पुंछ। यशपाल शर्मा ने दो दशक में राजनीति के साथ ही धार्मिक कार्यों में भी योगदान दिया है। उन्होंने नगर में करीब छह मंदिरों में सामुदायिक भवनों का निर्माण कराया है। जहां लोग कम पैसे देकर शादी समारोह का आयोजन करा रहे हैं।
वहीं इन सामुदायिक भवनों से मंदिरों में भी आय का स्रोत बन गया है। उधर धार्मिक कार्यों में यशपाल शर्मा ने सबसे बड़ा कार्य पुंछ नगर के बाहर स्थित गांव देरियां में राज्य के पहले नोग्रह मंदिर का निर्माण कराया है। इस पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च हुआ है। यह नवग्रह मंदिर न सिर्फ पुंछ जिले बल्कि जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ा एवं मनोरम धार्मिक स्थल बन गया है, जिसे पुंछ नगर के आसपास के किसी भी गांव से साफ तौर पर देखा जा सकता है। इस नोग्रह मंदिर में शनिवार को यशपाल शर्मा ने शिवालय की जलहरी को सोने से कवर कराने का काम संपन्न कराया। उसके उपरांत धार्मिक अनुष्ठान और भंडारे का आयोजन किया गया। उस कार्य में शर्मा के साथ मौजूद लोगों का कहना है कि उन्होंने शनिवार शाम को ही कहा था कि मेरा कार्य पूर्ण हो गया है। उसके कुछ ही घंटों बाद उन्होंने रात्रि ढाई से तीन बजे के बीच प्राण त्याग दिए।
यशपाल शर्मा को परिवार से ही मिली समाज सेवा की प्रेरणा
पुंछ। पूर्व एमएलसी एवं जननेता यशपाल शर्मा को परिवार से ही समाजसेवा एवं जनसेवा की प्रेरणा मिली थी। उनके पिता मास्टर लभूराम शर्मा शिक्षक थे। उन्होंने 1947 के बंटवारे के बाद भी समाज की सेवा की। इसके कारण न सिर्फ पुंछ में बल्कि पूरे जम्मू प्रांत विशेष कर पीओके विस्थापितों में मास्टर लभूराम शर्मा का बड़ा नाम था। वहीं यशपाल शर्मा के चाचा मास्टर बेलीराम कांग्रेस के कद्दावर नेता एवं राज्य सरकार में मंत्री रहे। मास्टर बेलीराम के पुत्र डॉक्टर रमेश शर्मा भी कांग्रेस नेता एवं गुलाम नबी आजाद सरकार में मंत्री रहे थे। यशपाल शर्मा के साथियों का कहना है कि शर्मा कबड्डी के राष्ट्रीय खिलाड़ी भी थे। शर्मा अपने पीछे सेवानिवृत्त मुख्य शिक्षक पत्नी, दो पुत्रों, दो पुत्रियों और दो छोटे भाइयों को छोड़ गए हैं। संवाद