Jammu : कोर्ट ने कहा कि इस मामले में यह स्पष्ट है कि वरिष्ठ अफसर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर अपनी पहली पत्नी के खिलाफ फर्जी आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करा दिया। यह सब बदले की भावना से किया गया, जिसके चलते चार्जशीट को खारिज किया जाता है।
बडगाम जिले के पूर्व एसएसपी की पहली पत्नी पर दर्ज आपराधिक मामले की चार्जशीट को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में यह स्पष्ट है कि वरिष्ठ अफसर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर अपनी पहली पत्नी के खिलाफ फर्जी आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करा दिया। यह सब बदले की भावना से किया गया, जिसके चलते चार्जशीट को खारिज किया जाता है।
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शिकायत के अनुसार महिला पर 26 जुलाई 2015 को गालीगलौज करने और सुरक्षा कॉर्डन को तोड़कर पुलिस के वरिष्ठ अफसर के घर अनधिकृत रूप से दाखिल होने के आरोप पर बडगाम पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। रणबीर पीनल कोड (आरपीसी) की धारा 447-ए और 353 के तहत मामला दर्ज कर बडगाम चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई।
कोर्ट ने पाया कि पुलिस अधिकारी और आरोपी महिला की 14 जून 2001 को शादी हुई थी। दोनों के संबंध ठीक नहीं चल रहे थे। महिला का कहना था कि उसके पति ने बिना उसकी सहमति के दूसरी शादी कर ली। हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजय धर ने कहा कि इस मामले की विवेचना से स्पष्ट है कि रसूखदार अफसर ने बदले की भावना से मामला दर्ज करवाया। तत्कालीन एसएसपी और पहली पत्नी में दीवानी मामला चल रहा है, जिसका कोई नतीजा न निकलने पर एसएसपी ने आपराधिक मामला दर्ज करवा दिया।
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घर पर आने का कानूनी हक तो कैसे रोक सकती है पुलिस
कोर्ट ने कहा कि महिला के पास एसएसपी के घर आने-जाने और रहने का कानूनी हक है। सिविल कोर्ट ने 24 जुलाई 2015 को बाकायदा आदेश जारी कर महिला को घर पर आने-जाने व रहने में किसी तरह की रोक टोक न करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में किसी पुलिस कर्मी के पास महिला को उसके अधिकार से वंचित करने का हक नहीं है। महिला का उस घर में दाखिल होना अनधिकृत प्रवेश (ट्रेसपास) नहीं है।