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दस हजार एकड़ में लगी गेहूं की फसल पर सूखे का संकट

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कठुआ। जिले के कंडी इलाके में सूखे के हालात दिख रहे हैं। आम तौर पर बैसाखी के करीब पकने वाली गेहूं की बालियां सूखे की वजह से अभी से पीली पड़ने लगी हैं। दस हजार एकड़ का क्षेत्र जिले में इस बार मौसम में एकाएक हुए परिवर्तन से प्रभावित है। उधर, पुराने ढर्रे से नहरों की सफाई का विभागीय शेड्यूल इस बार किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। नहरों की सफाई का काम शुरू हुए एक सप्ताह भी नहीं बीता है। फुर्ती भी दिखाई गई तो एक सप्ताह और लगना तय है। ऐसे में कंडी के किसान अब खुदा से रहमत की बौछार मांग रहे हैं। बारिश ही अब कंडी के किसानों की मेहनत को बचा सकती है।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि कंडी के इलाकों में खेतों को जल्द पानी नहीं मिला तो फसल की बर्बादी तय है। दरअसल फसलों को मार्च महीने में ही अप्रैल की गर्मी मिल गई है। सूरज की तपिश इतनी है कि आम तौर पर रहने वाले तापमान से दिन का अधिकतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस अधिक है। उसपर सूखा मौसम और परेशान कर रहा है। रावी तवी सिंचाई विभाग की ओर से अपर नहर में उज्ज बैराज से बुधवार को पानी छोड़ दिया गया। यह पानी राजबाग, मढ़ीन, हीरानगर और सांबा के इलाकों की सिंचाई करेगा।
जिसमें कंडी का नाममात्र ही इलाका पड़ता है। लेकिन लखनपुर में लिफ्ट एरीगेशन स्कीम से चलने वाली रावी नहर की अभी सफाई भी पूरी नहीं हुई है। खरोट के नजदीक बुधवार को भी काम जारी था। विभाग की मानें तो खरोट मोड़ पर लीकेज खत्म करने का काम हाल में शुरू हुआ। लखनपुर में गोल्डन गेट्स के पास नहर ठीक करवाई जा रही है। दन्ना में भी काम करवाया जा रहा है। उसपर कठुआ कनाल में भी नहर की सफाई पूरी नहीं हुई है। यह दोनों कार्यों के लिए 31 मार्च का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसके बाद ही पानी खेतों तक पहुंच सकेगा। संवाद
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बदला निजाम और कानून, लेकिन व्यवस्था वही
केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर का निजाम बदल गया, कानून बदल गए, लेकिन किसानों की किस्मत नहीं बदल पाई है। आज भी नहरों में सिंचाई के लिए पानी की सप्लाई और नहरों की मरम्मत का शेड्यूल राजा महा राजाओं के समय का इस्तेमाल किया जा रहा है। हर साल सिंचाई के लिए परेशान रहने वाले किसानों को इस बार भी पानी के लिए तरसना पड़ सकता है। फरवरी माह में जहां जिले की नहरों की सफाई का काम पूरा कर लिया जाना चाहिए, वहीं इस बार भी विभागों की लेटलतीफी का खामियाजा कंडी के किसान भुगत रहे हैं। लेकिन निचले इलाके के किसानों को भी राहत मिलने वाली नहीं है। तापमान में बढ़त के बाद अभी से हाहाकार शुरू हो गई है।
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