जम्मू। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के चलते जम्मू-कश्मीर के 200 से ज्यादा विद्यार्थी यूक्रेन में फंसे हुए हैं। किसी को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा तो कोई चॉकलेट खाकर गुजारा कर रहा है। इधर इन विद्यार्थियों के परिजन बेचैन हैं। कर्नाटक और पंजाब के छात्र की मौत से प्रदेश के छात्रों के परिवार और सहम गए हैं।
छात्रों के अनुसार यूक्रेन से चीन समेत बड़े देशों के छात्रों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। भारत सरकार की ओर से अभी तक कुछ नहीं किया गया है। हर रोज सहायता मिलने और सुरक्षित निकलने का इंतजार किया जा रहा है, मगर निराशा हाथ लग रही है।
यूक्रेन में पहले कर्नाटक और अब पंजाब के छात्र की मौत के बाद बाकी छात्र काफी डरे हुए हैं। कमरों के बाहर धमाके सुनाई दे रहे हैं। जतिंद्र प्रताप सिंह निवासी छन्नी हिम्मत ने बताया कि उनकी बेटी जसलीन यूक्रेन में पढ़ाई करने गई है। मोबाइल पर बात हो रही है, बीच में फोन कट रहा है। उनकी बेटी बीते सात दिनों से भूूखी-प्यासी है। कभी उसे एक चॉकलेट का टुकड़ा मिल रहा है। उसने बताया है कि यहां पर पानी की भारी किल्लत है। जसलीन की मां ने बताया कि बेटी इतनी मजबूर हो गई है कि उनका दिल रखने के लिए बोल रही है मैं भरपेट खाना खा रही हूं। मगर, हालात सबके सामने हैं।
त्रिकुटा नगर की निशा खन्ना के पिता तरुण खन्ना ने बताया कि उनकी बेटी भी यूक्रेन में फंसी है। बच्चों को पोलैंड के बॉर्डर की ओर जाने के लिए कहा जा रहा है। बच्चे भूखे-प्यासे बॉर्डर की ओर निकले हैं। पता नहीं क्या होगा। कोई नहीं पूछ रहा। महेशपुरा हाउस नंबर-71 के डॉ. अनूप ने बताया कि उनका बेटा ईशान भगत हॉस्टल से बुधवार सुबह छह बजे रेलवे स्टेशन की ओर भूखा रवाना हुआ है। साढे़ आठ बजे स्टेशन पर पहुंचा है।
यहां पर प्लेसमेट कंपनी के संचालक डॉ. कर्ण सुंदर उसकी सहायता कर रहे हैं। उसे 1200 किलोमीटर तय कर पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचना है। फिर बीजा मिलने के बाद भारत के लिए रवाना होना है।
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छात्रों को निकालने के
लिए जम्मू में प्रदर्शन
- युद्ध क्षेत्र में फंसे हैं जम्मू-कश्मीर के दो सौ से ज्यादा मेडिकल छात्र
जम्मू। युद्ध क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर के 200 से ज्यादा मेडिकल छात्र फंसे हैं। इनकी वापसी के लिए बुधवार को परिजनों ने जम्मू के प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया। परिजनों का आरोप है कि सात दिनों से उनके बच्चे दिक्कत में हैं, लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही। अभी तक वापस लाने के प्रयास पूरे नहीं हो पाए हैं, उनके बच्चे भूख से बिलखने को मजबूर हैं। सरकार को बच्चों की सुरक्षित वापसी के प्रबंध करने चाहिए। परिजनों ने लोगाें से अपील की कि वे युक्रेन में फंसे बच्चों के सलामत रहने की प्रार्थना करें।
रूस की ओर से हमले हो रहे हैं। बच्चों को पैसे और रोटी की चिंता सताने लगी है। मोबाइल तक चार्ज नहीं हो पा रहे। चाहकर भी वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं। पीने का पानी तक नहीं मिल रहा है। परिजन अनूप, हरपाल सिंह, जेपी सिंह और अन्य ने बताया कि भारत सरकार उचित व्यवस्था करवाए। प्रदर्शनकारियों में शामिल राजिंदर पाल सिंह ने कहा कि युक्रेन में जहां बच्चे फंसे हैं, वहां बर्फबारी हो रही है। दयनीय हालात में बच्चों को लेकर चिंता हो रही है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि 700 भारतीय छात्र अपने मेडिकल कॉलेजों से सरहद की ओर पैदल मार्च को निकल पड़े हैं। सरकार पर भरोसा नहीं रहा। लोग की दुआएं करें।