रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आंगनबाडी केंद्रों को सप्ताह में छह दिन अंडे देने का निर्णय लिया है।
'धन की कमी एक बड़ी चुनौती'
हालांकि महिला एवं बाल विकास मंत्री ने आगे कहा कि कुपोषण के खिलाफ मिशन में धन की कमी एक बड़ी चुनौती बन रही है। झारखंड में आंगनबाडी योजनाओं के लिए 254 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत है।
बता दें कि इसी साल झारखंड में कुपोषण को लेकर चौंकाने वाले आकंड़े सामने आए। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट में बताया गया था कि प्रदेश में तीन लाख से अधिक बच्चे इससे गंभीर रूप से शिकार हैं।
रिपोर्ट में बताया गया था कि मामूली सुधार के बावजूद राज्य में 5 वर्ष से कम आयु वाले 36 लाख 64 हजार बच्चों में से 42 प्रतिशत यानि 15 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं तो उसमें भी 9.1 प्रतिशत यानि 3 लाख के करीब बच्चे अति गंभीर रूप से कुपोषण के शिकार हैं।
सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, अति गंभीर कुपोषण की वजह से राज्य में बड़ी संख्या में बच्चों का ठीक ढंग से शारीरिक और मानसिक रूप से विकास नहीं हो पा रहा है। वहीं इनमें मृत्यु का खतरा भी हैं कि पहले से ही राज्य में कुपोषण की स्थिति गंभीर है और कोरोना की वजह से कुपोषण से होने वाले खतरे करीब 14 प्रतिशत अधिक बढ़ गए हैं।