जम्मू। सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू (जीएमसी) में जल्द नेत्र बैंक लोगों को समर्पित होगा। इसमें दान किए गए कार्नियल स्टोर करने के साथ इसके प्रत्यारोपण का विस्तार होगा। अभी तक नेत्र विज्ञान विभाग जीएमसी में कार्नियल ट्रांसप्लांट केंद्र के रूप में काम कर रहा था, जिसमें जरूरत के मुताबिक बाहर से विभिन्न एजेंसियों द्वारा कुछ कार्नियल मंगवाकर उसका प्रत्यारोपण किया जाता है, लेकिन नेत्र बैंक न होने के कारण उसे स्टोर करने की सुविधा नहीं थी। अब नेत्र बैंक के शुरू होने से खुद कार्नियल निकालकर, उसे स्टोर करने, प्रत्यारोपण और दूसरों को कार्नियल देने की सुविधा शुरू हो सकेगी।
नेत्र बैंक की लाइसेंस प्रक्रिया के लिए शनिवार को स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली के महानिदेशक स्वास्थ्य सेवा (डीजीएचएस) से तीन सदस्यीय टीम ने मेडिकल कालेज जम्मू के नेत्र बैंक, कार्नियल प्रत्यारोपण और रिट्रीवल सुविधा का निरीक्षण किया।
नेत्र विज्ञान विभाग में वर्तमान व्यवस्था में 2 से 4 कार्नियल मंगवाकर उसके प्रत्यारोपण की सुविधा दी जा रही थी। लेकिन नेत्र बैंक न होने के कारण प्रत्यारोपण सुविधा का विस्तार नहीं हो पा रहा था। इसमें कार्नियल लाकर उसे स्टोर करने की सबसे बड़ी दिक्कत थी। विभाग में नेत्र बैंक के लिए सुविधाएं विकसित की गई हैं। टीम ने सरकार के निर्धारित मापदंडों के तहत नेत्र विज्ञान विभाग में अत्याधुनिक नेत्र शल्य चिकित्सा सुविधाओं की जांच की। इसमें ट्रांसप्लांटेशन आफ ह्यूमन आर्गन एंड टिशू एक्ट, थोटा 1994 के मापदंडों को देखा गया।
डीजीएचएस से पंजीकरण प्राप्त करने के बाद नेत्र विज्ञान विभाग जीएमसी में प्रत्यारोपण की प्रक्रिया फिर से शुरू की जाएगी। इससे पहले जीएमसी जम्मू को मानव अंग अधिनियम 1997 के जम्मू कश्मीर प्रत्यारोपण के तहत स्वास्थ्य सेवा निदेशालय जम्मू से लाइसेंसिंग प्राधिकरण से पंजीकरण मिला है। लेकिन जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद विभाग ने स्टेट आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (सोटो) जेएंडके के माध्यम से डीजीएचएस नई दिल्ली से नए पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जीएमसी जम्मू में नेत्र बैंक शुरू होने से नेत्रदान और कार्नियल ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होगी। जीएमसी की प्रिंसिपल डॉक्टर शशि सूदन और विभाग के एचओडी डॉक्टर सतीश गुप्ता ने कहा कि नेत्र बैंक शुरू होने से प्रत्यारोपण सुविधा का विस्तार होगा। इससे नेत्रदान के साथ प्रत्यारोपण की सुविधा बढ़ेगी। इस मौके पर प्रशासक अश्विनी खजूरिया, डॉक्टर शाजिया वफाई, डॉक्टर संजीव पुरी मौजूद रहे।