जम्मू। आशा वर्करों ने शुक्रवार को प्रदर्शनी मैदान के बाहर सीटू के बैनर तले पारिश्रमिक और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। कहा कि जम्मू-कश्मीर में हजारों आशा वर्करों की 15 साल से सेवाएं ली जा रही हैं, लेकिन उन्हें आज तक कर्मी का दर्जा नहीं दिया गया है, न ही मानदेय बढ़ाया गया है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आशा वर्करों की रैली को बाहर नहीं आने दिया। यूनियन ने चेतावनी दी कि सरकार ने मांगें पूरी नहीं की तो जिला स्तर पर आंदोलन करेंगे।
सीटू के अध्यक्ष मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने कहा कि वर्करों की मांग जायज है और सरकार को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग में करीब 14 हजार आशा वर्करों की सेवाएं ली जा रही हैं। कोविड प्रबंधन में भी इनका अहम योगदान रहा है। यूनियन की सचिव अनीता राजपूत ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में आशा वर्करों को दस हजार से अधिक पारिश्रमिक दिया जा रहा है। लेकिन जम्मू-कश्मीर में इनके मासिक दो हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। आशा वर्करों को न्यूनतम वेतन के तहत 21 हजार रुपये मानदेय दिया जाए। इनकी कोविड टीकाकरण के साथ पूर्व की दो कोरोना लहरों के दौरान पूरी ड्यूटी ली गई। इसमें वर्कर दैनिक आधार पर 8-9 घंटे सेवाएं दे रही हैं। लेकिन उन्हें आर्थिक मजबूती के साथ कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं दी गई है। प्रदर्शन में ओम प्रकाश, जिया लाल परिहार, जगदीश शर्मा, गीता देवी, रोशना, रीटा, रेवा, रीटा रानी आदि शामिल रहे।
ये भी हैं मुख्य मांगें
आशा वर्करों को सामाजिक सुरक्षा में ईपीएफ, ईएसआई, निशुल्क चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाई जाए। हर वर्ष 1000 रुपये वेतन बढ़ाया जाए। टीकाकरण के प्रोत्साहन के लिए दैनिक आधार पर 300 रुपये, कोविड प्रबंधन में कार्यरत वर्करों को प्रतिदिन 500 रुपये भत्ता देना, कोविड के दौरान मौत पर परिवारवालों को 50 लाख मुआवजा देना और 50 लाख का स्वास्थ्य बीमा कवर किया करने की मांग की गई है।