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ईश्वर के श्री चरणों से निष्काम प्रेम करें

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श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करती महिलाएं। संवाद - फोटो : KATHUA
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कठुआ। शहर के वार्ड 2 स्थित पंडोरी धाम आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। मंगलवार को कथा व्यास खेमराज शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष अपने भागवत ज्ञान के माध्यम से धर्म का अर्थ समझाया। वहीं उनके द्वारा प्रस्तुत भजनों पर उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु झूमते रहे।
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कथा में खेमराज शास्त्री ने श्रद्धालुओं को ईश्वर के श्री चरणों से निष्काम प्रेम करना बताया है। नारद जी को भगवान के चरणों से निस्वार्थ प्रेम था और भगवान का सानिध्य प्राप्त किया। यही उपदेश नारद जी ने महार्षि वेदव्यास जी को दिया। जब 17 पुराणों का अध्ययन करने के बाद भी व्यास जी को संतोष नहीं हुआ तो नारद जी ने भागवत का विस्तार करने की प्रेरणा व्यास जी को दी। सुकदेव जी ने वेदव्यास जी से भागवत का अध्ययन किया। जब राजा परीक्षित को शृंग ऋषि ने 7 दिन के बाद तक्षक नाग के डसने से अकाल मृत्यु होने का श्राप दिया तो राजा परीक्षित अपनी मुक्ति का उपाय ढूंढने लगे। इस दौरान उन्होंने हजारों संतों से केवल एक ही प्रश्न किया कि जल्दी मरने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए। लेकिन उनके इस प्रश्न पर सभी ऋषि मौन हो गए। तब सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को भगवत का उपदेश दिया और केवल 7 दिनों में ही राजा को जन्म मरण के बंधन से मुक्त कर दिया। कथाव्यास ने कहा कि मानव का जन्म 7 दिनों में होता है और मृत्यु भी 7 दिन के अंतर्गत होती है। हमारे जीवन में 7 दिनों का बहुत महत्व है। उन्होंने कहा कि सात का अर्थ सत्य है और सत्य केवल परमात्मा है। यह संसार मिथ्या है इस संसार में रहने वाला मनुष्य जीवन में परमात्मा से नश्वर वस्तु को मांगता है और फिर दुख भोगता है। श्री भगवत कथा सप्त सिद्धी परमात्मा से परमात्मा को ही मांगने का अर्थात भक्ति का उपदेश देती है। क्योंकि इसी से सभी जीवों का कल्याण संभव है। कथा के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।
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