जम्मू। चेहरे पर उमंग, उत्साह और जोश। शरीर को झुलसा देने वाली गर्मी में कुछ करने की चाह। हाथों में पतंगें और डोर। मौका था शनिवार को तवी रिवर फ्रंट पार्क पर पतंग उत्सव का। बाबी फिल्म का चली चली रे पतंग मेरी चली रहे, चली बादलों के पार होके डोर पर सवार, के सदाबहार गीत की तर्ज पर इस उत्सव में पतंगबाजी के शौकीन बच्चों के साथ युवाओं ने नीले आसमान में जमकर पेंच लड़ाए। उत्सव में आखिर तक आसमान में पतंग लहराने के लिए दो श्रेणियों में स्थानीय निवासी शुभंग सेठी और मोहित शर्मा को विजेता घोषित किया गया।
मंडलायुक्त डॉ. राघव लंगर ने पतंग की डोरी छोड़कर पर्यटन निदेशालय जम्मू और जेकेटीडीसी के सहयोग से करवाए गए पतंग उत्सव का आगाज किया। उन्होंने प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि पतंग उड़ाना भारत की संस्कृति का एक अभिन्न अंग रहा है। पतंगें हमें अपने घरों से बाहर निकलने और कुछ समय के लिए बचपन में वापस जाने का मौका देती हैं। पर्यटन निदेशक विवेकानंद राय ने कहा कि पतंग प्राचीन काल की परंपरा का हिस्सा रही हैं। इस उत्सव में गट्टू डोर के बजाय पारंपरिक धागे का इस्तेमाल किया गया। उत्सव में 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विजेताओं को पटनीटॉप में प्रायोजित परिवार के चार सदस्यों को दो नाइट और तीन दिन का स्टे का पुरस्कार दिया गया। उपनिदेशक पर्यटन (प्रचार) नरेश कुमार ने कहा कि इस उत्सव का उद्देश्य सदियों पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित करना और जम्मू वासियों को खुले में पतंगबाजी का अवसर प्रदान करना है। यह आजादी का अमृत महोत्सव समारोह का एक हिस्सा है।
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कल नीले आसमान में जमकर लड़ेंगे पेंच
जन्माष्टमी पर शहर में होगी पतंगबाजी
जम्मू। रक्षाबंधन के बाद सोमवार को जन्माष्टमी पर शहर में जमकर पतंगबाजी होगी। क्या बच्चे क्या बड़े हर कोई पतंगबाजी के शौकीन दिनभर छतों पर रहकर नीले आसमान में जमकर पेंच लड़ाएंगे। छतों पर मनोरंजन का भी पूरा प्रबंध होगा। डीजे और दूसरे म्यूजिक सिस्टम से गीतों को सुनने के साथ माइक से प्रतिद्वंद्वी की पतंग कटने पर पारंपरिक बोल बोले जाएंगे। शाम को आसमान में आतिशबाजी और आग के गुब्बारे उड़ाने का नजारा दिखेगा।
पतंगबाजी के लिए बच्चों के साथ युवाओं ने ढेर सारी तैयारियां कर रखी हैं। इससे लिए पुराने शहर के पक्का डंगा, दीवान मंदिर सहित अन्य बाजारों में पतंगों और डोर की खरीदारी की जा रही है। पिछले हफ्ते की तरह रविवार को भी रात तक दुकानें खोले रखने की विशेष अनुमति मिल सकती है, जिससें पतंगबाजी और जन्माष्टमी की खरीदारी की जाएगी। सोमवार को भी मौसम लगभग साफ रहने की उम्मीद है।
गट्टू डोर बड़ी चुनौती
जिला और पुलिस प्रशासन भले ही चाइनीज नायलन (गट्टू) डोर के प्रतिबंध पर सख्ती के दावे कर रहा है, लेकिन जन्माष्टमी पर अधिकांश छतों से इसी डोर से पतंगों को उड़ाते देखा जाएगा। इसके लिए पहले ही गट्टू डोर की कालाबाजारी हुई है। मानव जीवन के खतरे के लिए जन्माष्टमी पर गट्टू डोर सबसे बड़ी चुनौती रहेगी। रक्षाबंधन पर गट्टू डोर के कटने से जम्मू निवासी छह साल का ध्रुव अपनी जान गंवा चुका है। इसके अलावा अन्य दर्जनों लोग घायल हुए। हर साल दावों के विपरीत गट्टू डोर पर अधिक सख्ती नहीं दिखाई जाती है। पतंगबाजी के दौरान खासतौर पर राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को गट्टू डोर से अधिक नुकसान होने की आशंका रहती है।