अद्वैत रूवरूप आश्रम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रवचन करते संतजन। संवाद
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कठुआ। शहर के शिवानगर स्थित श्री अद्वैत स्वरूप आश्रम में 32वें वार्षिक भक्ति ज्ञान सम्मेलन का आयोजन जारी है। स्वामी सार शब्दानंद जी महाराज और स्वामी गुरु शरणानंद जी महाराज की प्रेरणा से श्री सार गुरु चरण सेवा सोसायटी की ओर से आयोजित सम्मेलन के दूसरे दिन श्रीरामचरितमानस अखंड पाठ का भोग डाला गया। इसके बाद संकीर्तन और संतों के प्रवचनों का उपस्थित भक्तों ने लाभ प्राप्त किया।
सम्मेलन के दौरान प्रवचन करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी रामानंद जी महाराज ने कहा कि हमारी संस्कृति में सदियों से गुरु का महत्व रहा है। यहां गुरु को ईश्वरतुल्य माना गया है, क्योंकि गुरु न हो तो ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग कौन दिखायेगा। गुरु ही शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और वे ही जीवन को ऊर्जामय बनाते हैं। गुरु प्रवचन, आशीर्वाद और अनुग्रह जिसे भी भाग्य से मिल जाए उसका तो जीवन कृतार्थता से भर उठता है। क्योंकि गुरु बिना न आत्म-दर्शन होता और न परमात्म-दर्शन। इन्हीं की प्रेरणा से आत्मा चैतन्यमय बनती है। गुरु भवसागर पार पाने में नाविक का दायित्व निभाते हैं। वह हमारे मार्गदर्शक, विकास प्रेरक एवं विघ्नविनाशक होते हैं। उनकी सीख जीवन का उद्देश्य बनती है। लिहाजा हमें सदैव उनका अनुसरण करना चाहिए।
कार्यक्रम के संबंध में आश्रम की प्रमुख सार ज्योत्सना नंद बाई जी ने बताया कि आश्रम में दूसरे दिन के कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी रामानंद जी महाराज, स्वामी शब्द प्रेेमानंद जी महाराज, स्वामी आधार शब्दानंद जी महाराज और पुनीत शरणानंद जी महाराज ने अपने धर्म ज्ञान की गंगा का प्रवाह किया। वहीं इस मौके पर भक्ति संगीत ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गुरू के नामगंगा का पावन स्नान करवाया और अंत में भंडारे का आयोजन किया गया है।
उन्होंने बताया कि रविवार को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में सुबह सबसे पहले ध्वजारोहण किया जाएगा। इसके उपरांत राम नाम संकीर्तन और विभिन्न स्थानों से आए संत महात्माओं का प्रवचन का लाभ आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगा।
अद्वैत स्वरूप आश्रम में संत जनों का प्रवचनों का श्रवण करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : KATHUA