आयोग ने कहा कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा देने के लिए कहा गया था। 26 नवंबर 2021 तक सरकार पीड़ित परिवारों को मुआवजा वितरित करने के सबूत से आयोग को अवगत करवाए।
जम्मू संभाग में उधमपुर जिले के रामनगर क्षेत्र में खांसी-जुकाम की घाटिया दवा के सेवन से बच्चों की मौत मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्रदेश सरकार को 26 नवंबर तक की मोहलत दी है। आयोग ने कहा कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा देने के लिए कहा गया था। 26 नवंबर 2021 तक सरकार पीड़ित परिवारों को मुआवजा वितरित करने के सबूत से आयोग को अवगत करवाए।
विज्ञापन
इस मामले को जम्मू के सामाजिक कार्यक्रम सुकेश खजूरिया आयोग के संज्ञान में लाए थे। आयोग ने मामले से जुड़े तथ्यों को देखते हुए पाया कि सरकारी विभागों की लापरवाही से बच्चों की जान गई है। यदि विभाग घटिया दवा पर नजर रखता तो इसके सेवन से बच्चों की मौत को रोका जा सकता था। दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 के दौरान कई बच्चों की दवा के सेवन के बाद मौत हो गई थी। यह दवा हिमाचल प्रदेश में निर्मित हुई थी।
यह भी पढ़ें- बेनकाब हुआ पाकिस्तान: आतंकी बोला- सेना देती थी प्रशिक्षण, वो कहते थे इस्लाम खतरे में है और...
आयोग के समक्ष प्रदेश सरकार ने कहा है कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का मामला गंभीरता से विचाराधीन है। वहीं, आयोग के समक्ष मामला उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश खजूरिया ने कहा कि सरकार जानबूझ कर मुआवजा देने के मामले को लटका रही है। सरकार ने आयोग के फैसले को न्यायालय में भी चुनौती दी थी, हालांकि अदालत ने सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं किया था। ऐसी परिस्थितियों में जम्मू-कश्मीर सरकार को मुआवजा वितरण के लिए और समय नहीं दिया जाना चाहिए।