संगिठत क्षेत्र में रोजगार करने वालों की संख्या बढ़ी
जम्मू-कश्मीर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के आंकड़ों की मानें तो 2019-2020 वित्त वर्ष में जम्मू-कश्मीर में 9253 संस्थानों के 549475 लोगों के ईपीएफओं में खाते थे। 2020-21 में संस्थानों में 7.33 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि सदस्यों में 1.77 फीसदी की। 2021-22 में संस्थानों में 8.68 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि सदस्यों में 1.24 फीसदी की। 2022-23 में संस्थानों में 7.78 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि सदस्यों में 11.49 फीसदी की। 2023-24 में संस्थानों में 9.45 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि सदस्यों में 0.66 फीसदी की। 2024-25 में वर्तमान तक संस्थानों की संख्या करीब 1300 है जबकि सदस्यों की संख्या 595603 के करीब है।
सालों तक भर्तियां न निकला भी बेरोजगारी दर बढ़ने का कारण
प्रदेश में बेरोजगारी दर बढ़ने के पीछे एक कार सालों तक भर्तियां न निकलना भी है। 2022 में सब-इंस्पेक्टर के 1200 पदों के लिए 97973 अभ्यार्थियों ने परीक्षा दी। सरकारें पद अधिसूचित तो करती हैं, लेकिन परीक्षा दो से चार साल बाद होती है। इससे युवाओं पर न सिर्फ तैयारी का बोझ बढ़ता बल्कि ओवरएज होने का भी डर बना रहता है। 2020 और 2021 में जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड द्वारा अधिसूचित पदों पर अभी तक भर्ती नहीं हो पाई है।
क्या कहते हैं युवा
मैं बीते पांच साल से सरकारी नौकरी की तैयारी में लगा हूं। सरकार पद अधिसूचित करने में कंजूसी कर रही है। स्कूल शिक्षा विभाग में संविदा पर कर्मचारियों की भर्ती की जा रही है। पढ़े-लिखे युवाओं को चतुर्थ श्रेणी के पद के लिए आवेदन करना पड़ रहा है। -अजय कुमार, युवा
2019 के बाद सरकारी पद अधिसूचित तो हुए लेकिन भर्ती समय पर नहीं हो रही है। कई-कई साल तक परीक्षाएं ही नहीं होती। इसका असर बच्चों की तैयारी पर पड़ रहा है। सरकार ने हाल में पुलिस कांस्टेबल के पद अधिसूचित किए हैं। पुलिस कांस्टेबल के पद अधिसूचति हुए सात साल हो चले हैं। -राकेश कुमार, युवा
प्रदेश में बेरोजगारी के आंकड़े
राज्य 15-29 15-59 15 वर्ष से ऊपर
जेएंडके 13.7 4.8 4.4
पंजाब 17.5 6.7 6.1
हरियाणा 17.5 6.4 6.1
हिमाचल 12.5 5.0 4.3
दिल्ली 6.1 2.0 1.9
25.24 लाख युवा मतदाता
4.4 फीसदी बेरोजगारी
1.2 फीसदी राष्ट्रीय बेरोजगारी दर से ज्यादा