कुछ नया और हटकर करने का जनून रखने वाले ये युवा लाखों लोगों को अपने हुनर से मुरीद बना रहे हैं। आलोचना को प्रेरणा बनाकर आगे बढ़ रहे सोशल मीडिया के ये सितारे न केवल जम्मू-कश्मीर की लोक संस्कृति, परंपरा, खानपान और रहन-सहन को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों पर चोट भी कर रहे हैं। पेशे से कोई इंजीनियर है, तो कोई कारोबारी। कोई छात्र है तो कोई शिक्षक।
सोशल मीडिया के माध्यम से अपने शौक व हुनर को दुनिया तक पहुंचाने वाले जम्मू के इन युवाओं की आज एक अलग पहचान है। महज सत्रह साल की उम्र में लेखक बने सहज प्रेरक वीडियो बनाकर भी दूसरों का हौसला बन रहे हैं, तो जम्मू को देशप्रेम से जोड़ने वाले रिदम के यू-ट्यूब पर आज लाखों फालोअर हैं।
एमबीए डिग्री धारक शिक्षक उपासना और इंजीनियर ईशा भान यहां के परंपरागत पहनावे को फैशन व ब्यूटी से जोड़कर दुनिया के सामने रख रही हैं। कभी शौक में वीडिया बनाने वाले इन सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर में से कई लाखों कमा रहे हैं। इनका कहना है कि जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ काम किया जाए, तो आपके कंटेंट को लोग हाथों हाथ लेते हैं।
पहले लोगों ने मजाक उड़ाया आज कमा रहे हैं लाखों रुपये
सोशल मीडिया पर लघु फिल्म बनाने वाले रिदम जसरोटिया का कहना है कि वह डांसर बनना चाहते थे। पहला वीडियो बनाया तो लोगों ने मजाक उड़ाया। लेकिन उसके बाद बनाए ‘आठवीं फेल बना करोड़पति’ वीडियो ने उनकी जिंदगी बदल दी। रिदम ने बताया कि एक बार किसी ने सोशल मीडिया पर उन्हें कश्मीरी समझ पत्थरबाज लिख दिया। तब यहां की खासियत पर वीडियो बनाकर दुनिया की जम्मू-कश्मीर से पहचान करवाई। उनके अनुसार आज सोशल मीडिया पर उनके छह लाख से ज्यादा फालोअर्स हैं। कई ब्रांड उनके साथ जुड़े हैं। सोशल मीडिया से अब वह 30 से 35 लाख रुपये कमा रहे हैं। - रिदम जसरोटिया, यू-ट्यूबर
सोशल मीडिया पर डाले कंटेंट ने 17 की उम्र में बना दिया लेखक
महज 17 साल की उम्र में बेस्ट सेलर किताब लिखने वाले सहज सभ्रवाल एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग कर रहे हैं। सहज का कहना है कि सातवीं कक्षा से लिखना शुरू किया। सोशल मीडिया ने मेरे विचारों और लेखन को मंच दिया। गूगल में कंटेट देख एक प्रकाशक ने किताब छापने के लिए खुद फोन किया। पहली किताब बेस्ट श्रेणी में आई तो और लिखने के लिए प्रेरित हुआ। अब तक नशे और यौन अपराधों पर युवाओं को जागरूक करने के लिए दो किताबें लिख चुका हूं। - सहज सभ्रवाल, लेखन
मिथक तोड़ने सोशल मीडिया पर आईं, लोगों ने किया पसंद
लाइफ स्टाइल पर काम कर रहीं उपासना महाजन का कहना है कि रूढ़ियों और मिथक को तोड़ने के लिए सोशल मीडिया पर आई थीं। यह सिर्फ पैसा कमाने या चेहरा दिखाने का स्रोत नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज को नई दिशा देने में इसे इस्तेमाल किया जाए। सोशल मीडिया से क्रांति लाई जा सकती है, लेकिन इससे जुड़े लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इंफ्लुएंसर से पहले हमें चेंज मेकर होना चाहिए। सॉफ्टवेयर इंजीनियर उपासना कहती हैं कि उन्हें दसवीं कक्षा से ही दोस्त बनाने का शौक था और अब यह सफर सोशल मीडिया पर जारी है। - उपासना महाजन, लाइफ स्टाइल
फुटवेयर फैक्टरी के मालिक दुनिया में पहुंचा रहे जम्मू के व्यंजनों की महक
पेशे से कारोबारी सिद्धार्थ धर जम्मू-कश्मीर के व्यंजनों की खासियत को दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। खुद की फुटवेयर फैक्टरी चला रहे सिद्धार्थ हफ्ते में दो दिन जुनून के साथ फूड ब्लॉगिंग कर रहे हैं। जम्मू के स्ट्रीट फूड को नई पहचान दिला रहे हैं। सिद्धार्थ कहते हैं-हमें कुछ हटकर करना चाहिए। वह फूड पंडित ब्लॉग के जरिये जम्मू के कलाड़ी, राजमा और मदरा जैसे व्यंजनों की जानकारी विदेशों तक पहुंचा रहे हैं। सिद्धार्थ का कहना है कि इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन व अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। - सिद्धार्थ धर, फूड ब्लॉगर
गूगल में जॉब के साथ दे रहीं सौंदर्य और फैशन के टिप्स
ब्यूटी लाइफ स्टाइल पर ब्लॉगिंग कर रहीं पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर ईशा भान ने 2016 से यू ट्यूब से अपना सफर शुरू किया। 20 साल की ईशा आज कई ब्रांड से जुड़ी हैं। गूगल में जॉब करने वाली ईशा कहती हैं कि सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक सच दिखाने का काम करना चाहिए। वह खुद पर प्रोडक्ट आजमाती हैं तो अनुभव के मुताबिक सीधा सच और असलियत दिखाती हैं। सोशल मीडिया पर ईमानदार होना जरूरी है। - ईशा भान, ब्यूटी एंड फैशन
पाकिस्तान से सटे ठेठ देहात के व्यंजनों को ला रहे सामने
पाकिस्तान की सीमा से सटे रामगढ़ सेक्टर के केसो मन्हासा गांव के 17 साल के अंश रिहान फूड ब्लॉगिंग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया ने न केवल पहचान दी, बल्कि मनोबल भी बढ़ाया। यही कारण है कि आज वह जम्मू के ठेठ देहात के परंपरागत व्यंजनों और यहां लोक संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचा पर रहे हैं। बारहवीं के छात्र अंश कहते हैं, उन्होंने उस क्षेत्र से खान-पान और लोक संस्कृति पर वीडियो बनाना शुरू किए, जहां पाकिस्तान की ओर से आए दिन फायरिंग होती थी। सोशल मीडिया पर आने के लिए कई चुनौतियाें का सामना करना पड़ा। -अंश रिहान, फूड ब्लॉगर
क्यूर-कलाड़ी के वीडियो पर उड़ा मजाक, अब लोग तारीफ कर रहे
फूड ब्लॉगिंग से डोगरा व्यंजनों को प्रमोट कर रहे लक्ष कहते हैं कि क्यूर और कलाड़ी जैसे देसी व्यंजनों पर वीडियो पर पहले तो मजाक उड़ा। नकारात्मक कमेंट आते रहे लेकिन अब उन्हीं वीडियो पर खूब तारीफ मिल रही है। लक्ष ने कहा - सफलता के लिए परिवार का समर्थन जरूरी है। 11वीं कक्षा में 2016 में डुग्गर ब्लॉग को शुरू किया। पहले 90 फीसदी नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती थी अब 90 फीसदी समर्थन करते हैं। असफलता से बेहतर अनुभव मिलते हैं और रुकने के बजाय आगे बढ़ते रहना चाहिए। - लक्ष, फूड ब्लॉगर
10वीं-12वीं के टॉपर बने इंजीनियर, अब फूड ब्लॉगिंग
दसवीं और बारहवीं में टॉपर रहे आकाश ने इंजीनियरिंग की है, लेकिन फूड ब्लॉगिंग के शौक ने उन्हें यू-ट्यूबर बना दिया। आकाश बताते हैं कि उन्हें लंदन में रह रहे दोस्त अर्जुन से ब्लॉगर बनने की प्रेरणा मिली। आकाश ने कहा कि पारंपरिक व्यंजनों को देश दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं। जम्मू संभाग में इसकी अपार विरासत है। उनके पूर्वज विभाजन के बाद पाकिस्तान से राजौरी आकर बसे थे। पारंपरिक व्यंजनों पर ब्लॉग उनकी पहली पसंद हैं। आकाश चौधरी, फूड ब्लाॅगर
गाने के शौक ने सोशल मीडिया पर दिलाई पहचान
गायक कैलाश खेर से प्रेरणा लेकर गाना शुरू किया था। अनुज रिहान के अनुसार स्कूल से गाते आ रहे हैं। आगे जाने की चाहत के चलते रियलिटी शो में भी गाया। फिर सोशल मीडिया पर वीडियो डाले और आज लोग पसंद कर रहे हैं। अभी पढ़ाई करनी है। इसे करिअर बनाने से भी परहेज नहीं है। - अनुज रिहान