पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ने वाले खजूरिया ने बताया कि पीड़ित परिवारों को सहायता मिलने की दिशा में यह सिर्फ एक छोटा कदम है। यह आम जनता की जीत है जो पूरे देश में रोज चिकित्सा देखरेख में कमी और आधिकारिक लापरवाही से पीड़ित होती है। मानवाधिकार आयोग ने 18 जनवरी और 19 जुलाई को मुआवजा देने का आदेश जारी किया था।
जम्मू संभाग में उधमपुर जिले के रामनगर में नकली दवाओं के सेवन से शिशुओं की मौत के मामले में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 12 शोक संतप्त परिवारों को तीन-तीन लाख रुपये की सहायता राशि जारी की है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से 11 महीने पहले मुआवजे की सिफारिश की गई थी।
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इस साल की शुरुआत में आयोग ने दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 के बीच रामनगर ब्लॉक में अपने बच्चों को खोने वाले परिवारों को मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया था। आयोग ने संज्ञान लिया था कि भले ही जम्मू-कश्मीर औषधि विभाग जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता हो लेकिन इस मामले में चूक से इनकार नहीं किया जा सकता है। जम्मू के सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश सी खजूरिया ने आयोग के समक्ष नकली दवाओं के सेवन से शिशुओं की मौत की शिकायत दर्ज कराई थी।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में विभाग ने मानवाधिकार आयोग के आदेश का अनुपालन करने की बात कही है। इसमें कहा गया है कि उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में 7 अक्तूबर को हुई बैठक में प्रशासनिक परिषद ने रामनगर में नकली दवा के पीड़ित 12 नवजात शिशुओं के परिवारों के लिए 36 लाख रुपये की राशि जारी करने की मंजूरी दी थी। अतिरिक्त मुख्य सचिव विवेक भारद्वाज की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विभाग ने राज्य औषधि नियंत्रक को मुआवजे की राशि जारी करने आदेश दिया है, जो सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित विशेष अनुमति याचिका के फैसले के अधीन है।