फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हुनर से एलओसी से सटे गांव को महिलाओं ने दिला दी नई पहचान

विज्ञापन
विज्ञापन
राजोरी। जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे लाम गांव की दो युवतियों समेत चार महिलाएं उद्यमियों के लिए रोल मॉडल बन गई हैं। राजोरी जिले के नौशेरा के इस सुदूरवर्ती और मुश्किलों से जूझने वाले गांव में इन चार महिलाओं की ‘लाम बेकरी’ बेहद लोकप्रिय हो गई है। सेना और असीम फाउंडेशन की मदद से इन चार उद्यमी महिलाआें ने नाजुक दस्तकारी केक और कुकीज को इस तरह से तैयार किया कि अब आसपास के गांवों से इन उत्पादों की भारी मांग आ रही है। लाम बेकरी की संचालक दो महिलाओं रानी और सैनी को पुणे में खुद सेना अध्यक्ष एमएम नरवणे ने सम्मानित किया।
विज्ञापन

सेना के जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने बताया कि मीनाक्षी रानी, तरजिंदर कौर, प्रिया सैनी और सीमा देवी नौशेरा में नियंत्रण रेखा के लाम गांव में लाम बेकरी चला रही हैं। उनके द्वारा तैयार खास किस्म के केक और कुकीज बेहद लोकप्रिय उत्पाद बन गए हैं। रानी और सैनी को बीते वर्ष 22 दिसंबर को महिला सशक्तीकरण में उनके योगदान के लिए थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने सम्मानित किया। सेना और एनजीओ असीम फाउंडेशन के सहयोग से इन महिलाओं ने दुश्वारियाें के बीच सफलता की नजीर पेश कर दी है। नियंत्रण रेखा से चार किलोमीटर दूर स्थित गांव लाम आजादी के बाद से भारत द्वारा लड़े गए सभी युद्धों में सैन्य कार्रवाई देखने वाले सबसे दूरस्थ गांवों में से एक है। सीमावर्ती गांव की चुनौतियों के बावजूद ये महिलाओं ने स्वरोजगार के लिए खुद को तैयार किया है।
-----------
रानी और प्रिया परिवार के लिए भी प्रेरणा
अधिकारी ने कहा कि रानी और कौर अपने बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेवारी का निर्वाह करते हुए बेकरी में काम कर रही हैं। देवी और सैनी युवतियां हैं जो इस प्रयास के पीछे प्रेरक शक्ति बनकर उभरी हैं। कम उम्र में महिलाओं द्वारा किया गया यह गंभीर और अथक प्रयास इस सीमावर्ती गांव में उनके सामने आने वाली बाधाओं का एक ऐसा जवाब है, जो दूसरों के लिए प्रेरणादायक आदर्श स्थापित कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें