अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे का असर जम्मू-कश्मीर और पंजाब पर पूरी तरह पड़ेगा। पाकिस्तान से लगे कई इलाकों में तालिबान का पूरी तरह कब्जा हो चुका है। इस पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां बारीकी से नजर रखी हुई हैं। सबसे ज्यादा चिंता जम्मू-कश्मीर और पंजाब को लेकर है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना और आईएसएसआई तालिबानी आतंकियों के साथ मिलकर खासकर कश्मीर और पंजाब में नारको टेरेरिज्म से अशांति फैला सकते हैं। इसका खुलासा कुछ दिन पहले जम्मू संभाग के सांबा जिले में मिली बड़ी संख्या में नशे के खेप से हो चुकी है।
दरअसल, पाकिस्तान केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में लगातार किसी ने किसी तरीके से उपद्रव फैलाना चाहता है। इसके लिए वह हर प्रकार की साजिश रचने में जुटा रहता है। चाहे वह अंतरराष्ट्रीय सीमा कठुआ और सांबा जिले में ड्रोन से आतंकियों को हथियार मुहैया करवाना हो या नियंत्रण रेखा से नशे की खेप भेजना हो। पाकिस्तान हथियार तथा अन्य मदद से स्थानीय युवाओं को बरगलाकर आतंकियों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर के कई सुरक्षाबलों पर उन्हें हमले के लिए तैयार करता है। दूसरी तरफ नशे की खेप भेजकर नारको टेररिज्म फैलाता रहता है।
उधर, अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद नशे का यह खेल अब और बड़ा हो सकता है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई तालिबान से मिलकर जम्मू-कश्मीर और पंजाब में नशे की बड़े पैमाने पर सप्लाई करवा सकते हैं। इसका खुलासा जुलाई माह भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मिले करोड़ों रुपये की हेरोइन से हुआ है। अफगानिस्तान में तैयार नशे की इस खेप को पाकिस्तानी तस्करों ने सीमापार से जम्मू संभाग के अखनूर के ज्यौड़िया बार्डर पर फेंका था। जिसे स्थानीय तस्करों ने बरामद किया। इस मामले में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की टीम ने तीन आरोपियों को पकड़ा था। इसमें एक पूर्व सैन्य कर्मी भी शामिल था।
एएनटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक उस समय मौके से हेरोइन के दो पैकेट बरामद किए गए थे। इस पर अफगानिस्तान का ब्रांड लगा हुआ था। इसकी जांच लगातार की जा रही है। अधिकारियों को जांच के दौरान कुछ पाकिस्तानी तस्करों के बारे में भी जानकारी मिली थी।