सरकार ने अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी अधिनियम के तहत सुविधाएं देने और इस पर योजना तैयार करने में कार्रवाई आरंभ कर दी है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा वन अधिकार अधिनियम के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए की गई। घोषणा के अनुरूप आदिवासी मामलों के विभाग, वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा अधिकारों की मान्यता, दावों के निपटान, दावा-पश्चात समर्थन की योजना के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
जनजातीय कार्य विभाग के सचिव डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग ने पूर्व में जिला एवं उपमंडल स्तर की समितियों के गठन का आदेश दिया है। इस आधार पर सरकार ने उपायुक्तों को मनोनीत सदस्यों के चयन के लिए अधिकृत किया है।
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विभिन्न जिलों में 20,000 से अधिक दावों की प्रक्रिया चल रही है। ग्राम पंचायत स्तर पर वन अधिकार समितियों को मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग ने जन जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम के लिए 60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है।