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सियासत: डैमेज कंट्रोल में उतरे फारूक अब्दुल्ला, नाराज नेताओं से पार्टी में आने का आग्रह

Sat, 05 Mar 2022 01:10 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

नेकां प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी के असंतुष्टों को पार्टी में लौटकर नए सिरे से एकजुट होकर लड़ाई लड़ने की अपील की।
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farooq abdullah - फोटो : बासित जरगर-फाइल फोटो
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विस्तार
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नेकां से धीरे-धीरे जम्मू संभाग में पार्टी के कद्दावर नेताओं के हटने के बाद अब पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। उन्होंने नाराज नेताओं से दोबारा पार्टी में शामिल होकर नेकां को मजबूत करने की अपील की है। बडगाम में हुई नेकां की सभा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए फारूक अव्दुल्ला ने कहा कि जो कद्दावर नेता हमसे दूर हुए हैं वे हमारी गलतियों को माफ करें और आगे चलें। उन्होंने नेताओं से पार्टी में वापस आने और एकजुटता के साथ लड़ाई का हिस्सा बनने का अनुरोध किया।

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जम्मू संभाग में पिछले कुछ महीनों में नेकां को एक के बाद एक कई झटके लगे हैं। पूर्व विधायक व संभागीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा, पूर्व मंत्री सुरजीत सिंह सलाथिया और पूर्व मंत्री बुखारी ने पार्टी छोड़ दी। बुखारी ने तो पहाड़ी लोगों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पार्टी को अलविदा कहा। एक-एक कर कद्दावरों के पार्टी से नाता तोड़ने से जम्मू संभाग में पार्टी की नींव दरकने लगी है। बुखारी के जाने के बाद पार्टी को राजोरी-पुंछ में भी झटके का डर सताने लगा है। ऐसे में नेकां प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने खुद कमान संभाली और पार्टी के असंतुष्टों को पार्टी में लौटकर नए सिरे से एकजुट होकर लड़ाई लड़ने की अपील की। फारूक की अपील का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

श्वेतपत्र पर मुखर हुए स्वर
श्रीनगर में डॉ. फारूक के आवास पर 26 फरवरी को गुपकार गठबंधन की बैठक में भाजपा के खिलाफ श्वेतपत्र जारी किया गया। इसमें जम्मू-कश्मीर की खुशहाली के संबंध में भाजपा के दावे को गलत बताया गया था। बैठक के अगले दिन 27 फरवरी को जम्मू में भाजपा की ओर से देवेंद्र सिंह राणा ने श्वेतपत्र को झूठ का पुलिंदा करार दे दिया। राणा ने कहा कि पीएजीडी की छत्रछाया में वंशवादी पार्टियां कश्मीर की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए विशेष रूप से कश्मीर के लोगों के जुनून को भड़काने की असफल कोशिश कर रही हैं। 
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श्वेतपत्र के लेखकों ने अनुच्छेद 370 के समर्थन में माहौल बनाने के लिए संविधान की प्रस्तावना की अपने तरीके से व्याख्या की। विशेष दर्जा देने वाला अस्थायी प्रावधान विशेष रूप से दलितों, महिलाओं और आदिवासियों के अधिकारों के रास्ते में बड़ी बाधा था। जमीनी हकीकत से दूर पीएजीडी के सदस्य सिर्फ ड्राइंग रूम तक ही सीमित हैं। राणा के हमले के बाद फारूक ने बडगाम में असंतुष्टों से पार्टी में दोबारा लौटने की अपील की।

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