जम्मू-कश्मीर में बुधवार को चले सियासी ड्रामे ने महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला के बीच की दूरियों को कम करने का भी काम किया। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा और नेकां उप प्रधान उमर अब्दुल्ला के बीच की नजदीकियां उनके ट्वीट में भी देखने को मिली। जहां, महबूबा ने अपने 26 साल के पालिटिकल करियर में बस कुछ देख लेने की बात कहते हुए उमर अब्दुल्ला के प्रति आभार जताया। वहीं इस आभार का जवाब ‘गुड लक’ के साथ देने में उमर ने भी कंजूसी नहीं बरती।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा के रणनीतिकार राम माधव की व्यूह रचना भेद डाली तो भाजपा का गणित गड़बड़ा गया। पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन के नेतृत्व में सरकार गठन के लिए पीडीपी में बड़े विभाजन की रणनीति बन चुकी थी।
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पीडीपी के प्रवक्ता रफी मीर ने कहा कि पार्टी ने अभी यह तय नहीं किया है कि राज्यपाल के इस कदम के बाद हमें कोर्ट जाना है या नहीं। यह एक राजनीतिक मुद्दा है और इसे राजनीतिक रूप से हल किया जाना चाहिए। हम परामर्श कर रहे हैं और कुछ दिनों में औपचारिक प्रतिक्रिया के साथ आएंगे। राम माधव का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है, गवर्नर एक संवैधानिक पद पर हैं, उन्हें गैर जिम्मेदार बयान नहीं दिया जाना चाहिए था।
मुझे इस गवर्नर से बहुत उम्मीद थी, लेकिन मुझे काफी दुख हुआ। वह भी केंद्र के एक और नौकर निकले। राज्यपाल के पद में ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने असेंबली को भंग करने के लिए 5 महीने क्यों इंतजार किया?
: फारूक अब्दुल्ला
उन्होंने आगे कहा कि जब तक पीडीपी बीजेपी के साथ गठबंधन में थी तो वह आतंक समर्थक नहीं थी, लेकिन जैसे ही उसने नेका और कांग्रेस के साथ गठजोड़ किया तो वह आतंक समर्थक बन गई।