नौशेरा ठाकुर द्वारा नौशेरा मे जगदीश चंद्र साहणी प्रदान सनातन धर्म सभा नौशहरा को संमानित करते मो?
नौशेरा। ठाकुर द्वारा खुहवाला में श्रीराम चरितमानस की कथा में मंगलवार को श्रीश्री 1008 इंद्रदेवशरानंद सरस्वती ने कहा कि प्रभु को जिस भाव से देखो, वैसा ही प्रभु दर्शन देते हैं। न वो निराकार है, न साकार। जर्रे-जर्रे में प्रभु समाया है। ढूंढने की जरूरत नहीं है। भगवान के प्रति श्रद्धा भाव रखो, भगवान के बाल स्वरूप से प्यार करो। भगवान का सबसे प्यारा श्रृंगार भगवान का प्रेम है।
कथा वाचक ने कहा कि प्रेम निर्दोष है, प्रेम का फल साकार है। बच्चे का नामकरण शास्त्र के अनुसार करें, बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार दें। अगर नींव कमजोर होगी तो उसकी छत नहीं टिक सकती। बच्चे की प्रथम गुरु उसकी मां होती है। मां ही बच्चे को ज्ञान देती है। शरीर रूपी गाड़ी भगवान ने दी है। मन की न मानें, इंद्रियों को राम कथा से जोड़ें। जैसे संग करोगे वैसा ही बनोगे। ठाकुरद्वारा आपका धाम बन गया है। जन्म लेने के बाद भी जो राष्ट्र के काम न आए वो औलाद किस काम की। संतों के पास जाओ संतों का संग करो, बुराई ओर बीमारी अधिक मत छुपाओ, माता बच्चों की बुराई न छुपाए, बचपन में ही बच्चे सुधारे जाते हैं। बाद में हाथ नहीं आते, विद्या लेने के लिए गुरु की शरण में रहो। विद्यार्थी को कम भोजन व सरल भोजन करना चाहिए।
राजोरी से पधारे भक्त भोली माता का ठाकुरद्वारा पहुंचने पर स्वागत किया गया।