श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को नगर निगम श्रीनगर से पूछा कि वह बताए कि श्रीनगर की सड़कों पर कितने आवारा कुत्ते हैं। इसके साथ ही इनकी जन्म दर नियंत्रण, टीकाकरण आदि और जागररूकता फैलाने के लिए बनाई गई कार्ययोजनाओं का विवरण भी अगली सुनवाई पर 9 अगस्त को मांगा है।
कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कानून के छात्रों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे और मोहम्मद अकरम चौधरी की एक खंडपीठ ने नगर निगम के कमिश्नर संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि आयुक्त को पशु जन्म नियंत्रण के मुद्दे और एंटी-रेबीज केंद्रों की स्थापना के बारे में भी विवरण प्रस्तुत करें। आवारा कुत्तों और विशेष रूप से कुत्ते के काटने और रेबीज के प्रसार को रोकने के लिए निगम की कार्य योजना की भी जानकारी उपलब्ध कराएं। यह भी बताएं कि कुत्ते के काटने से बचने के लिए क्या करें और क्या न करें के संबंध में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के मध्यम से कितनी जानकारियां प्रसारित और प्रकाशित कराई गईं।
इसके साथ ही अदालत ने प्रदेश के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को एक हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया कि केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में सभी औषधालयों और अस्पतालों में एंटी-रेबीज टीके और मानव रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन की उपलब्धता की क्या स्थिति है। अधिकारियों को विभिन्न व्यक्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पीड़ितों द्वारा कुत्ते के काटने के बारे में दर्ज शिकायतों से निपटने के लिए उठाए गए कदमों को इंगित करने के लिए भी कहा गया है।
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याचिकाकर्ताओं का दावा 90000 कुत्ते सिर्फ श्रीनगर शहर में
इससे पहले याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि लगभग 90000 आवारा कुत्ते केवल श्रीनगर शहर में घूम रहे हैं। श्रीनगर शहर और उसके आसपास विभिन्न स्थानों पर आवारा कुत्तों के हमले में कुछ नाबालिग बच्चों की मौत भी हुई है।