जिले में आतंकवाद के दौर में जहां सुरनकोट तहसील के सुरन नदी के उस पार के क्षेत्रों में आतंकियों के बड़े ठिकाने थे। तहसील के मस्तानदरा, मुगलमाड़ा, देहरागली, दराबा में और मेंढर तहसील के संगयोट, मक्का मजंयाड़ी, भाटादूड़ियां व गुरसाई आतंकियों का गढ़ माना जाता था। ऐसे में अगर चमरेड़ में हुए आतंकी हमले को देखें तो उसके आसपास का इलाका मस्तानदरा व दराबा से सटा हुआ है। हाल ही के भाटादूड़ियां हमले में भी संगयोट, नक्का मंजयाड़ी व गुरसाई का इलाका शामिल है। ये इलाके आतंकवाद के दौर में आतंकियों का गढ़ होते थे। आतंकी गतिविधियों पर गौर किया जाए तो इस तरह के हमले स्थानीय सहयोग के संभव नहीं है। हमलों को अंजाम देने के लिए आतंकियों को कई दिनों तक उसी क्षेत्र में रहना होता है। जहां उन्हें खाने-पीने से लेकर आश्रय लेने तक की जरूरत होती है।
हाल ही के हमलों से यह बात भी पूरी तरह सही साबित हो रही है कि आतंकी संगठनों के आका, आईएसआई और पाकिस्तानी सेना पुंछ व राजोरी में फिर से आतंकवाद की आग में झोंकने का काम कर रही है। राजोरी के थन्नामंडी, सुरनकोट के चमरेड़, और मेंढर के भाटादूड़ियां में हुए हमलों में शामिल आतंकी घुसपैठ करने के बाद घाटी में न जाकर यहीं डेरा डाले हुए हैं। उनकी पूरी साजिश बड़े हमलों को अंजाम दे की है।