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हेलिकाप्टर क्रैश के बाद से लापता पायलटों की तलाश और तेज, कोच्ची की टीम उतरेगी झील में

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कठुआ। रंजीत सागर झील में हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद से लापता दो पायलटों की तलाश और तेज कर दी गई है। 60 बाई 60 मीटर के इलाके को चिह्नित करने के बाद अब कोच्ची से बुलाई गई विशेषज्ञ टीमों को झील की सबसे गहराई वाली जगह तलाश करने के लिए उतारा जाएगा। इसी क्षेत्र में सोनार तकनीक का उपयोग भी यह विशेषज्ञ टीम के सदस्य करेंगे। वहीं, तलाशी अभियान को नतीजे तक पहुंचाने के लिए अब इस्राइल की मदद लेने पर विचार चल रहा है। सूत्रों के अनुसार इस्राइल के पास ज्यादा गहराई में जाकर खोजबीन करने वाले उपकरण हैं, जिन्हें कम वजन के चलते आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकता है।
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सूत्रों के अनुसार हादसे वाले क्षेत्र को पिछले एक सप्ताह से खंगाल रही विभिन्न टीमों ने इस क्षेत्र को चिह्नित किया है। आसपास के इलाकों में जहां गहराई कम है, कुछ भी हाथ नहीं लगा है। चिह्नित क्षेत्र में अधिक गहराई होने के चलते संभावना है कि हेलिकॉप्टर का अगला हिस्सा इसी गहराई में गिरा होगा। हादसे के आठवें दिन मंगलवार को दिन भर अभियान चलाए जाने के बाद भी टीमों के हाथ कुछ नहीं लग पाया है।
मंगलवार को रंजीत सागर बांध का जलस्तर 508.17 फीट दर्ज किया गया है। झील के बीचों बीच जिस जगह हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ है, वहां गहराई का अंदाजा सबसे अधिक लगाया गया है। सेना ने आधिकारिक बयान में भी अभियान का जहां ब्योरा दिया है, वहीं इसमें अंतरराष्ट्रीय मदद लिए जाने की बात भी कही है। झील में क्रैश हुए हेलिकाप्टर में सवार दोनों पायलटों का कोई भी सुराग नहीं लग पाया है। बरसात के सीजन की वजह से झील का पानी उथला है, जिसमें नौसेना के सोनार जैसे अत्याधुनिक उपकरण को भी हेलिकॉप्टर के मलबे का पता लगाने में मुश्किल हो रही है। सेना के अनुसार 50 मीटर से ज्यादा गहराई में कुछ भी देख पाने में मुश्किल पेश आ रही है।
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सेना ने साझा की अभियान की जानकारी
सोमवार को ट्विटर पर नील जोशी नामक एक युवक ने लिखा था कि मेरा भाई कैप्टन जयंत जोशी दो अगस्त को हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद से लापता है। एक सप्ताह बाद भी उन्हें खोजा नहीं जा सका है। तलाशी अभियान बेहद धीमा चल रहा है। मेरी मां ने 40 साल तक सेना में सेवाएं दी हैं। सैन्य परिवार की दूसरी पीढ़ी पिछले एक सप्ताह से ऐसी घड़ी का सामना कर रही है, जहां अब कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही। इसके बाद सेना की पश्चिमी कमान के आधिकारिक ट्विटर हैंडल की ओर से अभियान के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की गई थी।
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