टिक्कू ने कहा कि उन्हें बहुसंख्यक समुदाय से सौ प्रतिशत प्रोत्साहन चाहिए। 2007 में जब पहली बार उनके संगठन द्वारा कई वर्षों बाद श्रीनगर में दशहरा मनाया, तब केवल उनके ही समुदाय के 100 लोग शामिल हुए थे, लेकिन जब 2009 में फिर से दशहरा मनाया गया तो करीब 35000 लोगों ने इसमें शिरकत की, जिसमें से हमारे कुल 500 लोग थे। आज भी वैसा ही प्रोत्साहन चाहिए। वहीं, नागरिकों की हत्या के बाद पलायन कर गए परिवारों के बारे में कहा कि उन्हें जो जानकारी है अभी तक करीब आठ परिवार यहां से निकले हैं, लेकिन उनमें से कई अस्थायी तौर पर गए हैं, जो जल्द वापस लौटेंगे। पुलिस की हेल्पलाइन को उन्होंने अच्छा कदम बताया।
ऑल पार्टी सिख को-ऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने भी इस हेल्पलाइन का स्वागत किया है, लेकिन कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इसकी जरूरत थी। पुलिस के हेल्पलाइन नंबर से भी ज्यादा यहां के बहुसंख्यक लोगों की हेल्पलाइन को जरूरी मानते हैं। उन्होंने छट्टी सिंघपोरा और महजूर नगर के हत्याकांड का हवाला देते कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद भी कश्मीर में बहुसंख्यक समुदाय के साथ लगाव काफी अच्छा रहा।
रैना ने कहा कि हेल्पलाइन केवल श्रीनगर और अन्य उन जगहों पर मदद दे सकती है, जहां नेटवर्क है, लेकिन सिख करीब 124 गांवों में रहते हैं, वहां तो केवल बहुसंख्यक ही हमारा सहारा हैं। उम्मीद करते हैं कि यह भाईचारा आगे भी कायम रहेगा। बहुसंख्यक समुदाय को गंभीरता से सोचना होगा कि भाईचारा कैसे कायम रखा जाए।