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Jammu Attack: आंखों में खौफ... जुबां खामोश, इलाके में असहज शांति, तीन दशक में किसी परियोजना स्थल पर पहला हमला

Thu, 24 Oct 2024 02:19 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

गगनगीर में जेड मोड़ सुरंग के कैंप हुए आतंकी हमले के बाद क्षेत्र में असहज शांति है। तीन दशक में किसी परियोजना स्थल पर पहला हमला है। कर्मचारी घबरा रहे हैं।
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Gagangeer Terror Attack - फोटो : PTI
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विस्तार
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श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव गगनगीर में जेड मोड़ सुरंग के कैंप क्षेत्र में हुए आतंकी हमले के बाद डर वाली शांति है। रविवार को आतंकियों ने अंधुधुंध गोलियां चलाकर स्थानीय डॉक्टर सहित कंपनी के सात कर्मचारियों की हत्या कर दी थी। तीन दशक में किसी परियोजना पर यह पहला हमला है। 
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वारदात के तीन दिन बाद भी क्षेत्र में अजीब खामोशी है। गगनगीर को प्रसिद्ध सोनमर्ग हिल रिसॉर्ट का प्रवेश द्वार माना जाता है। जेड मोड़ सुरंग के चालू हो जाने के बाद उम्मीद है कि इससे न सिर्फ यहां पर्यटन बढ़ेगा बल्कि लद्दाख को सभी मौसम में संपर्क कायम रहने की सुविधा मिलेगी।

कैंप साइट पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात
आतंकी हमले के बाद आतंकवाद विरोधी अभियान के बीच दर्जनों पुलिस वाहन कैंप साइट के पास तैनात हैं और सुरक्षाबल रणनीतिक राजमार्ग पर नागरिकों और पर्यटकों दोनों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं।
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ग्रामीणों ने समझा पटाखे फूट रहे
साठ वर्षीय मोहम्मद रमजान मीर घटना के बाद से अभी तक असहज हैं। वह बताते हैं कि घटना के वक्त वह मंजिला घर के अंदर मिट्टी का चूल्हा ठीक कर रहे थे। वह कहते हैं कि हम यह समझ नहीं पाए कि क्या हो रहा है। गोलियों की आवाज सुनकर डर गए, खासकर बच्चे। एक पल लगा कि यह पटाखों की आवाज है। क्योंकि पास ही एक शादी की तैयारियां चल रही थीं। 

दुल्हन की भाभी रुबीना कहती हैं, घर में ढोल और जनरेटर का शोर था। हमें यह समझने में काफी समय लगा कि हमारे इलाके में आतंकी हमला हुआ है। कश्मीर में आतंकवाद के चरम के दौरान भी यह इलाका शांत रहा है और कभी ऐसी घटना नहीं हुई।
 

राजोरी निवासी कुलबीर समेत 11 लोगों ने नौकरी छोड़ी
आतंकवादी हमले ने मजदूरों पर गहरा मानसिक असर डाला है। राजोरी जिले के कुलबीर सिंह पिछले दो साल से निर्माण स्थल पर निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर रहे हैं। वह घटना से कुछ समय पहले ही कैंप में पहुंचे थे। सिंह ने कहा, मैं वर्दी धो रहा था, तभी मैंने गोलियों की आवाज सुनी। 

सच्चाई सामने आते ही, मैंने और मेरे साथियों ने लाइट बंद करने सहित आवश्यक एहतियाती कदम उठाए। कुछ देर रुकने के बाद सिंह ने कहा कि उन्होंने नौकरी छोड़कर गांव लौटने का फैसला किया। उनके कई साथियों ने भी यही फैसला लिया है। 
 
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उन्होंने बताया करीब 11 लोगों ने नौकरी छोड़ दी है। एक अन्य शख्स देव ने बताया कि रविवार शाम करीब 7.10 बजे वह मेस के अंदर थे, तभी गोलियों की आवाज आई। आतंकियों ने एक वाहन को भी आग लगा दी। उस वाहन का चालक किसी तरह बच निकला।
 
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