जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने मशहूर डल झील के किनारे आवासीय इलाके में शराब दुकान खोलने को लेकर आबकारी विभाग से जवाब मांगा है। जिस स्थान पर यह दुकान है उसके नजदीक ही एक स्कूल और एक धार्मिक स्थल भी है। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
स्थानीय लोगों की ओर से दाखिल तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अली मोहम्मद मागरे ने अपने दो पन्ने के आदेश में आबकारी विभाग से पूछा कि बुलवर्ड इलाके में शराब की दुकान खोलने के मामले में क्या सभी निर्धारित नियमों का पालन किया गया था। साथ ही याचिका में उठाए गए सभी बिंदुओं पर अगली सुनवाई के दौरान जवाब देने के लिए कहा है।
स्थानीय निवासियों ने अपनी याचिका में कहा है कि रिहायशी इलाके और शराब की दुकान के बीच की दूरी 30 फीट से भी कम है, दो स्कूल और एक धार्मिक स्थल इसके बहुत पास स्थित है। जब उन्हें पता चला कि आबकारी विभाग क्षेत्र में शराब की दुकान का लाइसेंस देने की प्रक्रिया में है, तो उन्होंने समय-समय पर लिखित शिकायतों के माध्यम से अधिकारियों से संपर्क किया, परंतु कोई फायदा नहीं हुआ।
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गौरतलब है कि गोवा के वकील प्रशांत उमराव ने उस इलाके का एक वीडियो ट्वीट किया था, जिसमें छपे हुए दाम से दोगुने दाम पर शराब बिकती दिख रही थी। इसी वीडियो को गया से भाजपा के पूर्व सांसद हरि मांझी ने शेयर किया। उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को भी टैग करते हुए कहा कि उन्हें इस तरह की कालाबाजारी की जांच करनी चाहिए क्योंकि इससे प्रशासन का नाम खराब हो रहा है।