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अमित शाह के दौरे से पहले माहौल सामान्य करने का दबाव

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जम्मू। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जम्मू-कश्मीर दौरे से पहले घाटी का माहौल सामान्य करने का दबाव है। शाह 23 से 25 अक्तूबर तक जम्मू और कश्मीर दोनों ही संभागों का दौरा करेंगे। टारगेट किलिंग के बाद उपजे तनाव को जल्द दूर कर अल्पसंख्यकों, प्रवासियों समेत सभी लोगों में सुरक्षा को लेकर विश्वास बहाली के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए टारगेट किलिंग को सख्ती से कुचलने तथा ऐसे तत्वों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने को भी कहा गया है। इसी कड़ी में सीआरपीएफ के डीजी को भी केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर भेजा है। पहले से ही आईबी के आतंकरोधी अभियान के विशेषज्ञ वरिष्ठ अधिकारी कैंप कर रहे हैं।
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सुरक्षा एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अमित शाह के जम्मू-कश्मीर दौरे से पहले पूरी घाटी में पहले वाली स्थिति बहाल करने के लिए व्यापक रणनीति बनाई गई है। उप राज्यपाल ने सभी सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक कर स्थिति को अनुकूल बनाने के लिए कहा है। टारगेट किलिंग से उत्पन्न भय व तनाव के माहौल को दूर करने और आम लोगों में सुरक्षा की भावना की बहाली के लिए पेट्रोलिंग बढ़ाने के पुलिस व अन्य सुरक्षा बलों को निर्देश दिए गए हैं। खासकर दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम, पुलवामा, शोपियां, अनंतनाग और मध्य कश्मीर के श्रीनगर में। अन्य जिलों में भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है। यह कहा गया है कि वैसे इलाकों पर विशेष ध्यान रखा जाए जहां कश्मीरी पंडित, सिख एवं हिंदू समुदाय के लोग रहते हैं। प्रवासी मजदूरों को भी प्रत्येक जिले में चिह्नित कर उनके रिहाइश के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा गया है। उनके रोजगार पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ना चाहिए। हिदायत है कि यदि कहीं एक भी परिवार रहता है तो भी उसकी हिफाजत के पूरे इंतजाम किए जाएं। सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन को आपसी समन्वय को बढ़ाने के लिए कहा गया है। पुलिस से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी जिलों में प्रवासी मजदूरों का डाटा तैयार किया गया है। इनकी सुरक्षा के भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। अल्पसंख्यकों व हिंदुओं की सुरक्षा का ब्लू प्रिंट भी तैयार किया गया है। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में स्थिति सामान्य करने में सफलता मिलेगी।
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रणनीति के पीछे कई मकसद
जानकार बताते हैं कि गृह मंत्री के दौरे से पहले स्थिति सामान्य करने के दबाव के पीछे कई मकसद हो सकते हैं। पहला यह संदेश देना कि सरकार ने जल्द ही पूरे हालात पर काबू पा लिया। दूसरा दौरे के दौरान विरोधियों को आलोचना का मौका न देना। तीसरा इन चर्चाओं को विराम देना कि कश्मीर में बिहार के लोगों को मारा जा रहा है ताकि क्षेत्रवाद के विष वमन को रोका जा सके। दौरे से केवल यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि अनुच्छेद 370 व 35ए हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास की धारा बह निकली है। हर ओर विकास कार्य हो रहे हैं। युवाओं को अब अपने करिअर की चिंता है। उन्हें रोजगार चाहिए। दूरदराज के इलाकों तक बिजली-पानी पहुंचनी शुरू हो गई है। गांवों को विकास में हक मिला है।
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