डेंगू के संदिग्ध मामलों की बढ़ती संख्या से सरकारी और निजी स्तर पर एलिजा टेस्ट की मांग बढ़ी है। डेंगू का प्रारंभिक रैपिड टेस्ट किया जाता है, लेकिन इसे कन्फर्म करने के लिए एलिजा टेस्ट लिया जा है। दोनों ही टेस्ट खून के नमूने से लिए जाते हैं। इसमें रैपिड की रिपोर्ट आधा घंटा, जबकि एलिजा 4-5 घंटे के भीतर आ जाती है। लेकिन एलिजा की एक किट में अधिकतम 90 नमूने एक साथ लगते हैं, जिससे अधिक नमूने आने पर ही एलिजा किट में एक साथ टेस्ट किए जाते हैं।
इसमें अमूमन सरकारी स्तर पर मरीज को दूसरे ही दिन रिपोर्ट मिलती है। इसके अलावा निजी लैब में भी बड़ी संख्या में एलिजा टेस्ट किए जा रहे हैं। जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप डोगरा का कहना है कि जीएमसी की माइक्रोबायोलॉजी लैब में प्रतिदिन डेंगू के टेस्ट लिए मरीजों के नमूने आ रहे हैं। इसमें प्रतिदिन 25-30 मामले आ रहे हैं।
डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में 155 बेड डेंगू मरीजों को समर्पित किए गए हैं। इसमें जीएमसी जम्मू सहित जिला अस्पताल और डोडा, कठुआ व राजोरी नए मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। जीएमसी जम्मू के नए इमरजेंसी ब्लॉक में दो फ्लोर डेंगू मरीजों के लिए रखे गए हैं। डेंगू मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सा सुविधाओं वाले दस सेंटिनल सर्विलांस अस्पताल कार्यरत हैं। जम्मू-कश्मीर में डेंगू के बचाव और नियंत्रण के लिए गतिविधियों को बढ़ाया गया है।
स्टेट मलेरिया लॉजिस्टिक जेएंडके कार्यालय की ओर से वेक्टर कंट्रोल गतिविधियों (बायो लारविसाइड फिश, सप्रे, फॉगिंग) के साथ आईईसी/बीसीसी जागरूकता गतिविधियों को बढ़ाया गया है। नगर निगम के सहयोग से मच्छरों के सफाए के लिए निगम अधिकार क्षेत्र में दूसरे राउंड की फॉगिंग की गई है। ये गतिविधियां सांबा, कठुआ और उधमपुर जिले में भी जारी हैं। - डा. रेणु शर्मा, स्वास्थ्य निदेशक जम्मू