कार्यकारी अभियंका कार्यालय के समक्ष सरकार के खिलाफ रोष जताते जलशक्ति विभाग के अस्थाई कर्मचारी, ?
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कठुआ। दशकों से जल शक्ति विभाग में सेवा दे रहे अस्थायी कर्मचारियों ने एक बार फिर अपने हकों के लिए हुंकार भरी है। बुधवार को विभाग के कार्यकारी अधिकारी कार्यालय के सामने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी कर दर्जनों अस्थायी कर्मचारियों ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाकर कड़ा रोष जताया।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे रामगोपाल ने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करती है। लेकिन, सरकारी क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए सरकार उसी कानून को नहीं लागू करती। सरकार के इस भेदभावपूर्ण रवैये के चलते जल शक्ति विभाग में काम कर रहे हजारों अस्थायी कर्मचारियों का वर्षों से दोहन किया जा रहा है। हालत यह हैं कि न तो इन कर्मचारियों को पक्का किया जा रहा है, न ही इन्हें सरकार निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दे रही है और न ही इनके लिए मानदेय मानसिक रूप से दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विभाग में सेवा दे रहे अस्थायी कर्मचारियों का मानदेय पिछले 50 महीनों का बकाया है। वर्ष 2019 में इन्हीं मांगों को लेकर कड़ा संघर्ष किया था। तब सरकार ने मांगों पर जल्द गौर करने का आश्वासन दिया था। लेकिन, फिर उन मांगों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। डेढ़ साल से कोरोना महामारी के चलते अस्थाई कर्मचारी अपनी सेवाएं निरंतर विषम परिस्थितियों में जारी रखकर लोगों को पानी पिला रहे थे। इसके बावजूद सरकार का रवैया सकारात्मक नहीं दिख रहा है। ऐसे में कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है।
इस मौके पर मौजूद कर्मचारी नेता शिवनारायण ने कहा कि आने वाली 25 तारीख को कर्मचारियों की बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें जिले भर से आने वाले कर्मचारियों से विचार विमर्श किया जाएगा। इस दौरान अगर सरकार ने अस्थायी कर्मचारियों की सुध नहीं ली, तो उन्हें फिर से हड़ताल का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा। इसकी जिम्मेदार खुद सरकार होगी।