दरबार मूव के अफसरों और कर्मचारियों को राहत देते हुए सरकार ने सरकारी आवास खाली करने की समय अवधि 30 दिन तक बढ़ा दी है। जून के अंत में दरबार मूव से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के सभी आवास आवंटन रद्द करते हुए 21 दिन के भीतर आवास खाली करने के आदेश दिए गए थे। मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह अवधि बढ़ा दी गई है।
सामान्य प्रशासनिक विभाग के आयुक्त सचिव मनोज कुमार द्विवेदी की ओर से जारी आदेश में अतिरिक्त तीस दिन की समय अवधि 20 जुलाई से प्रभावी होगी। यानी 18 अगस्त तक अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी आवास खाली करने होंगे। सभी प्रशासनिक विभागों/ विभागीय अध्यक्षों को आवास खाली करने की प्रक्रिया के लिए कर्मचारियों को तीन दिन का विशेष कैजुअल अवकाश देने को कहा है।
इसके साथ संपदा विभाग को जम्मू और कश्मीर में एक बेहतर तंत्र स्थापित करके कर्मचारियों के हक में असुविधा युक्त एनओसी/क्लीयरेंस जारी करने को कहा है। एलजी प्रशासन ने कामकाज को ई-ऑफिस में परिवर्तित करने के बाद दरबार मूव के अधिकारियों और कर्मचारियों का जम्मू और श्रीनगर में आवास आवंटन रद्द किया है। यह जम्मू और कश्मीर में सर्दी और गरमी में दरबार मूव की 149 वर्ष पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म करने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
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साल 1872 में महाराजा रणबीर सिंह ने दरबार मूव व्यवस्था शुरू की थी। इस व्यवस्था के समाप्त होने से सरकारी खजाने में हर वर्ष खर्च होने वाले करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होगी। इस फैसले का जम्मू के व्यापारी वर्ग ने विरोध किया है। उनका कहना है कि दरबार मूव की प्रक्रिया बंद होने से सर्दियों के दौरान छह माह तक होने वाला उनका कारोबार प्रभावित होगा।
दरबार मूव के साथ आने वाले सैकड़ों परिवारों का उनको हर साल इंतजार रहता है। ई ऑफिस के तहत सचिवालय का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल कर दिया गया है। अब जम्मू और श्रीनगर दोनों जगह सचिवालय में रिकॉर्ड ऑनलाइन देखे जा सकते हैं। कामकाज को सुचारु रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारी रोटेशन पर दोनों जगह बैठ रहे हैं।