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डेंगू का कहर: जम्मू-कश्मीर में अब तक दर्ज किए गए 1100 से अधिक मामले, टूटा सात साल का रिकॉर्ड

Sat, 06 Nov 2021 09:55 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

जम्मू शहर के अधिकांश इलाकों में डेंगू दस्तक दे चुका है। प्रदेश भर में जम्मू जिला डेंगू से सबसे अधिक प्रभावित है। कुल मामलों में लगभग 70 फीसदी इसी जिले से हैं। 
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कठुआ में छिड़काव करता नगर पालिका कर्मी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोविड की रफ्तार थमने के बाद जम्मू-कश्मीर में डेंगू ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में अब तक 1100 से ऊपर डेंगू के मामले आ चुके हैं, जो पिछले सात साल की तुलना में अधिक हैं। इससे पहले 2013 में रिकॉर्ड 1838 मामले आए और उस समय चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि इस साल अब तक चार मरीज डेंगू से जान गंवा चुके हैं।

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यह आंकड़ा आधिकारिक है, जिसमें अन्य कई डेंगू और मौत के ऐसे मामले हैं, जो अस्पतालों में रिपोर्ट ही नहीं हो रहे हैं। कई तीमारदार डेंगू पीड़ितों का इलाज करवाने के लिए प्रदेश के बाहर के अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।

क्षेत्रीय निदेशक डेंगू शाजिया बफाई ने जम्मू में डेंगू प्रबंधन का जायजा लिया है। शनिवार को केंद्र से एक अन्य विशेषज्ञ के पहुंचने की सूचना है। सर्दी बढ़ने के बावजूद सरकारी और निजी अस्पतालों में डेंगू के पीड़ितों का पहुंचना जारी है। शहर के प्रमुख जीएमसी और एसएमजीएस अस्पताल में ही रोजाना दर्जनों डेंगू के मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें शिशु रोगियों के साथ अन्य आयु वर्ग के मरीज शामिल हैं।
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सरकारी व निजी स्तर पर एलिजा टेस्ट की मांग बढ़ी

डेंगू के संदिग्ध मामलों की बढ़ती संख्या से सरकारी और निजी स्तर पर एलिजा टेस्ट की मांग बढ़ी है। डेंगू का प्रारंभिक रैपिड टेस्ट किया जाता है, लेकिन इसे कन्फर्म करने के लिए एलिजा टेस्ट लिया जा है। दोनों ही टेस्ट खून के नमूने से लिए जाते हैं। इसमें रैपिड की रिपोर्ट आधा घंटा, जबकि एलिजा 4-5 घंटे के भीतर आ जाती है। लेकिन एलिजा की एक किट में अधिकतम 90 नमूने एक साथ लगते हैं, जिससे अधिक नमूने आने पर ही एलिजा किट में एक साथ टेस्ट किए जाते हैं।

इसमें अमूमन सरकारी स्तर पर मरीज को दूसरे ही दिन रिपोर्ट मिलती है। इसके अलावा निजी लैब में भी बड़ी संख्या में एलिजा टेस्ट किए जा रहे हैं। जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप डोगरा का कहना है कि जीएमसी की माइक्रोबायोलॉजी लैब में प्रतिदिन डेंगू के टेस्ट लिए मरीजों के नमूने आ रहे हैं। इसमें प्रतिदिन 25-30 मामले आ रहे हैं।
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सरकारी अस्पतालों में डेंगू के 155 बेड समर्पित

डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में 155 बेड डेंगू मरीजों को समर्पित किए गए हैं। इसमें जीएमसी जम्मू सहित जिला अस्पताल और डोडा, कठुआ व राजोरी नए मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। जीएमसी जम्मू के नए इमरजेंसी ब्लॉक में दो फ्लोर डेंगू मरीजों के लिए रखे गए हैं। डेंगू मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सा सुविधाओं वाले दस सेंटिनल सर्विलांस अस्पताल कार्यरत हैं। जम्मू-कश्मीर में डेंगू के बचाव और नियंत्रण के लिए गतिविधियों को बढ़ाया गया है।
स्टेट मलेरिया लॉजिस्टिक जेएंडके कार्यालय की ओर से वेक्टर कंट्रोल गतिविधियों (बायो लारविसाइड फिश, सप्रे, फॉगिंग) के साथ आईईसी/बीसीसी जागरूकता गतिविधियों को बढ़ाया गया है। नगर निगम के सहयोग से मच्छरों के सफाए के लिए निगम अधिकार क्षेत्र में दूसरे राउंड की फॉगिंग की गई है। ये गतिविधियां सांबा, कठुआ और उधमपुर जिले में भी जारी हैं। - डा. रेणु शर्मा, स्वास्थ्य निदेशक जम्मू
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