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कोरोना काल में गणित-विज्ञान नहीं पड़ा पल्ले, बच्चे भाषा में भी फिसड्डी

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जम्मू। कोरोना महामारी के चलते स्कूलों की बंदी के बीच पढ़ाई में बच्चे पिछड़ गए हैं। गणित और विज्ञान विषय ज्यादातर बच्चों के पल्ले नहीं पड़ा है। भाषा जैसे विषय में भी बच्चों से सवालों के जवाब देते नहीं बन रहा है। स्टेट काउंसिल ऑफ एजूकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) जेएंडके के मूल्यांकन सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है।
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मूल्यांकन सर्वे के अनुसार आठवीं के 80 फीसदी बच्चे गणित और विज्ञान में कमजोर निकले। तीसरी और पांचवीं के भी 70-80 फीसदी बच्चे भाषा और गणित में पिछड़ गए हैं। विषय संबंधित टिप्स को ऑनलाइन समझने में भी बच्चे असमर्थ रहे हैं। इसका बड़ा कारण ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी का कमजोर रहना है। इंटरनेट सेवाएं ठप रहने से बच्चे विषयवार अध्ययन करने में असमर्थ रहे। वहीं, तीसरी कक्षा के छात्रों को पूछे गए सवालों की जानकारी ही नहीं थी।
स्कूल शिक्षा विभाग के दोनों डिवीजनों में मूल्यांकन के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए जोन और जिला स्तर पर अपने सभी कार्यालयों को शामिल किया गया। तीसरी और पांचवीं कक्षा के लिए भाषा, गणित और ईवीएस, जबकि आठवीं के लिए भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में सर्वे करवाया गया है। शिक्षा विभाग के अनुसार बच्चों को व्हाट्सएप से नोट बुक में सवाल उतारने के लिए निर्देश दिए गए। बच्चों ने खुद या फिर अपने माता पिता से होमवर्क करवाकर इसे वापस व्हाट्सएप ग्रुप में डाल दिया। इस कारण बच्चों ने होमवर्क और ऑनलाइन क्लास को गंभीरता से नहीं लिया। अब इसका असर अध्ययन पर पड़ा है। बच्चे कुछ खास नहीं सीख पाए हैं। इस पर तैयार परिणाम को आगामी पांच से छह दिन में शिक्षा निदेशालय भेजा जाएगा। रिपोर्ट में तीसरी कक्षा में बीस फीसदी बच्चे ही सीखनेे में समर्थ रहे जबकि पांचवीं और आठवीं में बीस से तीस फीसदी ही कुछ सीख पाए हैं।
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40 फीसदी बच्चों के पास नहीं स्मार्ट फोन
40 फीसदी बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं होने से भी असर पड़ा है। यहां पर रेडियो क्लासें लगाई गईं। अध्ययन सामग्री भेजी गई। ग्रामीण इलाकों में बच्चों ने पढ़ाई में रुझान नहीं दिखाया। कम पढ़े लिखे होने के कारण भी परिजनों ने सिर्फ अध्ययन सामग्री को ही अपने पास रखा। पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं हुए।
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कोट
कोविड -19 महामारी में लॉकडाउन के बाद दुर्भाग्यवश स्कूल बंद करने पड़े। इस दौरान बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाई गई, जिसकी खामियाें को जांचकर उस अंतराल को जानना जरूरी था, जहां बच्चे ठीक से नहीं पढ़ पाए। इससे अंदाजा हो जाएगा कि जम्मू-कश्मीर में कोविड महामारी ने शिक्षा प्रणाली को कितना प्रभावित किया है।
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- वीना पंडिता, निदेशक, एससीईआरटी
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