अपने सहयोगियों के साथ 1995 में भारत समर्थक अवामी लीग बनाने के लिए हथियार छोड़ने के बाद पिछले 26 वर्षों के दौरान खुद पर कई बार हुए हमलों का जिक्र करते हुए मजीद ने कहा कि उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा के गरूरा गांव में उनके घर को बार-बार निशाना बनाया गया। उनके रिश्तेदारों को भी नहीं बख्शा गया। उनके भाई हाजी गुलाम नबी की दिसंबर 2002 में आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। जबकि वह खुद 16 नवंबर 2005 को सचिवालय के रास्ते में टीआरसी श्रीनगर के पास बम विस्फोट में बच गए थे।