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11कक्षाओं के 425 विद्यार्थियों के लिए हाई स्कूल कनूईयां में हैं मात्र चार कमरे,चार वर्ष बीत जाने के बाद भी नई इमारत है निर्माणाध

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पुंछ के गांव कनूईयां हाई स्कूल में खुले में बच्चों को पढाते शिक्षक - फोटो : POONCH
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पुंछ। सरकार एवं शिक्षा विभाग की तरफ से सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी के उद्देश्य से कई प्रकार के अभियान चला कर जहां अभिभावकों को बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए घर-घर संपर्क कर एवं स्कूलों को सुंदर बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। ताकि बच्चे सरकारी स्कूलों की तरफ आकर्षित हों।
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दूसरी तरफ जिला मुख्यालय के निकटवर्ती गांव कनूईयां स्थित सरकारी हाई स्कूल में 11 कक्षाओं के 425 विद्यार्थियाें के लिए मात्र 4 कमरे हैं। इसके कारण न सिर्फ स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों, बल्कि शिक्षकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के लिए अधिकतर कक्षाएं खुले आसमान के नीचे अथवा चिनार के पेड़ के नीचे लगानी पड़ती है। स्कूल के इस छोटे से मैदान की चहारदीवारी न होने के कारण खुले में लगी कक्षाओं में मौजूद छात्र-छात्राएं बाहर की तरफ देखने लगते हैं। इससे पढ़ाई करा रहे शिक्षकों को कई बार उन्हें पढ़ाई की तरफ ध्यान दिलाने के लिए कहना पड़ता है।
इतना ही नहीं अधिक गर्मी और बारिश में सभी कक्षाओं को जारी रख पाना भी असंभव हो जाता है। हाई स्कूल कनूईयां की नौंवी कक्षा की छात्रा रुखसाना कौसर, आसिया कौसर, शुएब इकबाल, दसवीं कक्षा की समीना, शाजिया, रेहान अहमद आदि का कहना है कि हमारे स्कूल में जो शिक्षक हैं वह हमें अच्छी तरह पढ़ाते हैं, परंतु 425 बच्चों के लिए स्कूल में चार ही कक्षाएं लगाने के लिए कमरे हैं। इसके कारण हमें काफी परेशानी होती है।
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स्कूल का वर्ष 2016 में दर्जा बढ़ा कर हाई स्कूल किया गया। इसके बाद हमारे पास आज नर्सरी से दसवीं तक 11 कक्षाएं हैं। उनके लिए मात्र चार कमरे हैं। बरामदा भी बहुत छोटा है। जहां हम कक्षाएं ले सकें। स्कूल में स्टाफ की भी कमी है। हेडमास्टर एवं चार शिक्षकों के पद रिक्त हैं। चपरासी और चौकीदार के पद रिक्त हैं। जो शिक्षक तैनात हैं, वह पूरी लगन से बच्चों को पढ़ाते हैं।
-गुलजार हुसैन, कार्यकारी हेडमास्टर
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नई इमारत का काम दो वर्ष से ठप
स्कूल के लिए वर्ष 2018 से नई इमारत का काम शुरू हुआ था। जो आज तक पूरा नहीं हो पाया है। हमने कई बार जोनल शिक्षा अधिकारी एवं मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय को पत्र लिख कर नई इमारत का निर्माण पूरा कराने का आग्रह किया, परंतु कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। दो वर्षों से काम ठप है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि जिला मुख्यालय से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित सरकारी हाई स्कूल की यह हालत है कि बच्चों के बैठने के लिए कमरे तक नहीं हैं, तो जिले के दूर दराज के सरकारी स्कूलों का क्या हाल होगा।
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