फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विधानसभा भंग पर सियासी संग्राम: भाजपा ने दिया पाक एंगल, उमर बोले साबित करके दिखाओ

Thu, 22 Nov 2018 12:47 PM IST
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
विज्ञापन

जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग होने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। गुरुवार सुबह बीजेपी नेता राम माधव ने पीडीपी-एनसी पर बड़ा बयान दिया। जिसके बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और राम माधव के बीच ट्विटर पर जुबानी जंग छिड़ गई। 

विज्ञापन




राम माधव बोले कि पीडीपी-एनसी ने पिछले महीने निकाय चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान किया था, वो आदेश भी उन्हें बॉर्डर के पार से आया था। ऐसा लगता है कि राज्य में सरकार बनाने को लेकर उन्हें नए आदेश मिले होंगे। इसी कारण राज्यपाल को ये फैसला लेना पड़ा।
विज्ञापन





 


राम माधव के इस बयान पर उमर अब्दुल्ला ने पलटवार किया। उन्होंने ट्वीट किया कि मैं आपको चैलेंज करता हूं कि इन आरोपों को सिद्ध करके दिखाएं। आपके पास रॉ-एनआईए-सीबीआई है, जांच कर पब्लिक डोमेन में ला सकते हैं. या तो इन आरोपों को साबित करें अन्यथा माफी मांगें।
 


इस पर राम माधव ने जवाब दिया कि वह उनकी देशभक्ति पर सवाल नहीं खड़े कर रहे हैं। लेकिन पीडीपी-एनसी के बीच अचानक उमड़ा प्रेम और सरकार बनाने की जल्दबाजी इस प्रकार के बयान दिलवा रही है।

जम्मू-कश्मीर में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच गवर्नर सत्यपाल मलिक ने आनन-फानन में बुधवार रात विधानसभा भंग कर दी है। इस आदेश के बाद नई सरकार के गठन की अटकलों और प्रयासों पर विराम लग गया है। 19 दिसम्बर को राज्यपाल शासन समाप्त हो रहा है। उसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू होना लगभग तय है। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के साथ जम्मू कश्मीर विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं। इससे पहले महागठबंधन और सज्जाद लोन के नेतृत्व में भाजपा द्वारा सरकार बनाने की कोशिशें तेज हुईं थीं। अब इन सारी कोशिशों पर विराम लग गया है।

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: सत्ता संग्राम के बीच पीडीपी, कांग्रेस, एनसी को बड़ा झटका, राज्यपाल ने भंग की विधानसभा

अपनी पार्टी को टूटने से बचाने के लिए जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती मुख्यमंत्री का पद छोड़ने तक को तैयार थी। विधानसभा भंग करने के फैसले से ठीक पहले अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा था कि गठबंधन का नेतृत्व हम करेंगे लेकिन हममें से नेतृत्व कौन करेगा यह अभी फैसला नहीं लिया गया है। नेकां के बाहरी समर्थन पर पूछने पर उन्होंने कहा कि इस पर अभी कोई विचार नहीं हुआ है। 

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: पार्टी बचाने के लिए इस कुर्बानी तक को तैयार थीं महबूबा मुफ्ती

जम्मू-कश्मीर में बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट पर सरकार बनाने का दावा करते हुए कहा कि राजभवन की फैक्स मशीन खराब होने के चलते वह राज्यपाल को ट्वीट कर सरकार बनाने का दावा पेश कर रही हैं। इसको लेकर नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर लिखा कि जम्मू-कश्मीर राजभवन को एक नई फैक्स मशीन की जरूरत है। इसपर महबूबा ने उमर अब्दुल्ला के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा कि राजभवन को फैक्स मशीन का कुछ करना चाहिए। 

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: महबूबा बोलीं- लगता है नईं खरीद कर देनी पड़ेगी, उमर ने भी कसा तंज

विज्ञापन

J&K: दूरियां बनी नजदीकियां, सियासी ड्रामे ने महबूबा और उमर के बीच कम की तल्खी

जम्मू-कश्मीर में बुधवार को चले सियासी ड्रामे ने महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला के बीच की दूरियों को कम करने का भी काम किया। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा और नेकां उप प्रधान उमर अब्दुल्ला के बीच की नजदीकियां उनके ट्वीट में भी देखने को मिली। जहां, महबूबा ने अपने 26 साल के पालिटिकल करियर में बस कुछ देख लेने की बात कहते हुए उमर अब्दुल्ला के प्रति आभार जताया। वहीं इस आभार का जवाब ‘गुड लक’ के साथ देने में उमर ने भी कंजूसी नहीं बरती। 

यह भी पढ़ें- J&K: दूरियां बनी नजदीकियां, सियासी ड्रामे ने महबूबा और उमर के बीच कम की तल्खी

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा के रणनीतिकार राम माधव की व्यूह रचना भेद डाली तो भाजपा का गणित गड़बड़ा गया। पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन के नेतृत्व में सरकार गठन के लिए पीडीपी में बड़े विभाजन की रणनीति बन चुकी थी।

यह भी पढ़ें- उमर ने भेद डाली राम माधव की व्यूह रचना तो गड़बड़ाया भाजपा का गणित

पीडीपी के प्रवक्ता रफी मीर ने कहा कि पार्टी ने अभी यह तय नहीं किया है कि राज्यपाल के इस कदम के बाद हमें कोर्ट जाना है या नहीं। यह एक राजनीतिक मुद्दा है और इसे राजनीतिक रूप से हल किया जाना चाहिए। हम परामर्श कर रहे हैं और कुछ दिनों में औपचारिक प्रतिक्रिया के साथ आएंगे। राम माधव का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है, गवर्नर एक संवैधानिक पद पर हैं, उन्हें गैर जिम्मेदार बयान नहीं दिया जाना चाहिए था।
 


मुझे इस गवर्नर से बहुत उम्मीद थी, लेकिन मुझे काफी दुख हुआ। वह भी केंद्र के एक और नौकर निकले। राज्यपाल के पद में ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने असेंबली को भंग करने के लिए 5 महीने क्यों इंतजार किया?: फारूक अब्दुल्ला

उन्होंने आगे कहा कि जब तक पीडीपी बीजेपी के साथ गठबंधन में थी तो वह आतंक समर्थक नहीं थी, लेकिन जैसे ही उसने नेका और कांग्रेस के साथ गठजोड़ किया तो वह आतंक समर्थक बन गई। 

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें